सोचिए, अगर कोई ज्योतिषाचार्य लोगों का भविष्य बताने का दावा कर रहा हो और खुद अपने ही परिवार की चीजों में गलत निकले तो क्या होगा. ऐसा ही हुआ है मशहूर ज्योतिषाचार्य आचार्य इंदु प्रकाश मिश्रा के साथ, जो कि लखनऊ खंड स्नातक एमएलसी चुनाव के बाद काफी ट्रोल हो रहे हैं. दरअसल, आचार्य इंदु प्रकाश मिश्रा की पत्नी स्मिता मिश्रा लखनऊ खंड स्नातक एमएलसी चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरी थीं. लेकिन, चुनाव में उनको हार का सामना करना पड़ा.

चुनाव से पहले स्मिता मिश्रा 28 सितंबर 2026 को कांग्रेस में शामिल हुई थीं और टिकट मिलने की उम्मीद कर रही थीं. उस समय उत्तर प्रदेश कांग्रेस की कमान अजय राय के हाथों में थी. हालांकि, पार्टी से टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया. उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें 300 वोट भी नहीं मिले, जिसके बाद उनकी हार चर्चा में है. अब रिजल्ट सामने आने के बाद से सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आईं हैं, जिसमें लोग इंदु प्रकाश मिश्रा का मजाक उड़ा रहे हैं.
लोगों ने उड़ाया इंदु प्रकाश मिश्रा का मजाक
दरअसल, ज्योतिषी आचार्य इंदु प्रकाश मिश्रा ने कई भविष्यवाणियों का दावा किया है. उनकी वेबसाइट पर नेल्सन मंडेला की रिहाई, सोवियत संघ का विघटन, 11 सितंबर को ट्विन टावर्स पर हमले जैसी और भी कई भविष्यवाणियों का जिक्र है. लेकिन, स्मिता की हार के बाद से लोगों का कहना है कि जो दूसरों का भविष्य बताता है, वो अपनी पत्नी की चुनावी संभावनाओं का अंदाजा कैसे नहीं लगा पाया. कुछ लोगों ने कहा कि जो लोगों की परेशानियों के लिए उपाय बताता है, उसने अपनी पत्नी के बारे में क्यों नहीं बताया.
स्मिता ने भविष्यवाणी न करने पर क्या कहा?
हालांकि, मीडिया से बात करते हुए स्मिता ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ये उनका डिसीजन था कि वो ज्योतिषी से अपने चुनाव की संभावनाओं के बारे में कुछ नहीं पूछा. उन्होंने कहा कि अलगअलग राजनीतिक पार्टियों से जुड़े लोग उनके पास जाते हैं और उनके बताए गए पूजापाठ या उपायों को अपनाकर सफलता पाई है, लेकिन मैंने MLC का चुनाव सत्ता या पद के लिए नहीं लड़ा. मेरा इरादा जनता की सेवा करना और धर्मार्थ काम करना था.
प्रचारप्रसार में काफी मेहनत की थी
इस चुनाव के लिए स्मिता ने प्रचारप्रसार में काफी मेहनत की थी. उन्होंने ग्रेजुएट्स, युवाओं और शिक्षण संस्थानों से जुड़े लोगों तक पहुंच बनाने की कोशिश की. प्रचार अभियान को मजबूत करने के लिए अखबारों में फुलपेज विज्ञापन भी प्रकाशित करवाए. इसके अलावा, उन्हें नव युवक दल, करणी सेना और स्थानीय ब्रह्म समाज समेत कई सामाजिक संगठनों का समर्थन भी मिला. हालांकि, इन तमाम कोशिशों के बावजूद वह मतदाताओं का पर्याप्त समर्थन हासिल नहीं कर सकीं और उन्हें हार का सामना करना पड़ा.
स्मिता ने चुनाव प्रक्रिया पर लगाए आरोप
रिपोर्टों के मुताबिक, स्मिता मिश्रा ने अपनी हार के बाद चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मतदान केंद्रों पर उनके पोलिंग एजेंटों को बैठने नहीं दिया गया और फर्जी वोटिंग भी हुई. उनका यह भी दावा था कि शिकायत के बावजूद चुनाव आयोग ने कार्रवाई नहीं की.
स्मिता मिश्रा ने वोटर लिस्ट तैयार करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए. उनका दावा है कि उनके समर्थकों ने करीब 22,000 फॉर्म ऑनलाइन भरे थे, लेकिन इन्हें जमा करने के बाद भी वोटर लिस्ट में नाम शामिल किए जाने को लेकर कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला.



