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सितंबर में बढ़ सकता है पेट और संक्रमण का खतरा? डॉक्टर ने बताए 7 फूड्स, डाइट में करें शामिल..

सितंबर में बढ़ सकता है पेट और संक्रमण का खतरा? डॉक्टर ने बताए 7 फूड्स, डाइट में करें शामिल..

Health Tips: मानसून की विदाई के साथ सितंबर में मौसम तेजी से बदलता है। उमस, तापमान में उतार-चढ़ाव और कई जगहों पर पानी व भोजन के दूषित होने का जोखिम बढ़ने से कुछ लोगों को पेट संबंधी परेशानी और संक्रमण का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सितंबर में हर व्यक्ति को वायरल फीवर, टाइफाइड या पाचन संबंधी समस्या होना तय है।

ऐसे मौसम में साफ पानी, ताजा भोजन, अच्छी नींद और संतुलित डाइट शरीर को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं। डॉक्टरों और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स की सलाह के मुताबिक कुछ पौष्टिक खाद्य पदार्थों को नियमित डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है।

मूंग दाल है हल्का और पौष्टिक विकल्प

मूंग दाल को आमतौर पर आसानी से पचने वाली दालों में शामिल किया जाता है। इसमें प्रोटीन, फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं।

अगर मौसम बदलने के दौरान गैस, पेट फूलने या भारीपन जैसी समस्या होती है, तो हल्की मूंग दाल या मूंग दाल की खिचड़ी एक अच्छा विकल्प हो सकती है।

हल्दी वाला दूध भी कर सकते हैं डाइट में शामिल

हल्दी में करक्यूमिन नामक सक्रिय यौगिक पाया जाता है, जिसमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों पर शोध हुआ है।

हल्दी को दूध में मिलाकर लिया जा सकता है। इसमें थोड़ी काली मिर्च मिलाने से करक्यूमिन के अवशोषण में मदद मिल सकती है।

हालांकि, हल्दी वाला दूध किसी बीमारी का इलाज नहीं है। वहीं जिन लोगों को दूध से एलर्जी या लैक्टोज इनटॉलरेंस है, उन्हें इसका सेवन अपनी सहनशीलता के अनुसार करना चाहिए।

बादाम से मिलेंगे हेल्दी फैट और विटामिन E

बादाम में प्रोटीन, फाइबर, हेल्दी फैट, विटामिन E और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं।

इन्हें भिगोकर या सामान्य रूप से भी खाया जा सकता है। बादाम को भिगोना जरूरी नहीं है, लेकिन अगर आपको भीगे हुए बादाम पसंद हैं तो उन्हें संतुलित मात्रा में डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है।

दही आंतों की सेहत के लिए हो सकता है उपयोगी

ताजा और सही तरीके से रखा गया दही प्रोटीन, कैल्शियम और कुछ जीवित बैक्टीरियल कल्चर का स्रोत हो सकता है। ऐसे प्रोबायोटिक कल्चर कुछ लोगों की गट हेल्थ को सपोर्ट कर सकते हैं।

हालांकि, हर व्यक्ति की पाचन क्षमता अलग होती है। अगर दही खाने से गैस, पेट फूलना या दूसरी परेशानी होती है तो इसका सेवन कम करना या डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।

मौसमी फल जरूर खाएं

पपीता, अमरूद, सेब और नाशपाती जैसे फल फाइबर, विटामिन, मिनरल और एंटीऑक्सीडेंट यौगिकों के अच्छे स्रोत हो सकते हैं।

इनमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने और कब्ज की समस्या में मदद कर सकता है। इस मौसम में फल खरीदते समय उनकी ताजगी का ध्यान रखें और खाने से पहले उन्हें अच्छी तरह धो लें।

अदरक को खाने में कर सकते हैं शामिल

अदरक में जिंजरोल सहित कई जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं। शोध में अदरक को मतली और कुछ पाचन संबंधी लक्षणों में संभावित मदद से जोड़ा गया है।

इसे सब्जी, दाल या चाय में सीमित मात्रा में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, ज्यादा अदरक खाने से कुछ लोगों को सीने में जलन या पेट में परेशानी हो सकती है।

नींबू के साथ पर्याप्त पानी पिएं

नींबू विटामिन C का अच्छा स्रोत है और विटामिन C शरीर के सामान्य इम्यून सिस्टम के कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

नींबू का रस भोजन में शामिल करने से पौधों से मिलने वाले नॉन-हीम आयरन के अवशोषण में भी मदद मिल सकती है।

लेकिन सिर्फ नींबू पानी पीने से किसी संक्रमण से सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलती। सितंबर और मानसून के दौरान सबसे जरूरी है कि पीने का पानी साफ और सुरक्षित हो।

टाइफाइड से बचाव में साफ पानी और भोजन जरूरी

टाइफाइड समेत कई संक्रमण दूषित पानी या भोजन के जरिए फैल सकते हैं। इसलिए सड़क किनारे खुले में रखे कटे फल, खुले जूस, अधपका भोजन और लंबे समय से बाहर रखा खाना खाने से बचना बेहतर है।

फल-सब्जियों को अच्छी तरह धोकर खाएं और पीने के लिए सुरक्षित पानी का इस्तेमाल करें। भोजन को अच्छी तरह पकाकर और उचित तरीके से स्टोर करना भी जरूरी है।

सिर्फ फूड्स पर निर्भर न रहें

संतुलित डाइट शरीर को जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद करती है, लेकिन कोई एक फूड इम्यूनिटी को अचानक ‘बूस्ट’ करके संक्रमण से पूरी सुरक्षा नहीं देता।

पर्याप्त नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि, साफ-सफाई, सुरक्षित पानी और संतुलित आहार मिलकर बेहतर स्वास्थ्य बनाए रखने में मदद करते हैं।

अगर लगातार बुखार, तेज पेट दर्द, उल्टी, दस्त, कमजोरी या संक्रमण जैसे लक्षण दिखाई दें तो खुद से इलाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। किसी भी खाद्य पदार्थ को बीमारी की दवा या इलाज न समझें। टाइफाइड या किसी अन्य संक्रमण के लक्षण होने पर डॉक्टर से जांच और उचित उपचार कराएं। अपनी एलर्जी, बीमारी या व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार डाइट में बदलाव करने से पहले हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह लें।

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