
जयपुर, राजस्थान: साइबर ठगों ने 90 वर्षीय बुजुर्ग को जांच और गिरफ्तारी का डर दिखाकर 2 करोड़ 15 लाख रुपये से अधिक की रकम ठग ली। आरोपियों ने खुद को मुंबई का सीबीआई अधिकारी और रिजर्व बैंक का मैनेजर बताकर बुजुर्ग को कथित तौर पर डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसाया। मामले की जांच करते हुए जयपुर की ज्योति नगर थाना पुलिस ने केरल के एर्नाकुलम से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान आनंद बाबू (26), निवासी वरापुझा, एर्नाकुलम और इबिन बेसिल (31), निवासी एलमक्करा, एर्नाकुलम के रूप में हुई है। पुलिस दोनों को केरल से गिरफ्तार कर जयपुर लाई है। आरोप है कि उन्होंने बुजुर्ग को डराकर अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवाए।
हवाला लेन-देन का डर दिखाकर बुजुर्ग को फंसाया
पुलिस उपायुक्त दक्षिण राजर्षि राज के अनुसार, शिकायत रविंद्र सिंह मोहनोत ने दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि उनके 90 वर्षीय मामा गणपत सिंह भंडारी के पास व्हाट्सऐप पर एक कॉल आई थी। कॉल करने वाले व्यक्ति ने पुलिस की वर्दी पहन रखी थी और खुद को मुंबई, महाराष्ट्र का सीबीआई अधिकारी बताया था।
कथित अधिकारी ने बुजुर्ग से कहा कि मुंबई में 50 करोड़ रुपये के हवाला लेन-देन का मामला सामने आया है और इसमें कुछ रकम उनके बैंक खाते में भी जमा हुई है। इसके बाद उन्हें जांच में सहयोग नहीं करने पर गिरफ्तार कर मुंबई ले जाने की धमकी दी गई।
आरोप है कि ठगों ने बुजुर्ग को इस कदर डरा दिया कि उन्होंने परिवार के किसी सदस्य को भी इसकी जानकारी नहीं दी। इसी दौरान उनसे अलग-अलग बैंक खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर करवा ली गई।
बैंक खातों की जांच करते हुए केरल पहुंची पुलिस
थानाप्रभारी गुंजन सोनी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने पीड़ित के बैंक खातों, लेन-देन और रकम प्राप्त करने वाले खातों की जांच शुरू की। संदिग्ध बैंक खातों की पहचान कर उन्हें फ्रीज कराने की कार्रवाई भी की गई।
जांच के दौरान पुलिस को करीब 70 लाख रुपये के लेन-देन से जुड़े एक आईसीआईसीआई बैंक खाते की जानकारी मिली। इसी तरह बैंकिंग लेन-देन से जुड़े सुरागों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई और पुलिस आरोपियों तक पहुंची।
पुलिस ने इस मामले में आनंद बाबू और इबिन बेसिल को गिरफ्तार किया है। मामले में 2 करोड़ 15 लाख रुपये से अधिक की साइबर ठगी की जांच जारी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि ठगी की रकम किन-किन खातों में भेजी गई और इस नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल थे या नहीं।
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ऐसे बनाते हैं शिकार
इस तरह की साइबर ठगी में अपराधी पुलिस, सीबीआई या दूसरी जांच एजेंसियों के अधिकारी बनकर लोगों को फोन करते हैं। वे मनी लॉन्ड्रिंग, हवाला लेन-देन या किसी गंभीर अपराध में नाम आने का डर दिखाते हैं। इसके बाद गिरफ्तारी की धमकी देकर पैसे ट्रांसफर करवाने की कोशिश करते हैं।
ध्यान रखें कि फोन या ऑनलाइन कॉल पर किसी व्यक्ति को इस तरह आधिकारिक तौर पर गिरफ्तार करके लगातार निगरानी में रखने की धमकी देना गंभीर चेतावनी का संकेत है। ऐसी स्थिति में घबराकर पैसे ट्रांसफर न करें। परिवार के किसी भरोसेमंद सदस्य को जानकारी दें और पुलिस या साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 से संपर्क करें।
सत्य रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट और पुलिस की ओर से दी गई जानकारी पर आधारित है। आरोपियों के खिलाफ मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।



