सोमवार को जब घरेलू शेयर बाजार खुलेगा, तो निवेशकों की नज़र खासतौर पर दो बड़े प्राइवेट बैंकों—IDFC First Bank और AU Small Finance Bank के स्टॉक्स पर रहने वाली है। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने सरकारी फंड से जुड़े कथित 661 करोड़ रुपये के एक बड़े घोटाले की जांच के तहत चंडीगढ़, पंचकुला और दिल्लीएनसीआर में छह प्रमुख ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है। आरोप है कि सरकारी गबन की इस भारीभरकम राशि का दुरुपयोग इन दोनों बैंकों में खोले गए खातों के माध्यम से किया गया था।

सीनियर सरकारी अधिकारियों के ठिकानों पर रेड
जांच एजेंसी CBI ने यह छापेमारी 6 जून को की, जिसमें हरियाणा कैडर के सीनियर सरकारी अधिकारियों के आवास और विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड व उसके डायरेक्टर से जुड़े परिसर शामिल थे। सीबीआई के मुताबिक, यह मामला हरियाणा सरकार के 8 विभागों और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के 2 विभागों के फंड की अवैध हेराफेरी से जुड़ा है।
बैंक अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों का नापाक गठजोड़
सीबीआई की जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि इस घोटाले को अंजाम देने के लिए कुछ सरकारी कर्मचारी और बैंक अधिकारी आपस में मिले हुए थे। इन लोगों ने मिलकर पहले बैंक में फर्जी या अनधिकृत खाते खुलवाए, फिर सरकारी धन को उन अकाउंट्स में ट्रांसफर कराया और बाद में उस मोटी रकम को दूसरी जगह डायवर्ट कर दिया। इसके बदले में आरोपी अधिकारियों को अनुचित वित्तीय लाभ और रिश्वत मिलने का दावा किया गया है।
CBI ने पंचकुला कोर्ट में दाखिल की चार्जशीट
जांच का पहला चरण पूरा करते हुए सीबीआई ने पंचकुला स्थित विशेष सीबीआई अदालत में अपनी पहली चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट में ‘हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड’ और ‘हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद’ के कर्मचारियों की संलिप्तता और उनके तौरतरीकों का पूरा ब्योरा दिया गया है। बैंकों का नाम इस घोटाले से सीधे जुड़ने के कारण सोमवार को शेयर बाजार में इन दोनों स्टॉक्स में भारी उतारचढ़ाव देखने को मिल सकता है।



