
बरेली,अमृत विचार: शुगर एवं धान बैल्ट से फिर कुदरत रूठी है। 48 घंटे से लगातार हो रही बारिश ने बरेली के अंदर खेतों में खड़ी धान, सब्जी, दलहनी फसलों को डुबो दिया है। भारी बारिश और तेज हवाओं की वजह से कैश क्रॉप गन्ना भी खेतों में गिरने की खबरें आ रही हैं। फसलों की हालत देख किसान तड़प रहे हैं और बाजार के जानकार टेंशन में आ रहे हैं। कृषि वैज्ञानिकों ने पानी डूबने से फसलें सड़ने और फंगस लगने की आशंका जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि आसमान से बरसी आफत आगे दाल, चावल, चीनी के उत्पादन पर बड़ा असर डाल सकती है और इसके साइड इफेक्ट महंगाई के रूप में सामने आ सकते हैं।
शुक्रवार सुबह से शुरू हुई बारिश का दौर शनिवार पूरी रात भी नहीं थमा। बरेली देहात से फसलों को भारी नुकसान की सूचना है। खेतों में खड़ी धान, गन्ना, सब्जी की फसलों को खासा नुकसान पहुंचाया है। नवाबगंज, बहेड़ी, फरीदपुर, आंवाल, मीरगंज तहसील क्षेत्र के किसानों से जानकारी मिली है कि अभी धान की बालियां पूरी तरह तैयार थीं। तेज हवाओं के साथ बालियों से लदा धान खेतों में बिछ गया। कटाई के मुहाने पर ऐसा होना अन्नदाताओं को खून के आंसू रुलाने जैसा है। ऐसी ही बर्बादी स्थिति तिल के खेतों में भी हुई है। गन्ने जैसी फसल भी खेतों में गिर गया है या झुक गई है। खेतों में जलभराव से उड़द, मूंग, तिल समेत अन्य दलहनी और तिलहनी फसलों पर भी संकट गहरा गया है। सब्जियों में सड़न और फंगस का खतरा बढ़ने से किसानों की चिंता और बढ़ गई है। सरकारी आंकड़ों में बरेली जिले के अंदर साढ़े 5 लाख के करीब किसान हैं, जिनमें सबसे धान उत्पादन से जुड़े हैं। धान के लिए जनपद में 1,58,592 हेक्टेयर का लक्ष्य था, जबकि 1,58,627.44 हेक्टेयर में फसल बोई गई इै।
मुसीबत में फिर सरकार की ओर देख रहे अन्नदाता
शासनप्रशासन भारी बारिश से प्रभावित किसानों को जल्द मुआवजे के प्रयास में जुटा है, मगर अतीत के कड़वे सबक किसानों को और ज्यादा चिंता में डाल रहे हैं। किसानों की पीड़ा पूर्व में होते रहे आपदा से नुकसान के सरकारी सर्वे हैं, जिसमें नुकसान की भरपाई के नाम पर ऊंट के मुंह में जीरा जैसी कहानी दोहराती रही है। इसे लेकर बीमा एजेंसी पर कई तरह के आरोप भी लगते रहे हैं। कुछ ही समय के अंदर यह दूसरा मौका है, जब भारी बारिश ने जिले में किसानों को संकट में डाला है। पिछले दिनों भी भारी बारिश का असर फसलों पर पड़ा था। इस बार तो जैसे कुदरत किसानों की कमर ही तोड़ने पर आमादा है।
खेतों से पानी कैसे निकालें, मुश्किल में किसान
एक तो दो दिन से बारिस का दौर जारी है और दूसरा फसलें खेतों में गिर चुकी हैं। कृषि विभाग के अधिकारी फसलों को अधिक नुकसान से बचाने के लिए जल्दी खेतों से पानी निकालने की अपील कर रहे हैं। किसानों की चिंता ये है कि आखिर चारों तरफ जल प्लावन जैसे हालात के बीच खेतों से पानी कैसे निकाला जाए। कई इलाकों में हालात ऐसे बन गए हैं कि किसान खेतों को देखने तक नहीं पहुंच पा रहे। किसानों के सामने अब पानी में डूबी फसल की कटाई और उपज बचाने की चुनौती है। लगातार बारिश जारी रहने से उत्पादन और क्वालिटी दोनों प्रभावित होना तय हैं। आसाधारण बारिश का असर धान और गन्ने तक सीमित नहीं है। खेतों में पानी भरने से उड़द, मूंग, अरहर और तिल समेत अन्य फसलों में सड़न और फंगस का खतरा बढ़ गया है। सब्जियों में भी अत्यधिक नमी के कारण बहुत ज्यादा नुकसान की स्थिति पैदा हो गई है। मूली, शलजम, पालक फूलगोभी, केला, मिर्च, अरहर और सब्जियों की फसलें प्रभावित नजर आ रही हैं।
फसलों का रकबा एक नजर में
फसल रकबा
धान 1.58 लाख हेक्टेयर
गन्ना 1.25 लाख हेक्टेयर
उड़द 15 हजार हेक्टेयर
बाजरा 7.5 हजार हेक्टेयर
तिल 6.3 हजार हेक्टेयर
ज्वार 4.1 हजार हेक्टेयर
मूंग 1.3 हजार हेक्टेयर
मक्का 946 हेक्टेयर
अरहर 360 हेक्टेयर
किसानों को आगे होगी और भी ज्यादा मुश्किल: साहनी
कुदरत का कोप झेल रहे अन्नदाता किसानों को आगे और भी ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। फसलें पानी में डूबने से उत्पादन के साथ क्वालिटी भी प्रभावित होगी। बारिश थमने के बाद जब धूप निकलेगी तो फसलें सड़ने का खतरा रहेगा। आपदा प्रभाव की वजजह से गन्ने की मिठास कम हो जाएगी। चीनी मिलें अब और भी लेट चलने की आशंका है, क्योंकि मिलें 10 फीसदी की रिकवरी देखती हैं, जबकि आपदा की वजह ये यह स्थिति अभी 5 प्रतिशत के आसपास रहने वाली है। धानगन्ने के अलावा सब्जियां, तिल को भारी नुकसान के हालात लग रहे हैं। कृषि वैज्ञानिकों को अभी की आपदा का असर आगे गेहूंसरसों पर किस तरह पड़ सकता है।
अभी हुई बारिश से दलहन में उड़द और मूंग की दाल,तिलहन में तिल को भारी नुकसान हुआ है। निचले इलाको में धान की फसल को भी क्षति पहुंची है। हालात देखते हुए फसल बीमा कंपनी को सूचित कर दिया है। जो भी किसान फसल के नुकसान का दावा कर रहे हैं, सोमवार तक की इसकी रिपोर्ट विभाग को मिल जाएगी। विभाग हर संभव किसानों की मदद करने में जुटा है।
बारिश के कारण गन्ने की फसल गिरने से उसकी मिठास प्रभावित हो सकती है। सभी चीनी मिलों से कहा गया है कि सुपरवाइजर मौके पर जाकर फसल का आंकलन करेंगे। इसके बाद श्रमिकों को बुलाकर गिरी हुई फसल को उठाने का काम कराया जाएगा। सोसायटी हर समय किसानों के साथ है। किसानों की हर संभव मददराहत दिलाई जाएगी। चीनी मिलें निर्धारित समय पर संचालित होंगी और सरकार के निर्देश के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
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