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सट्टेबाजी के नए तरीके पर कसा शिकंजा… क्या है मेंशन मार्केट, कैसे लगता है करोड़ों का दांव? अमेरिका में रडार पर पूरा सिस्टम

डिजिटल सट्टेबाजी और वित्तीय तकनीक की दुनिया में प्रेडिक्शन मार्केट तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं. इन्हीं का एक नया और विवादित रूप है मेंशन मार्केट. इसमें लोग किसी चुनाव, मैच या आर्थिक आंकड़े के नतीजे पर नहीं, बल्कि किसी व्यक्ति के बोले जाने वाले शब्दों पर दांव लगाते हैं. अमेरिका में इन बाजारों को लेकर जांच शुरू हो गई है. मुख्य चिंता यह है कि इन्हें आसानी से प्रभावित किया जा सकता है.

आइए, जानते हैं कि क्या है मेंशन मार्केट? अमेरिका में क्यों हो रही जांच? कौन से प्लेटफॉर्म्स पर कसा गया है शिकंजा?

मेंशन मार्केट का मतलब क्या है?

मेंशन का अर्थ है किसी शब्द, नाम या वाक्यांश का उल्लेख करना. मेंशन मार्केट में एक सवाल रखा जाता है. फिर लोग उसके संभावित जवाब पर पैसा लगाते हैं. उदाहरण के लिए सवाल हो सकता है

  • क्या राष्ट्रपति अपने अगले भाषण में टैरिफ शब्द बोलेंगे?
  • क्या किसी कंपनी के सीईओ आय घोषणा कॉल में एआई का उल्लेख करेंगे?
  • क्या खेल कमेंटेटर लाइव मैच में एमवीपी शब्द कहेगा?
  • क्या किसी टीवी इंटरव्यू में किसी खास कंपनी या नेता का नाम लिया जाएगा?

इसमें आम तौर पर दो विकल्प होते हैंहां और नहीं. यदि तय समय में वह शब्द बोल दिया जाता है, तो हां चुनने वालों को भुगतान मिलता है. अगर शब्द नहीं बोला जाता, तो नहीं चुनने वाले जीतते हैं.

यह मॉडल दिखने में सरल है. लेकिन इसके पीछे बड़ा जोखिम छिपा है. जिस व्यक्ति के शब्दों से नतीजा तय होगा, वही व्यक्ति नतीजे को बदल भी सकता है.

मेंशन मार्केट्स में लोगों को मनोरंजन और पैसे कमाने की संभावना दिखती हैं. फोटो: Pexels

यह सामान्य प्रेडिक्शन मार्केट से अलग कैसे है?

सामान्य प्रेडिक्शन मार्केट किसी बाहरी घटना पर आधारित होता है. जैसे चुनाव कौन जीतेगा, ब्याज दर बढ़ेगी या नहीं, कोई कंपनी कब नया उत्पाद पेश करेगी या किसी टीम की जीत होगी या नहीं? मेंशन मार्केट का परिणाम अक्सर एक व्यक्ति की भाषा पर निर्भर करता है. वह व्यक्ति भाषण बदल सकता है. वह किसी शब्द को जानबूझकर जोड़ या हटा सकता है. उसका सहायक, लेखक, निर्माता या टेलीप्रॉम्प्टर ऑपरेटर भी पहले से जानकारी रख सकता है. यही कारण है कि इन बाजारों को सामान्य भविष्यवाणी बाजारों से अधिक संवेदनशील माना जा रहा है.

यह बाजार इतना लोकप्रिय क्यों हुआ?

मेंशन मार्केट्स में लोगों को मनोरंजन और पैसे कमाने की संभावना दिखती हैं. लाइव भाषण, खेल प्रसारण, कॉरपोरेट कॉल और टीवी शो पहले से ही लोगों का ध्यान खींचते हैं. इन कार्यक्रमों के साथ दांव लगाने का विकल्प जुड़ने से रुचि और बढ़ जाती है. प्लेटफॉर्म्स के लिए भी यह नया व्यवसाय है. खेलों से बाहर के उपयोगकर्ताओं को जोड़ा जा सकता है. राजनीति, मनोरंजन, कारोबार और मीडिया से जुड़ी कई श्रेणियां बनाई जा सकती हैं. इन बाजारों के समर्थक कहते हैं कि बड़े नेताओं और उद्योगपतियों के शब्दों का असर शेयर बाजार, मुद्रा बाजार और क्रिप्टो बाजारों पर पड़ता है.

मेंशन मार्केट्स में हेरफेर के कई तरीके हो सकते हैं. फोटो: Pexels

अमेरिका में जांच क्यों शुरू हुई?

