
लुधियाना: पंजाब के लुधियाना में एक बुजुर्ग महिला से करीब 30 लाख रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि डाकघर में रिकरिंग डिपॉजिट (आरडी) खाते खुलवाकर उनमें हर महीने पैसे जमा करने का भरोसा देकर एक व्यक्ति सालों तक महिला से रकम लेता रहा। महिला को जब अपनी जमा पूंजी वापस लेने की जरूरत पड़ी, तब पूरे मामले का खुलासा हुआ।
पीड़ित महिला कुलवंत कौर वार्ड नंबर 86 के मौजूदा पार्षद मंजीत सिंह ढिल्लो की मां हैं। शिकायत में आरोपी की पहचान रोशन लाल कालड़ा के रूप में बताई गई है, जो लक्की एन्क्लेव बस्ती चौक का निवासी बताया गया है।
हर महीने 3 से 5 हजार रुपये ले जाने का आरोप
कुलवंत कौर के मुताबिक, वर्ष 1998 में आरोपी ने डाकघर में उनके तीन आरडी खाते खुलवाने की बात कही थी। इसके बाद वर्ष 1998 से 2012 तक वह हर महीने तीनों खातों में जमा करने के नाम पर उनसे कुल मिलाकर 3 से 5 हजार रुपये लेता रहा।
महिला का आरोप है कि इस दौरान तीनों खातों की अवधि पूरी होने पर रकम दोबारा आरडी में जमा कराने का भरोसा दिया जाता रहा। आरोपी कथित तौर पर हर बार पांच साल बाद खाते के परिपक्व होने की बात कहकर महिला को दूसरी आरडी खुलवाने के लिए राजी करता रहा। इस तरह कई वर्षों तक महिला को अपने पैसे डाकघर में जमा होने का विश्वास बना रहा।
पैसे वापस मांगने पर सामने आई सच्चाई
शिकायत के अनुसार, वर्ष 2025 में जब कुलवंत कौर ने आरोपी से डाकघर में जमा अपनी रकम वापस दिलाने को कहा, तो वह टालमटोल करने लगा। इसके बाद महिला को संदेह हुआ और उन्होंने डाकघर जाकर जानकारी ली।
वहां कथित तौर पर पता चला कि उनके नाम पर कोई आरडी खाता खुला ही नहीं था। महिला ने आरोप लगाया कि आरोपी उन्हें डाकघर के जाली कार्ड दिखाकर भरोसे में लेता रहा और इसी तरह उनकी जमा पूंजी हड़प ली। इतने वर्षों तक पैसे जमा होने का विश्वास करने वाली महिला को जब वास्तविकता पता चली, तो उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक परेशानी भी हुई।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
मामले के जांच अधिकारी तरसेम सिंह के अनुसार, पीड़ित महिला के बयान के आधार पर आरोपी रोशन लाल कालड़ा के खिलाफ साजिश और धोखाधड़ी के आरोप में केस दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि आरोपी की गिरफ्तारी के लिए आगे की कार्रवाई की जा रही है।
फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए होनी बाकी है।
सत्य रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह खबर शिकायत में बताए गए तथ्यों और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। मामले में आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।



