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पुश्तैनी सोना बेचने जा रहे हैं? संभल जाइए! बिना बिल के देना पड़ सकता है भारी-भरकम टैक्स, जानें क्या कहते हैं नियम? ..

पुश्तैनी सोना बेचने जा रहे हैं? संभल जाइए! बिना बिल के देना पड़ सकता है भारी-भरकम टैक्स, जानें क्या कहते हैं नियम? ..

अगर आप पैसों की जरूरत या अच्छे रिटर्न के लालच में घर में रखी सोने की पुरानी ज्वैलरी, सिक्के, बिस्किट या पुश्तैनी सोना बेचने की सोच रहे हैं, तो जरा रुक जाइए! सोना बेचने पर सिर्फ उसकी बाजार कीमत (Market Value) ही मायने नहीं रखती, बल्कि इनकम टैक्स (Income Tax) के नियम भी आप पर लागू होते हैं। आयकर विभाग के नजरिए से यह बहुत अहम है कि वह सोना आपने खुद खरीदा था, किसी रिश्तेदार से गिफ्ट में मिला था या फिर आपको विरासत (Ancestral Property) में मिला है। अगर आपके पास पुश्तैनी सोने का बिल नहीं है, तो आपको अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा टैक्स के रूप में चुकाना पड़ सकता है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि सोना बेचने पर टैक्स के क्या नियम हैं और आप इससे कैसे बच सकते हैं।

खुद की खरीदी ज्वैलरी बेचने पर क्या है टैक्स का गणित? समझें LTCG का नया नियम

अगर आपने खुद अपनी कमाई से सोने की ज्वैलरी, सिक्के या बिस्किट खरीदे हैं, तो इसे बेचने पर होल्डिंग पीरियड (Holding Period) के आधार पर टैक्स लगता है। अगर आप सोना खरीदने के 24 महीने (2 साल) बाद उसे बेचते हैं, तो होने वाले मुनाफे पर आपको 12.5 फीसदी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स चुकाना होगा।

वहीं, अगर आप 24 महीने पूरे होने से पहले ही सोना बेच देते हैं, तो वह शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) माना जाएगा। यह मुनाफा सीधे आपकी कुल सालाना इनकम में जुड़ जाएगा और आप जिस भी इनकम टैक्स स्लैब (Tax Slab) में आते हैं, उसी के हिसाब से आपको टैक्स देना होगा।

विरासत या गिफ्ट में मिले सोने पर कब और कैसे लगता है इनकम टैक्स?

विरासत (पुश्तैनी सोना): अगर आपको सोना माता-पिता या दादा-दादी से विरासत में मिला है, तो इसे ‘पाने’ (Receive) पर कोई टैक्स नहीं लगता। लेकिन जब आप इसे बेचेंगे, तो टैक्स देना होगा। इसका कैलकुलेशन पहले मालिक (दादा-दादी या माता-पिता) की खरीद कीमत और होल्डिंग पीरियड को जोड़कर किया जाता है। यानी इसे सीधे तौर पर लॉन्ग टर्म कैपिटल एसेट माना जाएगा।

गिफ्ट का सोना: अगर माता-पिता, पति-पत्नी या अन्य तय रिश्तेदारों से सोना गिफ्ट में मिला है, तो वह टैक्स फ्री है। लेकिन, अगर किसी दोस्त या गैर-रिश्तेदार से एक वित्त वर्ष में 50,000 रुपये से ज्यादा कीमत का सोना गिफ्ट में मिलता है, तो उसकी पूरी वैल्यू आपकी ‘इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज’ (Income from Other Sources) में जुड़ जाएगी और उस पर टैक्स लगेगा।

पुश्तैनी सोना बेच रहे हैं तो रखें ध्यान, बिल न होने पर लग सकता है भारी टैक्स

पुश्तैनी सोने के मामले में सबसे बड़ी समस्या यह आती है कि अक्सर लोगों के पास उसकी खरीद का पुराना बिल (Gold Purchase Bill) नहीं होता। बिल न होने की स्थिति में आप यह साबित नहीं कर पाएंगे कि सोना कितने में खरीदा गया था। ऐसे में आयकर विभाग पूरी बिक्री राशि को ही आपका मुनाफा मान सकता है, जिससे टैक्स का बोझ बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा।

अगर आपके पास बिल है तो आप ज्वैलरी खरीदते समय चुकाए गए 3 फीसदी जीएसटी (GST) और मेकिंग चार्ज को भी अपनी खरीद लागत (Cost of Acquisition) में जोड़ सकते हैं। इससे आपका कैपिटल गेन (मुनाफा) कम दिखेगा और टैक्स की देनदारी भी घट जाएगी।

सिर्फ फिजिकल नहीं, डिजिटल गोल्ड और ETF पर भी लागू होते हैं टैक्स नियम

अगर आप फिजिकल गोल्ड (गहने-सिक्के) के बजाय डिजिटल गोल्ड (Digital Gold) में निवेश करते हैं, तो उस पर भी फिजिकल गोल्ड वाले ही टैक्स नियम लागू होते हैं। हालांकि, अगर आपने गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) में निवेश किया है, तो उसके लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) का पीरियड 24 महीने के बजाय सिर्फ 12 महीने का होता है, जो टैक्स बचाने के लिहाज से एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।

सोना सदियों से भारतीयों के लिए सुरक्षित निवेश और आपातकाल में काम आने वाली संपत्ति रहा है। लेकिन टैक्स नियमों की जानकारी न होने के कारण कई लोग मुनाफा कमाने के बजाय टैक्स का भारी जुर्माना भर देते हैं। इसलिए, जब भी पुश्तैनी सोना या भारी मात्रा में ज्वैलरी बेचें, तो हमेशा अपनी खरीद की रसीद साथ रखें और किसी सर्टिफाइड टैक्स एक्सपर्ट (CA) से सलाह जरूर लें। पर्सनल फाइनेंस और टैक्स बचाने के ऐसे ही और टिप्स जानने के लिए हमारे साथ जुड़े रहें।

सवाल: क्या सोने की ज्वैलरी बेचने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स लगता है?

जवाब: हां, अगर आप सोना खरीदने के 24 महीने बाद उसे बेचते हैं, तो मुनाफे पर 12.5% LTCG टैक्स देना होता है।

सवाल: दादी से मिले सोने को बेचने पर खरीद कीमत कैसे तय होगी?

जवाब: दादी से मिले सोने को बेचने पर टैक्स कैलकुलेशन के लिए दादी ने वह सोना जितने में खरीदा था (उनकी खरीद कीमत) उसी को आधार माना जाएगा।

सवाल: क्या गोल्ड ETF बेचना फिजिकल गोल्ड बेचने से ज्यादा फायदेमंद है?

जवाब: टैक्स के लिहाज से हां, क्योंकि गोल्ड ETF में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन का पीरियड सिर्फ 12 महीने का होता है, जबकि फिजिकल गोल्ड में यह 24 महीने है।

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