
कुशीनगर, अमृत विचार। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में सोमवार देर रात नारायणी नदी ने मुश्किलें बढ़ा दीं। तमकुहीराज तहसील के ततवा टोला के चैन पट्टी और जवहीं माली एहतमाली के पास एपी तटबंध अचानक टूट गया, जिसके बाद पानी तेजी से गांवों की ओर बढ़ने लगा। तटबंध टूटने की खबर मिलते ही प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। आननफानन में अधिकारी मौके पर पहुंचे।
राहत की बात यह रही कि अभी तक किसी जनहानि की सूचना नहीं है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र के लोगों को एहतियात के तौर पर सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए हैं। तटबंध टूटने से करीब 20 से 25 गांवों पर बाढ़ का खतरा बताया जा रहा है।
जलस्तर घटा तो तेज हुआ कटाव
स्थानीय लोगों के मुताबिक सोमवार रात करीब 12 बजे नारायणी नदी का जलस्तर घटकर लगभग 2.54 लाख क्यूसेक पहुंच गया था। जलस्तर कम होने के बाद नदी में कटान तेज हो गया। तटबंध में बने रैट होल और लगातार हो रहे सीपेज को भी इसके टूटने की वजह बताया जा रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार तटबंध में करीब तीन दिन से रिसाव हो रहा था। सोमवार देर रात अचानक इसका बड़ा हिस्सा टूट गया। बताया जा रहा है कि करीब 70 से 100 मीटर तटबंध क्षतिग्रस्त हुआ है।
तटबंध टूटने के बाद प्रभावित इलाकों में प्रशासन की टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को भी मौके पर पहुंचकर व्यापक स्तर पर बचाव अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
सीएम योगी ने देर रात लिया घटना का संज्ञान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देर रात ही घटना की जानकारी ली। उन्होंने गोरखपुर मंडलायुक्त, एडीजी और कुशीनगर के जिलाधिकारी से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रभावित ग्रामीणों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और राहतबचाव अभियान में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए। इसके बाद प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें मौके पर सक्रिय हो गईं।
मुख्यमंत्री देर रात तक स्थिति की जानकारी लेते रहे और अधिकारियों को प्रभावित लोगों तक तत्काल राहत पहुंचाने के निर्देश दिए।
ग्रामीणों का दावा तीन दिन से हो रहा था रिसाव
स्थानीय निवासी संजीव यादव ने बताया कि रात करीब 10 से 10:30 बजे के बीच तटबंध टूट गया। उनका आरोप है कि तटबंध में तीन दिन से धीरेधीरे कटाव हो रहा था और करीब दो किलोमीटर क्षेत्र में सीपेज था।
संजीव यादव ने प्रशासन पर पहले से पर्याप्त इंतजाम नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि तटबंध टूटने के बाद बाढ़ प्रभावित लोग तटबंध या रिश्तेदारों के घरों में रह रहे हैं और उनके मुताबिक प्रभावित लोगों के लिए खानेपीने की व्यवस्था भी तत्काल उपलब्ध नहीं थी।
एक अन्य स्थानीय निवासी के अनुसार करीब 100 मीटर तटबंध कटने से 20 से 25 गांव प्रभावित हुए हैं। उनके मुताबिक प्रशासनिक अधिकारी और विधायक भी हालात का जायजा लेने पहुंचे।
ग्रामीण सुरक्षित, सामान के नुकसान की बात
रितेश सिंह के मुताबिक करीब 70 से 100 मीटर तटबंध टूटने से कई गांव प्रभावित हुए हैं। उन्होंने बताया कि बाढ़ प्रभावित ग्रामीण सुरक्षित हैं, लेकिन उनके सामान को नुकसान पहुंचा है। उनके अनुसार तटबंध में तीन दिन से लीकेज हो रहा था और सोमवार देर रात अचानक वह टूट गया।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालना और बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव अभियान तेज करना है।
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