Satya Report: 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय सरकारी शिक्षकों की ओर से बड़ी मांगें सामने आई हैं. प्रगतिशील शिक्षक न्याय मंच ने आयोग को सौंपे गए अपने ज्ञापन में वेतन, भत्तों, पेंशन और प्रमोशन से जुड़ी कई अहम सुधारों की मांग की है. संगठन का कहना है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में शिक्षकों की आय और सुविधाओं में बड़ा बदलाव जरूरी है.

न्यूनतम वेतन और फिटमेंट फैक्टर में बढ़ोतरी की मांग
PSNM ने लेवल1 कर्मचारियों के लिए न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹50,000 से ₹60,000 तक करने की मांग की है. वहीं एंट्री लेवल शिक्षक के लिए न्यूनतम वेतन ₹1,34,500 प्रस्तावित किया गया है. इसके साथ ही फिटमेंट फैक्टर को 2.62 से बढ़ाकर 3.83 तक करने की मांग रखी गई है. संगठन का कहना है कि इससे कर्मचारियों की सैलरी में पर्याप्त बढ़ोतरी होगी.
DA मर्ज और भत्तों में सुधार
शिक्षक संगठन ने महंगाई भत्ते को 50% होने पर बेसिक सैलरी में मर्ज करने की मांग की है. साथ ही DA की गणना दो दशमलव तक करने का सुझाव दिया गया है. बच्चों की शिक्षा भत्ता को बढ़ाकर ₹7,000 प्रति माह प्रति बच्चा करने की मांग की गई है, जो फिलहाल करीब ₹2,800 है.
HRA और ट्रांसपोर्ट अलाउंस बढ़ाने का प्रस्ताव
PSNM ने हाउस रेंट अलाउंस को मौजूदा 10%, 20% और 30% से बढ़ाकर 12%, 24% और 36% करने का प्रस्ताव दिया है. इसके अलावा ट्रांसपोर्ट अलाउंस को बेसिक सैलरी का 1215% करने और न्यूनतम ₹9,000 तय करने की मांग की गई है. साथ ही डिजिटल कार्यों के लिए ₹2,000 प्रति माह का नया डिजिटल अलाउंस देने का सुझाव भी शामिल है.
छुट्टियां, बोनस और मेडिकल सुविधाएं
संगठन ने सालाना 14 कैजुअल लीव, 30 अर्न्ड लीव और 20 मेडिकल लीव देने की मांग की है. रिटायरमेंट के समय अर्न्ड लीव एनकैशमेंट को 300 दिन से बढ़ाकर 400 दिन करने का प्रस्ताव है. इसके अलावा न्यूनतम बोनस को ₹6,908 से बढ़ाकर ₹27,640 करने की मांग की गई है. शिक्षकों के लिए 100% कैशलेस मेडिकल सुविधा लागू करने का भी सुझाव दिया गया है.
पेंशन, प्रमोशन और रिटायरमेंट पर जोर
PSNM ने पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू करने की मांग की है और NPS/UPS को समाप्त करने का सुझाव दिया है. इसके अलावा रिटायरमेंट उम्र 60 से बढ़ाकर 65 साल करने की बात कही गई है. प्रमोशन के लिए MACP स्कीम में बदलाव कर 6, 12, 18 और 24 साल पर अपग्रेडेशन देने का प्रस्ताव रखा गया है. कुल मिलाकर, शिक्षक संगठन ने 8वें वेतन आयोग से व्यापक सुधारों की मांग की है. उनका मानना है कि इन बदलावों से शिक्षकों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और शिक्षा व्यवस्था को भी लाभ मिलेगा.



