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नाम इतना लंबा कि खत्म होने में लग गए 20 मिनट! जानिए 2,253 नामों वाले शख्स की कहानी..

दुनिया में एक ऐसा शख्स भी है, जिसके नामों की संख्या जानकर आप हैरान रह जाएंगे. उसकी शादी के दौरान उसके नाम को पढ़ने में ही 20 लग गईं. आखिर उसने इतने नाम क्यों रखे और इसके पीछे क्या वजह थी? आइए जानिए इस अनोखी कहानी का दिलचस्प सच..

नाम इतना लंबा कि खत्म होने में लग गए 20 मिनट! जानिए 2,253 नामों वाले शख्स की कहानी..

World Longest Personal Name: अक्सर किसी व्यक्ति का एक या दो नाम होता है, जबकि कुछ लोगों के तीन नाम भी होते हैं. लेकिन क्या आपने कभी ऐसे इंसान के बारे में सुना है, जिसके नामों की संख्या हजारों में हो? सुनने में यह अजीब जरूर लगता है, लेकिन न्यूजीलैंड के रहने वाले लॉरेंस वॉटकिंस ने ऐसा कारनामा कर दिखाया, जिसने उन्हें दुनिया भर में अलग पहचान दिलाई है. उनके नामों की कुल संख्या 2,253 है और इसी वजह से उनका नाम वर्षों से चर्चा में बना हुआ है.

लॉरेंस की यह अनोखी कहानी 1990 के आसपास शुरू हुई. उस समय उनकी उम्र करीब 24 साल थी और वे ऑकलैंड की एक लाइब्रेरी में काम करते थे. उन्हें कुछ ऐसा करने की इच्छा थी, जिससे उनका नाम विश्व रिकॉर्ड में दर्ज हो सके. इसी दौरान उन्होंने विश्व रिकॉर्ड से जुड़ी किताबों का अध्ययन किया और सबसे ज्यादा नाम रखने का रिकॉर्ड बनाने का फैसला किया.

इसके बाद उन्होंने अलग-अलग भाषाओं के शब्द और नाम इकट्ठा करने शुरू किए. अंग्रेजी, लैटिन, माओरी, जापानी समेत कई भाषाओं से प्रेरित होकर उन्होंने हजारों नामों की सूची तैयार की, इस काम में उनके कुछ दोस्तों ने भी उनका साथ दिया. आखिरकार उन्होंने अपने नाम के साथ कुल 2,253 नाम जोड़कर एक अनोखा रिकॉर्ड बना लिया.

हालांकि, यह रिकॉर्ड बाद में उनके लिए कई मजेदार मुश्किलों की वजह भी बना. जब उनकी शादी हुई, तब कानून के अनुसार विवाह संपन्न कराने वाले अधिकारी को दूल्हे का पूरा कानूनी नाम पढ़ना जरूरी था. जैसे ही नाम पढ़ना शुरू हुआ, समारोह में मौजूद सभी लोग हैरान रह गए. एक-एक नाम पढ़ते-पढ़ते करीब 20 मिनट का समय लग गया.  मेहमानों के लिए यह किसी मनोरंजक घटना से कम नहीं था और पूरा माहौल हंसी से गूंज उठा.

सबसे दिलचस्प बात यह है कि लॉरेंस खुद भी अपने सभी नाम याद नहीं रख पाते. उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि अगर कभी पूरा नाम बताना पड़े, तो उन्हें लिखी हुई सूची का सहारा लेना पड़ता है. इतना ही नहीं, कुछ नामों का सही उच्चारण करना भी उनके लिए आसान नहीं है. रोजमर्रा की जिंदगी में वे सिर्फ अपने शुरुआती कुछ नामों का ही इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि सरकारी दस्तावेजों और अन्य औपचारिक प्रक्रियाओं में इतने लंबे नाम का इस्तेमाल करना बेहद मुश्किल हो जाता है.

लॉरेंस को अपने नाम को आधिकारिक रूप से दर्ज कराने के लिए कानूनी लड़ाई भी लड़नी पड़ी थी. शुरुआत में अधिकारियों ने उनके आवेदन को स्वीकार नहीं किया, लेकिन अदालत से फैसला उनके पक्ष में आया. इस घटना के बाद न्यूजीलैंड में नामकरण से जुड़े नियमों में बदलाव किए गए, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा पैदा न हो.

आज भी लॉरेंस का यह अनोखा रिकॉर्ड लोगों को हैरान करता है. उनका मानना है कि अलग पहचान बनाने के लिए उन्होंने जो कदम उठाया, वही उन्हें दुनिया भर में यादगार बना गया. शायद यही वजह है कि तीन दशक बीत जाने के बाद भी उनका यह रिकॉर्ड लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है

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