
नई दिल्ली। भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को यौन उत्पीड़न मामले में 3 अगस्त को बरी किए जाने के राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले को चार महिला पहलवानों ने चुनौती दी है। महिला पहलवानों ने सेशन कोर्ट में अपील दाखिल कर बृजभूषण शरण सिंह के साथ सहआरोपी विनोद तोमर को बरी किए जाने के आदेश को भी चुनौती दी है। मामले की सुनवाई 26 सितंबर को होने की संभावना है।
अपील में कहा गया है कि मजिस्ट्रेट कोर्ट का आदेश कानून की नजर में टिकाऊ नहीं है और इसमें रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों का गलत और चयनात्मक तरीके से आकलन किया गया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि फैसला अनुमान और अटकलों पर आधारित है तथा स्थापित कानूनी सिद्धांतों को सही तरीके से लागू नहीं किया गया।
पीड़िताओं के व्यवहार को लेकर टिप्पणी पर भी आपत्ति
महिला पहलवानों की ओर से दाखिल अपील में यह भी कहा गया है कि फैसले के कुछ हिस्सों में यौन उत्पीड़न और हमले की पीड़िताओं के ‘अपेक्षित व्यवहार’ को लेकर पुरानी और रूढ़िवादी धारणाओं को आधार बनाया गया। अपीलकर्ताओं का कहना है कि सबूतों का आकलन पीड़िताओं की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए था।
3 अगस्त को बरी हुए थे बृजभूषण और विनोद तोमर
राउज एवेन्यू कोर्ट की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने 3 अगस्त 2026 को बृजभूषण शरण सिंह और पूर्व WFI सहायक सचिव विनोद तोमर को मामले में बरी कर दिया था। यह मामला छह महिला पहलवानों की शिकायतों से जुड़ा था। फैसले के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने आरोपों से इनकार दोहराते हुए इसे अपने लिए राहत बताया था। वह मामले में शुरू से ही महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए आरोपों को गलत बताते रहे हैं।
2023 में शुरू हुआ था विवाद
महिला पहलवानों के आरोपों के बाद यह मामला 2023 में देशव्यापी चर्चा में आया था। दिल्ली पुलिस ने जून 2023 में बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। मई 2024 में अदालत ने मामले में आरोप तय किए थे। इसके बाद मुकदमे की कार्यवाही आगे बढ़ी और 3 अगस्त 2026 को निचली अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को बरी कर दिया। अब महिला पहलवानों की अपील पर सेशन कोर्ट में होने वाली सुनवाई से यह मामला एक बार फिर न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंच गया है।



