
दिवाली और छठ पूजा नजदीक आते ही दूसरे राज्यों में काम करने वाले लोग अपने घर लौटने की तैयारी में जुट जाते हैं। खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार जाने वाली ट्रेनों में यात्रियों की संख्या काफी बढ़ जाती है। इसी बीच तेलंगाना के सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन से सामने आए एक नजारे ने त्योहारों के दौरान रेल यात्रा की मुश्किलों को उजागर कर दिया है। स्टेशन पर इतनी भीड़ दिखाई दी कि प्लेटफॉर्म पर पैर रखने तक की जगह नहीं बची।
जनरल कोच में चढ़ने के लिए यात्रियों के बीच धक्का-मुक्की
सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की भारी भीड़ जमा थी। जनरल कोच के बाहर लोग ट्रेन में जगह पाने के लिए एक-दूसरे से आगे निकलने की कोशिश कर रहे थे। कई यात्री सिर पर सामान उठाए ट्रेन में चढ़ने की जद्दोजहद करते दिखाई दिए।
प्लेटफॉर्म पर जहां तक नजर जा रही थी, यात्रियों की भीड़ ही दिखाई दे रही थी। दिवाली और छठ पूजा पर अपने परिवार के साथ त्योहार मनाने के लिए लोग किसी तरह घर पहुंचना चाहते हैं। इसी वजह से ट्रेनों में सीट और खड़े होकर सफर करने की जगह पाना भी मुश्किल हो रहा है।
स्लीपर कोच के बाहर भी लगी यात्रियों की कतार
भीड़ का दबाव केवल जनरल डिब्बों तक सीमित नहीं था। स्लीपर और दूसरे कोच के बाहर भी बड़ी संख्या में यात्री जमा थे। त्योहारों के समय ट्रेनों में बढ़ती भीड़ के कारण यात्रियों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।
इसी बीच बिहार से जुड़ा एक और मामला चर्चा में आया, जहां ट्रेन का टिकट नहीं मिलने पर एक व्यक्ति ऑटो रिक्शा से ही करीब 1200 किलोमीटर के सफर पर निकल पड़ा। उसके दो साथी भी इस यात्रा में उसके साथ थे।
अतिरिक्त ट्रेनों और कोच की मांग कर रहे लोग
सिकंदराबाद स्टेशन की भीड़ को लेकर सोशल मीडिया पर लोग अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। कई यूजर्स का कहना है कि दिवाली और छठ के दौरान हर साल ऐसी स्थिति बनती है। लोगों ने रेलवे और सरकार से त्योहारों के समय अतिरिक्त ट्रेनें चलाने और जरूरत के मुताबिक अतिरिक्त कोच लगाने की मांग की है।
त्योहारों पर घर पहुंचना लाखों लोगों के लिए भावनात्मक रूप से बेहद खास होता है, लेकिन अत्यधिक भीड़ के कारण उनका सफर मुश्किल और जोखिम भरा बन जाता है। ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए बेहतर व्यवस्था जरूरी है।
Satya Report डिस्क्लेमर: यह खबर सोशल मीडिया पर सामने आई जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। स्टेशन की मौजूदा स्थिति और यात्रियों की संख्या की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है।



