
गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश: खोड़ा इलाके की वंदना विहार कॉलोनी में 35 वर्षीय अंशुल की हत्या के मामले में पुलिस जांच के दौरान ऐसी कहानी सामने आई, जिसमें शक की सुई पहले मकान मालिक की ओर मोड़ने की कोशिश की गई थी। पुलिस के मुताबिक, इस हत्याकांड में अंशुल की पत्नी निशा और उसके मौसेरे बहनोई पप्पू उर्फ गंगा भगत की भूमिका सामने आई।
10 अक्टूबर को अंशुल अपने किराए के कमरे में अकेला था। इसी दौरान गोली मारकर उसकी हत्या कर दी गई। अंशुल मूल रूप से लखीमपुर खीरी का रहने वाला था और नोएडा की एक सिलाई कंपनी में काम करता था।
पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि निशा और पप्पू पिछले करीब दो साल से संपर्क में थे। पप्पू कुछ महीनों से अंशुल और निशा के साथ रह रहा था। पुलिस के अनुसार, अंशुल को दोनों के रिश्ते पर शक हो गया था और उसने परिवार के सामने भी इस बात को उठाया था। जांच में दावा किया गया कि दोनों अंशुल को रास्ते से हटाकर शादी करना चाहते थे।
पुलिस के मुताबिक, वारदात वाले दिन अंशुल कमरे में सो रहा था। तभी पप्पू ने पीछे से उसके सिर पर अवैध तमंचा सटाकर गोली मार दी। इसके बाद वह मौके से फरार हो गया और फोन करके निशा को घटना की जानकारी दी।
मकान मालिक को शक के घेरे में लाने की कोशिश
पुलिस का दावा है कि हत्या के बाद आरोपियों ने मकान मालिक पर शक जाने की योजना बनाई थी। इसके लिए करीब 10 महीने का किराया भी बकाया रखा गया था। शाम को घर लौटने के बाद निशा ने रोते हुए मकान मालिक पर आरोप लगाने शुरू कर दिए। हालांकि, पुलिस की जांच में उसकी भूमिका भी सामने आ गई।
अंशुल की बहन की शिकायत के बाद पुलिस ने जांच तेज की। पुलिस ने करीब 12 घंटे के भीतर निशा और पप्पू को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल .315 बोर का तमंचा और खोखा कारतूस भी बरामद किया गया। पुलिस के अनुसार, पप्पू ने तमंचा नाले में फेंक दिया था, जिसे चुंबक की मदद से निकाला गया।
मामले में आर्म्स एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गईं। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की।
सत्यम रिपोर्ट: यह कहानी पुलिस की जांच और पूछताछ में सामने आए दावों पर आधारित है। आरोपों और घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में होगा।