अमेरिका की कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमीशन प्रेडिक्शन मार्केट से जुड़े कुछ वित्तीय अनुबंधों की निगरानी करती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, एजेंसी यह देख रही है कि मेंशन मार्केट में हेरफेर का खतरा कितना है. नियामकों की सबसे बड़ी चिंता अंदरूनी जानकारी है. मान लीजिए किसी व्यक्ति को पहले से पता है कि किसी नेता के भाषण में कौन से शब्द होंगे. वह व्यक्ति दांव लगाकर लाभ कमा सकता है. यह व्यक्ति भाषण लेखक, सहायक, तकनीकी कर्मचारी, टीवी प्रोड्यूसर या रिकॉर्डिंग टीम का सदस्य हो सकता है. ऐसी स्थिति में आम उपयोगकर्ता को बराबर मौका नहीं मिलता. वह केवल अनुमान लगा रहा होता है. दूसरी ओर, अंदरूनी जानकारी रखने वाला व्यक्ति लगभग पक्के नतीजे के आधार पर दांव लगा सकता है.

टेलीप्रॉम्प्टर से जुड़ा विवाद क्या है?

इस मामले में एक चर्चित घटना ने अमेरिकी अधिकारियों की चिंता बढ़ाई. कई रिपोर्ट में कहा गया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लंबे समय से टेलीप्रॉम्प्टर ऑपरेटर रहे एक व्यक्ति ने भाषणों में आने वाले शब्दों से जुड़े दांव लगाए और लाभ कमाया. अफसरों ने कहा कि उसके निगरानी तंत्र ने संदिग्ध समय वाले दांव पहचाने और मामले को संघीय अधिकारियों तक पहुंचाया. यह मामला जांच और कानूनी प्रक्रिया का विषय है. इसलिए इसे अंतिम कानूनी निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए. फिर भी इस घटना ने एक अहम सवाल उठाया.

हेरफेर आसान क्यों है?

मेंशन मार्केट्स में हेरफेर के कई तरीके हो सकते हैं. वक्ता खुद अपने शब्द बदल सकता है. कोई करीबी व्यक्ति उससे खास शब्द कहलवा सकता है. पहले से रिकॉर्ड हुए इंटरव्यू या शो में मौजूद व्यक्ति को परिणाम सार्वजनिक होने से पहले पता हो सकता है. कंपनी की आय घोषणा कॉल की स्क्रिप्ट कई कर्मचारियों के पास हो सकती है. कई बार हेरफेर जानबूझकर भी नहीं होता. कोई सीईओ मजाक में कुछ शब्द बोल सकता है. कोई कमेंटेटर किसी शब्द को बारबार दोहरा सकता है. किसी टीवी एंकर की जुबान फिसल सकती है. फिर भी इन घटनाओं से दांव का नतीजा बदल सकता है. कॉइनबेस के सीईओ ब्रायन आर्मस्ट्रांग ने एक कॉल के दौरान कुछ चर्चित क्रिप्टो शब्द बोलकर यह दिखाने की कोशिश की थी कि ऐसे बाजारों को कितनी आसानी से प्रभावित किया जा सकता है. यह उदाहरण मेंशन मार्केट्स की कमजोर बनावट पर सवाल खड़े करता है.

गलत रिपोर्टिंग से भी हो सकता है नुकसान

सिर्फ अंदरूनी जानकारी ही जोखिम नहीं है. गलत रिपोर्टिंग भी बड़ा नुकसान कर सकती है. विश्व कप फाइनल के दौरान एक प्रसारण में कमेंटेटर ने कथित तौर पर अभिनेता मैट डेमन को ब्रैड पिट समझ लिया था. इसके बाद कुछ समाचार स्रोतों में भी गलत जानकारी दिखाई गई. कई रिपोर्ट में कहा गया है कि संबंधित बाजार का निपटारा पहले से तय नियमों और स्रोतों के आधार पर हुआ. इस तरह की घटनाएं बताती हैं कि नतीजा तय करने वाली एजेंसी या समाचार स्रोत बहुत महत्वपूर्ण होते हैं. अगर स्रोत गलत हो, तो सही जानकारी रखने वाला व्यक्ति भी हार सकता है. इसलिए अनुबंध की भाषा और निपटारे के नियम साफ होना जरूरी हैं.

किन प्लेटफॉर्म्स पर नजर है?

  • कल्शी: यह अमेरिका में प्रेडिक्शन मार्केट की एक प्रमुख कंपनी है. जांच की खबरों के बाद कल्शी ने खेलों से जुड़े मेंशन मार्केट्स हटाए हैं. इनमें कमेंटेटर द्वारा किसी शब्द के बोलने पर आधारित अनुबंध शामिल थे. रिपोर्ट्स के अनुसार, राजनीति, कॉरपोरेट आय कॉल और समाचार प्रसारण से जुड़े कुछ अन्य मेंशन मार्केट अलग स्थिति में उपलब्ध रहे. जांच का अंतिम दायरा और परिणाम अभी पूरी तरह सार्वजनिक नहीं है.
  • पॉलीमार्केट: यह भी प्रेडिक्शन मार्केट की दुनिया का बड़ा नाम है. इसकी अंतरराष्ट्रीय सेवा पर मेंशन मार्केट उपलब्ध रहे हैं. यह अंतर समझना जरूरी है.

