अयोध्या में दीपोत्सव के दसवें संस्करण को यादगार बनाने की तैयारियां तेज हो गई हैं. शनिवार को सरयू नदी के तट पर 30 लाख से अधिक मिट्टी के दीये जलाए जाएंगे, जबकि रात के आसमान में 2,100 ड्रोन के जरिए रामायण के प्रसंगों को जीवंत किया जाएगा. के मुख्य कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे. हालांकि, शनिवार को मुख्य आयोजन का दिन है, लेकिन उत्सव नौ नवंबर तक चलेगा. आठ नवंबर को भी सांस्कृतिक और सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.

वहीं, नौ नवंबर को विशेष रूप से अयोध्या के स्थानीय लोगों के लिए अलग ड्रोन शो का आयोजन होगा. विदेशों में तैनात 34 भारतीय राजदूतों को भी दीपोत्सव में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है. राम की पैड़ी समेत अयोध्या के प्रमुख स्थानों पर सजावट और अन्य तैयारियां अंतिम चरण में हैं. पांच नवंबर से शुरू हुआ यह पांच दिवसीय उत्सव नौ नवंबर तक चलेगा.
सैंड आर्टिस्ट ने बनाया राम दरबार
रेत मूर्तिकार मधुरेंद्र कुमार अपने चार सहयोगियों के साथ राम कथा पार्क में अयोध्या राम दरबार की रेत मूर्ति बनाई है, जिसकी लंबाई 58 फीट और वजन 220 टन है इसको बनाने में कुल 7 दिन का समय लगा है.
56 घाटों पर जलेंगे 30 लाख से ज्यादा दीये
दीपोत्सव का मुख्य आयोजन 7 नवंबर को राम की पैड़ी पर होगा. इस दौरान सरयू नदी के किनारे स्थित 56 घाटों पर 30 लाख से अधिक मिट्टी के दीये जलाए जाएंगे. इस भव्य आयोजन को सफल बनाने के लिए अयोध्या के विभिन्न कॉलेजों के करीब 35 हजार छात्र जुटे हुए हैं.
दीपोत्सव का सफर 2017 में लगभग 1.71 लाख दीयों से शुरू हुआ था. इसके बाद हर साल आयोजन का दायरा बढ़ता गया. पिछले साल यानी 2025 में 26.17 लाख दीये जलाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया गया था. इस बार 30 लाख से अधिक दीये जलाकर नया रिकॉर्ड बनाने की तैयारी है.
सरयू आरती में शामिल होंगे 2,147 लोग
दीपोत्सव के दौरान सरयू महाआरती भी विशेष आकर्षण होगी. इसमें जनप्रतिनिधियों, पार्षदों और आम लोगों समेत कुल 2,147 लोग हिस्सा लेंगे. नदी के तट पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आरती की जाएगी. इसके लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं.
2100 ड्रोन से आसमान में दिखेगी रामायण
इस बार दीपोत्सव में तकनीक का भी भव्य प्रदर्शन होगा. रात के समय 2,100 स्वदेशी ड्रोन आसमान में अलगअलग आकृतियां बनाकर रामायण के प्रमुख प्रसंगों को प्रदर्शित करेंगे. पिछले साल इस शो में 1,100 ड्रोन का इस्तेमाल किया गया था। इस बार इनकी संख्या लगभग दोगुनी कर दी गई है.
इसके अलावा सरयू नदी में एक तैरता हुआ मंच तैयार किया जाएगा. इस पर नृत्य, संगीत और हिंदी कहानी के माध्यम से भगवान राम की अयोध्या वापसी का दृश्य प्रस्तुत किया जाएगा. कार्यक्रम में आठ मिनट का लेजर शो, 20 मिनट की प्रोजेक्शन मैपिंग और म्यूजिकल आतिशबाजी भी शामिल होगी.
पूरे शहर में दिखेगी रामायण की झलक
दीपोत्सव के दौरान अयोध्या को रामायण की थीम पर सजाया जाएगा. शहर में 13 थीम आधारित प्रवेश द्वार, 20 सेल्फी पॉइंट और कई विशेष इंस्टॉलेशन तैयार किए जाएंगे. लता मंगेशकर चौक से राम की पैड़ी तक रामायण के अलगअलग प्रसंगों को प्रदर्शित किया जाएगा.
इसके साथ ही पर्यटकों को ऑगमेंटेड रियलिटी तकनीक के जरिए रामायण के पांच दृश्यों को 3D में देखने का मौका मिलेगा. इसके लिए Android और iOS पर उपलब्ध एप्लिकेशन का इस्तेमाल किया जा सकेगा. पर्यटक राम की पैड़ी पर निर्धारित स्थानों को स्कैन करके अपने आसपास रामायण के दृश्य देख सकेंगे. वे इन दृश्यों को रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा भी कर पाएंगे.
डिजिटल आउटरीच अभियान के तहत देशभर में रील बनाने और पेंटिंग प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इसके जरिए पांच करोड़ लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है.
सात कांडों पर आधारित 22 झांकियां निकालेंगी
दीपोत्सव के दौरान रामायण के सात कांडों पर आधारित 22 भव्य झांकियों की शोभायात्रा भी निकाली जाएगी. इसमें राम रथ, राम दरबार और पुष्पक विमान विशेष आकर्षण होंगे. रामकथा पार्क में सैंड आर्ट और रामायण की थीम पर आधारित दूसरी कलाकृतियां भी प्रदर्शित की जाएंगी.
इस बार दीपोत्सव को अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक रंग भी दिया गया है. दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, नेपाल, लाओस और थाईलैंड की रामलीला टीमें अयोध्या में अपनी प्रस्तुतियां देंगी. इन देशों के कलाकार अपनी भाषाओं, पारंपरिक परिधानों, संगीत और नाट्य शैलियों के माध्यम से रामकथा का मंचन करेंगे.
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए शहर में 12 मंच तैयार किए गए हैं. इनमें छह छोटे, चार मध्यम और दो बड़े मंच शामिल हैं. इन पर करीब 2,500 कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे. उत्तर प्रदेश के 16 जिलों के कलाकारों के साथ दूसरे राज्यों के कलाकार भी इसमें हिस्सा लेंगे.
कार्यक्रमों में कर्नाटक का डोलू कुनिथा, राजस्थान का घूमर, बिहार का झिझिया, पीलीभीत की थारू परंपरा और गोरखपुर का वनटांगिया नृत्य भी देखने को मिलेगा. इसके अलावा अलगअलग राज्यों के करीब 1,000 कलाकार समूह शहर के विभिन्न स्थानों पर प्रस्तुतियां देंगे. 12 देश और 13 राज्यों के कलाकार सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे.



