रामलला के दर्शन के लिए अयोध्या पहुंचने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खबर है. श्री राम जन्मभूमि मंदिर को प्रसाद की गुणवत्ता, स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा के निर्धारित मानकों पर खरा उतरने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण का प्रतिष्ठित ईट राइट प्लेस ऑफ वर्शिपBHOG प्रमाणपत्र प्रदान किया गया है. मंदिर ने 114 में से 103 अंक हासिल कर अतिविशिष्ट श्रेणी में स्थान बनाया है. इस प्रमाणपत्र के जरिए मंदिर में प्रसाद की शुद्धता और खाद्य सुरक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों को मान्यता मिली है.

10 अक्टूबर को अयोध्या में आयोजित कार्यक्रम में FSSAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजित पुन्हानी अपनी टीम के साथ पहुंचे और प्रमाणपत्र वितरण कार्यक्रम में शामिल हुए. अयोध्या के कुल छह पूजा स्थलों को यह प्रमाणपत्र दिया गया. इस पहल का उद्देश्य मंदिरों में तैयार होने वाले प्रसाद और श्रद्धालुओं को वितरित किए जाने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है.
47 मानकों पर हुआ मूल्यांकन, 103 अंक हासिल
श्री राम मंदिर का मूल्यांकन खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता से जुड़े 47 मानकों के आधार पर किया गया. इसके लिए कुल 114 अंक निर्धारित थे. मंदिर ने 103 अंक हासिल किए, जिसके बाद उसे अतिविशिष्ट श्रेणी में प्रमाणित किया गया. इस मूल्यांकन में मंदिर की रसोई, खाद्य पदार्थों के भंडारण, भोजन तैयार करने और वितरित करने की व्यवस्था सहित खाद्य सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं को परखा जाता है. प्रमाणन प्रक्रिया में खाद्य संचालकों का प्रशिक्षण भी शामिल है, ताकि प्रसाद तैयार करने से लेकर श्रद्धालुओं तक पहुंचाने तक स्वच्छता और सुरक्षा के मानकों का पालन सुनिश्चित हो सके.
प्रसाद केवल भोजन नहीं, आस्था और गरिमा का प्रतीक
FSSAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजित पुन्हानी ने कहा कि सुरक्षित है, तो खाद्य है ईट राइट अभियान का मूल मंत्र है. उन्होंने कहा कि करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र श्री राम मंदिर में आना उनके लिए विशेष सौभाग्य की बात है. प्रसाद केवल भोजन नहीं, बल्कि आस्था और गरिमा का प्रतीक है. श्रद्धालुओं तक सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण प्रसाद पहुंचाना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है.
उन्होंने बताया कि सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन को बढ़ावा देने के लिए ईट राइट अभियान के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों और कॉलेजों को भी प्रमाणित किया जा रहा है. इसी क्रम में पूजा स्थलों के लिए भी प्रमाणन की व्यवस्था लागू की गई है.
पांच चरणों में मिलता है BHOG प्रमाणपत्र
ईट राइट प्लेस ऑफ वर्शिपBHOG प्रमाणपत्र हासिल करने के लिए पांच चरणों की प्रक्रिया पूरी करनी होती है. सबसे पहले पूजा स्थल के पास FSSAI का वैध लाइसेंस या पंजीकरण होना जरूरी है. इसके बाद अधिकृत ऑडिटर रसोई, भंडारण क्षेत्र और भोजन कक्ष का निरीक्षण करता है.
तीसरे चरण में खाद्य सुरक्षा से जुड़े कर्मचारियों को FoSTaC के तहत प्रशिक्षण दिया जाता है. चौथे चरण में 47 मानकों की चेकलिस्ट के आधार पर मूल्यांकन किया जाता है. इसके बाद FSSAI की स्वीकृति मिलने पर प्रमाणपत्र जारी होता है.
निर्धारित मूल्यांकन में 100 से 114 अंक प्राप्त करने वाले पूजा स्थल अतिविशिष्ट श्रेणी में आते हैं. 91 से 99 अंक पाने वाले स्थल संतोषजनक श्रेणी में रखे जाते हैं. वहीं, 77 से 90 अंक मिलने पर सुधार की जरूरत मानी जाती है और दोबारा ऑडिट किया जाता है.
दो साल तक मान्य, हर पखवाड़े होगी आंतरिक समीक्षा
श्री राम मंदिर को मिला BHOG प्रमाणपत्र दो साल तक मान्य रहेगा. इस अवधि में राज्य और केंद्र के अधिकारियों की ओर से ऑडिट किया जाएगा. इसके अलावा श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की आंतरिक ऑडिट टीम भी निर्धारित चेकलिस्ट के आधार पर हर पखवाड़े समीक्षा करेगी.
इस व्यवस्था का मकसद केवल प्रमाणपत्र हासिल करना नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता के मानकों को लगातार बनाए रखना है. इससे प्रसाद की गुणवत्ता की निगरानी और खाद्य सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा सुनिश्चित की जाएगी.
अयोध्या के छह पूजा स्थलों को मिला प्रमाणपत्र
अयोध्या में श्री राम मंदिर के अलावा हनुमानगढ़ी, कनक भवन, जैन मंदिर और देवकाली सहित कुल छह पूजा स्थलों को BHOG प्रमाणपत्र प्रदान किया गया. कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की विशेष सचिव एवं अपर आयुक्त रेखा चौहान ने अतिथियों का स्वागत किया.
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र सेवा ट्रस्ट के महासचिव पी. गोविन्द देव गुरूजी ने कहा कि स्वच्छता ईश्वरत्व के समान है. उन्होंने आहार की शुद्धता के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि जब मंदिर से प्रसाद के रूप में भोजन प्राप्त होता है, तो उसकी शुद्धता और महत्व और बढ़ जाता है. इसलिए प्रसाद का निर्माण और वितरण पूरी शुद्धता के साथ होना चाहिए.
उन्होंने कहा कि किसी योग्य संस्था की ओर से गुणवत्ता को प्रमाणित किया जाना गौरव की बात है. FSSAI का यह प्रमाणपत्र मंदिर में खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता के लिए किए जा रहे प्रयासों को मान्यता देता है.
कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में FSSAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजित पुन्हानी, कार्यकारी निदेशक उमाशंकर ध्यानी, कार्यकारी निदेशक डॉ. अमित शर्मा, क्षेत्रीय निदेशक देवेश कुमार महला और प्रबंधक अनन्या पाण्डेय सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र सेवा ट्रस्ट की ओर से पी. गोविन्द देव गुरूजी, कृष्ण मोहनजी, दिनेन्द्र दास जी निर्मोही, मदन मोहनजी पाण्डेय और सचिव जगदीश अफाले सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे.
कुल मिलाकर, श्री राम मंदिर को मिला यह प्रमाणपत्र प्रसाद की गुणवत्ता, स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा के प्रति अपनाए जा रहे मानकों की महत्वपूर्ण उपलब्धि है. अब दो साल की प्रमाणपत्र अवधि के दौरान नियमित ऑडिट और पखवाड़ेवार आंतरिक समीक्षा के जरिए इन मानकों को बनाए रखने पर जोर रहेगा.