अमेरिकी राज्यों में भी बढ़ा विवाद

संघीय जांच के साथ कई अमेरिकी राज्यों में भी प्रेडिक्शन मार्केट्स को लेकर कानूनी विवाद चल रहे हैं. कुछ राज्य इन प्लेटफॉर्म्स के खेल संबंधी अनुबंधों को सट्टेबाजी जैसा मानते हैं. कंपनियां कहती हैं कि उनके उत्पाद संघीय वित्तीय नियमों के तहत आते हैं. वाशिंगटन, मिशिगन, नेवादा और मैसाचुसेट्स जैसे राज्यों में कल्शी के कुछ बाजारों को लेकर रोक या कानूनी चुनौतियों की खबरें सामने आई हैं. यह बहस केवल मेंशन मार्केट तक सीमित नहीं है. इसमें राज्य कानून, खेल सट्टेबाजी और संघीय नियामकीय अधिकार का बड़ा मुद्दा भी शामिल है.

क्या कहते हैं ये प्लेटफॉर्म्स?

प्लेटफॉर्म कंपनियां कहती हैं कि वे अनियमित सट्टेबाजी नहीं, बल्कि पारदर्शी और निगरानी वाले बाजार उपलब्ध कराती हैं. उनके अनुसार, प्रभावशाली नेताओं और कंपनियों के शब्द पहले से ही बाजारों को प्रभावित करते हैं. इसलिए उन शब्दों से जुड़े अनुमान को पूरी तरह बेकार नहीं कहा जा सकता. तर्क यह भी है कि उनके यहां लेनदेन का रिकॉर्ड रहता है. संदिग्ध दांव पर नजर रखी जा सकती है. कई जगह स्थिति सीमा और निगरानी तंत्र भी होते हैं. उनके अनुसार, यह व्यवस्था अनियंत्रित ऑनलाइन सट्टेबाजी से बेहतर है.

आलोचकों की आपत्तियां भी कम नहीं

आलोचकों का कहना है कि मेंशन मार्केट निवेश या विश्लेषण से अधिक व्यवहार आधारित जुआ है. इसमें किसी व्यक्ति के शब्दों को पैसा कमाने का साधन बनाया जाता है. इससे वक्ता पर दबाव डालने, निजी जानकारी खरीदने और ऑनलाइन अभियान चलाने की प्रेरणा मिल सकती है. आलोचक यह भी कहते हैं कि आम उपयोगकर्ता नहीं जान सकता कि सामने वाला व्यक्ति अंदरूनी जानकारी रखता है या नहीं. तेज लाइव बाजार लोगों को जल्दबाजी में पैसा लगाने के लिए भी उकसा सकते हैं. इसलिए उपभोक्ता सुरक्षा, आयु सत्यापन और जोखिम चेतावनी की जरूरत बताई जा रही है.

इस मामले में आगे क्या हो सकता है?

नियामक एजेंसी यह तय कर सकती है कि मेंशन मार्केट्स हेरफेर के लिए आसानी से संवेदनशील हैं या नहीं. एजेंसी प्लेटफॉर्म्स की निगरानी प्रणाली, अनुबंधों के नियम, निपटारे के स्रोत और शिकायत प्रक्रिया की भी समीक्षा कर सकती है. जांच के बाद अतिरिक्त नियम बन सकते हैं. कुछ बाजारों पर सीमा लग सकती है. कुछ श्रेणियां बंद भी हो सकती हैं.

मेंशन मार्केट तकनीक, मीडिया और सट्टेबाजी का मिलाजुला रूप है. यह रोचक दिख सकता है, लेकिन इसमें निष्पक्षता का बड़ा सवाल है. जब किसी व्यक्ति के शब्दों से नतीजा तय होता है, तो वह व्यक्ति या उसका करीबी नतीजा बदलने की स्थिति में भी हो सकता है. अमेरिका की जांच इसी मूल प्रश्न पर केंद्रित है. क्या मेंशन मार्केट निष्पक्ष भविष्यवाणी बाजार हैं, या वे अंदरूनी जानकारी और हेरफेर के लिए बहुत आसान रास्ता बन सकते हैं? कल्शी और पॉलीमार्केट जैसे प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ती निगरानी का असर पूरे प्रेडिक्शन मार्केट उद्योग पर पड़ सकता है.

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