काशी हिंदू विश्वविद्यालय के ट्रॉमा सेंटर में मरीज का गलत ऑपरेशन, कुलपति के आदेश पर जांच कमेटी गठित.

गलत ऑपरेशन के 20 दिन बाद महिला की मौत
बलिया निवासी मृतक महिला मरीज के पोते मृत्युंजय कुमार ने बताया कि राधिका नाम की दो मरीज ट्रॉमा सेंटर में भर्ती हुई थीं. एक स्पाइनल कॉर्ड में ट्यूमर से पीड़ित थी. दूसरे के पैर में फ्रैक्चर था. 07 मार्च को फ्रैक्चर का ऑपरेशन करने ट्यूमर के मरीज को ओटी में ले गए. पैर की सर्जरी के दौरान फ्रैक्चर नहीं मिला तो ऑपरेशन थियेटर में डॉक्टरों को शक हुआ कि गलत मरीज का ऑपरेशन कर रहे हैं. हड़बड़ी में उसके पैर को सिलकर बाहर भेज दिया. बाद में 18 मार्च को उसकी न्यूरो सर्जरी की गई. लेकिन लगातार हालात बिगड़ने के चलते 27 मार्च को महिला की अस्पताल में मौत हो गई.
परिजनों की शिकायत पर जांच कमेटी का गठन
महिला के पोते मृत्युंजय पाल ने मामले की शिकायत बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी और आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो. एसएन संखवार से की. कुलपति ने रिपोर्ट तलब की तो लापरवाही सामने आ गई. इतना ही नहीं निदेशक की तरफ से मामले की जांच में भी लापरवाही बरती गई. जिस डॉक्टर अमित रस्तोगी की टीम की लापरवाही से महिला की मौत हुई थी. उसी डॉ. अमित रस्तोगी को जांच कमेटी का अध्यक्ष बना दिया गया. मामला सामने आने बाद जांच अधिकारी को बदल दिया गया.
ट्रॉमा सेंटर में महिला की गलत सर्जरी के मामले में मृत्युंजय पाल की शिकायत पर आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो. एसएन संखवार ने दो अप्रैल को चार सदस्यीय फैक्ट फाइडिंग कमेटी बनाई. इसमें आर्थोपेडिक्स विभाग के प्रो. अमित रस्तोगी को अध्यक्ष, न्यूरोसर्जरी के प्रो. कुलवंत सिंह, डेंटल फैकल्टी के प्रो. अजीत विक्रम परिहार को सदस्य और ट्रॉमा सेंटर के सहायक कुलसचिव को सचिव बनाया. कमेटी को 10 दिन के भीतर रिपोर्ट देने को कहा गया.
जांच रिपोर्ट पर होगा एक्शन
आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो. एसएन संखवार ने बताया कि कमेटी गठन के बाद खुद प्रो. अमित रस्तोगी ने यह जानकारी दी कि जिस महिला की गलत सर्जरी की शिकायत की गई है वह सर्जरी उन्हीं की टीम के डॉक्टरों ने की थी. प्रो. रस्तोगी ने जांच कमेटी के अध्यक्ष पद से हटाने को कहा था. निदेशक ने बताया कि कमेटी का चेयरमैन अब प्रो. अजीत को बनाया गया है. रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.



