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​​​​स्कूल में पढ़ाई छोड़ बंद कमरे में रहते थे शिक्षक? 100 किमी दूर कलेक्ट्रेट पहुंचे आदिवासी बच्चे, लगाए गंभीर आरोप..

प्रिंसिपल और लेडी टीचर अकेले में बंद कमरे में…’ छिंदवाड़ा में आदिवासी छात्रों का फूटा गुस्सा, 100 किमी दूर कलेक्ट्रेट पहुंचकर खोली पोल

स्कूल में पढ़ाई छोड़ बंद कमरे में रहते थे शिक्षक? 100 किमी दूर कलेक्ट्रेट पहुंचे आदिवासी बच्चे, लगाए गंभीर आरोप

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से शिक्षा व्यवस्था को लेकर हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां आदिवासी छात्र और ग्रामीण अपनी शिकायत लेकर करीब 100 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय पहुंचे। बच्चों ने जनसुनवाई में स्कूल के प्रभारी प्राचार्य और एक महिला अतिथि शिक्षक पर गंभीर आरोप लगाए, जिसके बाद प्रशासन में भी हलचल मच गई।

मामला भूराभगत क्षेत्र के बिचबहरी गांव का बताया जा रहा है। छात्रों का आरोप है कि स्कूल में पढ़ाई का माहौल पूरी तरह बिगड़ चुका है। बच्चों के मुताबिक, शिक्षक पढ़ाने के बजाय मोबाइल चलाने में व्यस्त रहते हैं और निर्धारित समय से पहले ही स्कूल की छुट्टी कर दी जाती है।

छात्रों ने आरोप लगाया कि स्कूल का आधिकारिक समय शाम करीब 4:30 बजे तक है, लेकिन उन्हें दोपहर 3 बजे ही घर भेज दिया जाता है। इसके बाद दोनों शिक्षक स्कूल के एक कमरे में कथित तौर पर शाम करीब 7 बजे तक अंदर रहते हैं। बच्चों का दावा है कि इस दौरान कमरे को अंदर से बंद रखा जाता है और किसी को वहां जाने की अनुमति नहीं होती।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इस मामले की शिकायत पहले भी शिक्षा विभाग और जनजातीय विकास विभाग के अधिकारियों से की थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आखिरकार ग्रामीणों ने 16 अगस्त को ग्रामसभा बुलाई और दोनों शिक्षकों को हटाने की मांग करते हुए प्रस्ताव पारित किया।

स्थानीय स्तर पर सुनवाई नहीं होने के बाद बच्चे और ग्रामीण अपनी फरियाद लेकर जिला मुख्यालय की जनसुनवाई में पहुंचे। करीब 100 किलोमीटर का सफर तय करके पहुंचे इन बच्चों ने अधिकारियों के सामने स्कूल की कथित अव्यवस्थाओं और शिक्षकों के व्यवहार की पूरी जानकारी दी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त ने जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों ने कहा है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल जांच के बाद ही साफ होगा कि स्कूल में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है, लेकिन बच्चों का अपनी शिकायत लेकर इतनी दूर तक पहुंचना शिक्षा व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल जरूर खड़े कर रहा है।

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