
नई दिल्ली: पितृ पक्ष में आने वाली सर्वपितृ अमावस्या का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। यह पितृ पक्ष का अंतिम दिन होता है और इस अवसर पर उन पूर्वजों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात न हो या किसी कारण से उनका श्राद्ध निर्धारित तिथि पर न हो पाया हो।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पितरों का स्मरण और अपनी श्रद्धा के अनुसार तर्पण करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होने की कामना की जाती है। साल 2026 में सर्वपितृ अमावस्या की तिथि को लेकर कई लोगों के मन में 9 या 10 अक्टूबर को लेकर सवाल है।
2026 में कब है सर्वपितृ अमावस्या?
पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि 9 अक्टूबर 2026 की रात 9:35 बजे शुरू होगी और 10 अक्टूबर 2026 की रात 9:19 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि और धार्मिक परंपरा के अनुसार सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर 2026 को मनाई जाएगी।
कुतुप और रौहिण मुहूर्त का समय
सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध कर्म के लिए दोपहर का समय महत्वपूर्ण माना जाता है। दिए गए पंचांग के अनुसार मुहूर्त इस प्रकार हैं—
- कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:45 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक
- रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:31 बजे से 1:18 बजे तक
- अपराह्न काल: दोपहर 1:18 बजे से 3:37 बजे तक
श्राद्ध या तर्पण का सही समय स्थान और स्थानीय पंचांग के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है।
सर्वपितृ अमावस्या पर कैसे करें तर्पण?
सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और श्रद्धापूर्वक पितरों का स्मरण करें। इसके बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके कुश, काले तिल, जल और पुष्प आदि का उपयोग करते हुए तर्पण किया जाता है।
हाथ में जल, काले तिल और कुश लेकर पितरों का ध्यान करें और श्रद्धापूर्वक जल अर्पित करें। इसके बाद अपनी क्षमता के अनुसार भोजन तैयार करके जरूरतमंद व्यक्ति या योग्य ब्राह्मण को भोजन कराने की परंपरा है।
कई परिवारों में गाय, कुत्ते और कौवे के लिए भी भोजन निकालने की परंपरा है। अलग-अलग परंपराओं में तर्पण की विधि में अंतर हो सकता है।
तर्पण के समय इस मंत्र का जाप
पारंपरिक रूप से तर्पण के दौरान पितरों का स्मरण करते हुए मंत्र जाप किया जाता है। एक प्रचलित मंत्र है—
“ॐ आगच्छन्तु मे पितर एवं गृह्णन्तु जलाञ्जलिम।”
मंत्र का उच्चारण अपनी परंपरा और धार्मिक विधि के अनुसार किया जा सकता है।
पितृ गायत्री मंत्र का जाप
पितरों की शांति और स्मरण के लिए पितृ गायत्री मंत्र का जाप करने की भी धार्मिक परंपरा है—
“ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च।
नमः स्वधायै स्वाहायै नित्यमेव नमो नमः॥”
इस मंत्र का जाप श्रद्धा और शांत मन से करने की मान्यता है।
सर्वपितृ अमावस्या पर कौन से उपाय किए जाते हैं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन कुछ सरल उपाय किए जा सकते हैं—
- पितरों के नाम से काले तिल और जल का तर्पण करें।
- जरूरतमंद व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र या भोजन का दान करें।
- घर में पितरों का स्मरण करते हुए दीपक जलाएं।
- परंपरा के अनुसार गाय को हरा चारा और कौवे को भोजन कराया जा सकता है।
- पितरों से जाने-अनजाने हुई भूल के लिए श्रद्धापूर्वक क्षमा प्रार्थना करें।
- इस दिन घर में शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखें और अनावश्यक विवाद से बचें।
सर्वपितृ अमावस्या को धार्मिक दृष्टि से पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता और श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर माना जाता है। इसलिए किसी भी कर्मकांड से अधिक महत्वपूर्ण श्रद्धा, सम्मान और अपनी पारिवारिक परंपराओं का पालन माना जा सकता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, परंपराओं और पंचांग संबंधी विवरणों पर आधारित है। इन मान्यताओं की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है। तिथि, मुहूर्त या श्राद्ध की विशेष विधि के लिए अपने क्षेत्र के प्रमाणित पंचांग या स्थानीय विद्वान से पुष्टि करना उचित रहेगा।



