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​​​​​डायनासोर के दौर से भी पहले समंदर में छिपा था यह रहस्यमयी जीव, 23.7 करोड़ साल पुराने कंकालों ने वैज्ञानिकों को चौंकाया

​​​​​डायनासोर के दौर से भी पहले समंदर में छिपा था यह रहस्यमयी जीव, 23.7 करोड़ साल पुराने कंकालों ने वैज्ञानिकों को चौंकाया

डायनासोर के धरती पर आने से भी पहले समुद्र की गहराइयों में एक ऐसा अनोखा जीव मौजूद था, जिसके बारे में अब तक वैज्ञानिकों को पूरी जानकारी नहीं थी। चीन में मिले करीब 23.7 करोड़ साल पुराने दो जीवाश्मों ने प्राचीन समुद्री दुनिया से जुड़ा एक बड़ा रहस्य सामने ला दिया है। हैरानी की बात यह है कि यह जीव उभयचर होने के बावजूद जमीन या मीठे पानी के बजाय समुद्री वातावरण में रहने के लिए अनुकूलित था।

इस प्राचीन जीव का नाम ‘गेरोथोरैक्स मैरिटिमस’ (Gerrothorax maritimus) बताया गया है। इसकी खोज चीन के गुइझोउ प्रांत में मिले दो लगभग पूर्ण कंकालों के आधार पर की गई। इस शोध को विज्ञान पत्रिका ‘नेचर इकोलॉजी एंड इवोल्यूशन’ में प्रकाशित किया गया है। अध्ययन से जुड़े वैज्ञानिकों में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, डेविस के रयोसुके मोटानी और पेकिंग यूनिवर्सिटी के लिपिन डियाओ शामिल हैं।

कैसा दिखता था करोड़ों साल पुराना यह जीव?

वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस जीव की लंबाई करीब 73.7 सेंटीमीटर थी। इसका शरीर बड़े सैलामेंडर जैसा, चपटा और मजबूत बनावट वाला था। इसके शरीर पर हड्डियों का एक मजबूत कवच भी मौजूद था। माना जा रहा है कि यह समुद्र की तलहटी में छिपकर रहता था और आसपास से गुजरने वाले छोटे जीवों को अपना शिकार बनाता था।

उभयचर होकर भी समुद्र में कैसे रहता था?

यह खोज इसलिए खास मानी जा रही है क्योंकि आज के अधिकांश उभयचर जीव, जैसे मेंढक और सैलामेंडर, खारे समुद्री पानी में रहने के लिए अनुकूलित नहीं होते। उनकी त्वचा और शरीर की जैविक संरचना उन्हें समुद्री वातावरण में लंबे समय तक रहने में मुश्किल पैदा करती है। इसके बावजूद गेरोथोरैक्स मैरिटिमस के जीवाश्म बताते हैं कि प्राचीन काल में कुछ उभयचर जीवों ने समुद्र में रहने के लिए अलग तरह से खुद को ढाल लिया था।

वैज्ञानिकों को कैसे मिला समुद्र में रहने का सबूत?

शोधकर्ताओं ने इस निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए जीवाश्मों के आसपास की चट्टानों और उनकी हड्डियों का अध्ययन किया। दोनों कंकाल समुद्री चट्टानों में मिले थे। इसके अलावा, उनकी हड्डियों में स्ट्रोंटियम तत्व की मात्रा का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं के अनुसार, इसके संकेत उस समय के समुद्री वातावरण से मेल खाते हैं।

जीवाश्मों के आसपास समुद्र में रहने वाले अन्य प्राचीन जीवों के अवशेष भी मिले, जिनमें इक्थियोसॉर जैसे समुद्री सरीसृप शामिल थे। इन सबूतों ने इस जीव के समुद्री जीवन से जुड़े निष्कर्ष को मजबूती दी।

क्यों महत्वपूर्ण है यह खोज?

इस अध्ययन से पता चलता है कि करोड़ों साल पहले जीवों ने अलग-अलग पर्यावरण में जीवित रहने के लिए किस तरह अनुकूलन किया था। यह खोज उभयचरों के विकास और प्राचीन समुद्री पारिस्थितिकी को समझने में वैज्ञानिकों की मदद कर सकती है।

चीन में मिले ये जीवाश्म इस बात का भी संकेत देते हैं कि प्राचीन समुद्रों में ऐसे कई जीव मौजूद थे, जिनके बारे में अभी बहुत कुछ जानना बाकी है।

Satya Report डिस्क्लेमर: यह समाचार प्रकाशित वैज्ञानिक शोध और उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित है। प्राचीन जीवों की बनावट और जीवनशैली से जुड़े कुछ विवरण वैज्ञानिकों के अध्ययन और निष्कर्षों पर आधारित हैं।

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