
बंगाल चुनाव हारने और अपने ही नेताओं की बगावत झेलने के बीच टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को बड़ी राहत मिली है. मंगलवार (7 जुलाई) को कलकत्ता हाई कोर्ट ने
कोलकाता पुलिस के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें ममता बनर्जी समर्थक तृणमूल युवा कांग्रेस को 8 जुलाई को दक्षिण कोलकाता में विरोध रैली निकालने की परमिशन देने से इनकार किया था. हाई कोर्ट ने विपक्षी गुट को कुछ कड़ी शर्तों के साथ रैली आयोजित करने की अनुमति दे दी है.
जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की बेंच ने रैली के प्रस्तावित रूट में बदलाव करते हुए कहा कि यह ‘बालीगंज फारी’ चौराहे से शुरू होकर हाजरा रोड से गुजरेगी, लेकिन ये पहले से प्रस्तावित सरत बोस रोड स्थित लैंसडाउन मार्केट के बजाय हाजरा चौराहे पर खत्म होगी, जिससे आम जनता को होने वाली असुविधा कम की जा सके. कोर्ट ने रैली का समय भी बदलते हुए इसे दोपहर तीन बजे से शाम छह बजे के बजाय दोपहर ढाई बजे से शाम साढ़े चार बजे तक सीमित कर दिया.
लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर लगाई रोक
साथ ही, लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर रोक लगाते हुए केवल हैंडहेल्ड माइक्रोफोन के उपयोग की अनुमति दी. अदालत ने निर्देश दिया कि रैली मार्ग का एक हिस्सा वाहनों की आवाजाही के लिए खुला रखा जाएगा और गंतव्य पर पहुंचने के बाद भीड़ को तुरंत हट जाना होगा. अदालत ने साथ ही रैली में भाग लेने वालों की संख्या 1000 से अधिक न होने का भी निर्देश दिया.
पुलिस ने रैली की परमिशन देने से किया था इनकार
याचिकाकर्ता ने कोर्ट में दायर रिट याचिका में कहा कि उसने एक जुलाई को रैली की अनुमति मांगी थी, लेकिन छह जुलाई को संयुक्त पुलिस आयुक्त (मुख्यालय) ने वर्किंग डे में रैली से आम जनता को होने वाली असुविधा, आसपास अस्पताल और शैक्षणिक संस्थानों का हवाला देकर अनुमति देने से इनकार कर दिया था. याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि दो जुलाई को प्रस्तावित एक अन्य विरोध रैली की अनुमति भी कोलकाता पुलिस ने पिछले सप्ताह नहीं दी थी.
याचिकाकर्ता ने लगाए ये आरोप
उसका कहना था कि पुलिस का यह रवैया संविधान की ओर से दिए गए शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार का उल्लंघन है. हालांकि, तृणमूल कांग्रेस ने रैली का आधिकारिक एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन माना जा रहा है कि दक्षिण 24 परगना के बारुईपुर में नाबालिग लड़की से दुष्कर्म और हत्या की हालिया घटना इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा होगी.
राज्य सरकार ने दी ये दलील
राज्य सरकार की ओर से अदालत में पेश हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने याचिका का विरोध करते हुए मई 2023 के उच्च न्यायालय के एक फैसले का हवाला दिया. उन्होंने तर्क दिया कि रैली आयोजित करने के लिए आयोजकों को 15 दिन पहले अनिवार्य सूचना देनी चाहिए थी और पुलिस के निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन करना चाहिए था.
अदालत ने कहा, ‘रैली की अनुमति अस्वीकार करते समय पुलिस के आदेश में कहीं भी अपर्याप्त नोटिस का उल्लेख नहीं किया गया था.’ राज्य सरकार की इस दलील पर कि रैली रविवार को आयोजित की जानी चाहिए थी, याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने कहा कि सरकार यह तय नहीं कर सकती कि कोई संगठन किस दिन रैली करेगा.’



