
झारखंड के देवघर जिले में साइबर ठगी के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी फ्लिपकार्ट, अमेजन और एयरटेल पेमेंट बैंक जैसी कंपनियों के कस्टमर केयर प्रतिनिधि बनकर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। इसके अलावा गूगल पर फर्जी फोनपे कस्टमर केयर नंबर के जरिए लोगों को ठगने और सरकारी योजनाओं व लोन का लालच देने के आरोप भी सामने आए हैं।
जंगल में चल रहा था ठगी का खेल
पुलिस को सूचना मिली थी कि पथरड्डा ओपी क्षेत्र के सूराभूरा जंगल में कुछ लोग मोबाइल फोन के जरिए साइबर ठगी कर रहे हैं। सूचना के आधार पर साइबर डीएसपी कैलाश प्रसाद महतो के नेतृत्व में 15 अक्टूबर को छापेमारी की गई। इस दौरान पुलिस ने तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया।
पुलिस ने आरोपियों के पास से तीन मोबाइल फोन और तीन सिम कार्ड बरामद किए हैं। शुरुआती जांच में इन उपकरणों के साइबर ठगी में इस्तेमाल होने के संकेत मिलने की बात कही गई है।
कभी कस्टमर केयर तो कभी सरकारी योजना का झांसा
जांच के अनुसार, आरोपी खुद को नामी ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियों या एयरटेल पेमेंट बैंक का कर्मचारी बताकर लोगों से संपर्क करते थे। इसके अलावा गूगल पर फोनपे कस्टमर केयर के नाम से फर्जी नंबरों का इस्तेमाल करने का भी आरोप है।
पुलिस का कहना है कि आरोपी प्रधानमंत्री किसान योजना और लोन दिलाने का लालच देकर भी लोगों को निशाना बनाते थे। ऐसे मामलों में ठग अक्सर लोगों से निजी जानकारी या बैंकिंग संबंधी विवरण हासिल करने की कोशिश करते हैं, जिसके बाद उनके साथ आर्थिक धोखाधड़ी की जा सकती है।
तीन गांवों से पकड़े गए आरोपी
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पथरड्डा ओपी क्षेत्र के धनपलासी गांव निवासी संदीप दास, करहैया गांव निवासी छोटु कुमार दास और कुण्डारो गांव निवासी श्रवण यादव के रूप में हुई है।
पुलिस ने बताया कि छोटु कुमार दास का पहले भी साइबर थाना देवघर में दर्ज एक मामले से संबंध रहा है। वह वर्ष 2023 के एक साइबर अपराध मामले में पहले आरोपपत्रित हो चुका है।
पुलिस की जांच जारी
छापेमारी टीम में साइबर थाना और पथरड्डा ओपी की पुलिस शामिल थी। अब बरामद मोबाइल फोन और सिम कार्ड की जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपियों ने कितने लोगों को निशाना बनाया और ठगी की रकम का लेन-देन कहां हुआ।
साइबर सुरक्षा सलाह: किसी भी कंपनी के कस्टमर केयर नंबर को आधिकारिक वेबसाइट या ऐप से ही सत्यापित करें। अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंकिंग जानकारी साझा न करें और न ही संदिग्ध लिंक खोलें।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट और पुलिस की शुरुआती जानकारी पर आधारित है। आरोपियों के खिलाफ मामले में अंतिम निष्कर्ष कानूनी प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।



