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​NPS Investment: 25 की उम्र में शुरू करें ₹10,000 का निवेश, रिटायरमेंट तक हाथ में होंगे ₹3.4 करोड़, समझें पूरा गणित

NPS Investment: रिटायरमेंट की प्लानिंग करते वक्त अक्सर लोग सोचते हैं कि अभी तो बहुत समय पड़ा है. लेकिन निवेश की दुनिया में समय ही सबसे बड़ा पैसा है. अगर कोई इंसान 25 साल की उम्र में नेशनल पेंशन सिस्टम में हर महीने 10,000 रुपये लगाना शुरू कर दे, तो रिटायरमेंट तक उसके पास 3.4 करोड़ रुपये का फंड जमा हो सकता है. डीएसपी फंड के सीईओ राहुल भगत ने सीएनबीसीटीवी18 से बातचीत में रिटायरमेंट प्लानिंग के कुछ बेहद जरूरी नियम बताए हैं. उनके मुताबिक, सही समय पर लिया गया एक छोटा सा फैसला आपके बुढ़ापे को आर्थिक रूप से पूरी तरह सुरक्षित कर सकता है.

​NPS Investment: 25 की उम्र में शुरू करें ₹10,000 का निवेश, रिटायरमेंट तक हाथ में होंगे ₹3.4 करोड़, समझें पूरा गणित

10 साल पहले शुरुआत करने का बड़ा फायदा

राहुल भगत का कहना है कि निवेश की शुरुआत जितनी जल्दी होगी, फायदा उतना ही बड़ा मिलेगा. मान लीजिए कि आप हर महीने 10,000 रुपये निवेश करते हैं. अगर आप ये निवेश 25 साल तक जारी रखते हैं और इस पर सालाना 10 फीसदी का अनुमानित रिटर्न मिलता है, तो आपके पास करीब 1.2 करोड़ रुपये जमा हो जाएंगे.

लेकिन अगर आप यही काम 10 साल पहले शुरू कर देते हैं, यानी निवेश की अवधि 25 साल की जगह 35 साल हो जाती है, तो पूरा गणित बदल जाता है. 10 साल अतिरिक्त निवेश करने पर आपकी जेब से कुल 12 लाख रुपये ही ज्यादा जाएंगे. लेकिन 35 साल के अंत में आपका कुल फंड तीन गुना बढ़कर करीब 3.4 करोड़ रुपये हो जाएगा.

कंपाउंडिंग से बनता है रिटर्न पर रिटर्न

सिर्फ 10 साल के अंतर से फंड के तीन गुना होने के पीछे कंपाउंडिंग की ताकत काम करती है. जब आप लंबे समय के लिए पैसा लगाते हैं, तो आपके मूलधन पर मिलने वाला रिटर्न भी आगे चलकर नया रिटर्न कमाने लगता है. हालांकि राहुल भगत ने ये भी साफ किया कि ये कैलकुलेशन सिर्फ चीजों को आसान भाषा में समझने के लिए है. बाजार से जुड़े किसी भी प्रोडक्ट में रिटर्न की पक्की गारंटी नहीं होती है. असली रिटर्न पूरी तरह से मार्केट के प्रदर्शन पर निर्भर करता है.

कमाई बढ़ने के साथ निवेश बढ़ाना जरूरी

एक बड़ा रिटायरमेंट फंड बनाने के लिए सिर्फ जल्दी शुरुआत करना ही काफी नहीं है. इसके लिए सही एसेट एलोकेशन के साथसाथ अपनी बढ़ती कमाई के हिसाब से निवेश की रकम को बढ़ाना भी बहुत जरूरी है. राहुल भगत बताते हैं कि अगर कोई निवेशक हर साल अपने मंथली निवेश में सिर्फ 5 फीसदी की बढ़ोतरी करता है, तो लंबी अवधि में उसके रिटायरमेंट फंड पर इसका बहुत बड़ा असर देखने को मिलता है.

युवा निवेशकों के लिए इक्विटी क्यों है बेहतर

आम तौर पर देखा गया है कि 20 से 30 साल की उम्र के लोग इक्विटी यानी शेयर बाजार में ज्यादा पैसा लगाते हैं. इसके पीछे एक ठोस वजह है. कम उम्र के निवेशकों के पास मार्केट में बने रहने के लिए काफी लंबा वक्त होता है. जब आप लंबे समय के लिए निवेश करते हैं, तो शेयर बाजार के उतारचढ़ाव का आपके फंड पर बहुत कम असर पड़ता है. अगर बीच में कभी बाजार गिरता भी है, तो समय रहते उसमें दोबारा रिकवरी हो जाती है.

निवेश की लागत से घट सकता है 33 लाख का फंड

रिटायरमेंट प्लानिंग में लोग अक्सर इनवेस्टमेंट कॉस्ट यानी निवेश पर लगने वाले चार्ज को नजरअंदाज कर देते हैं. जबकि फाइनल फंड पर इसका सीधा असर पड़ता है. इसे एक आसान उदाहरण से समझा जा सकता है. मान लीजिए कोई व्यक्ति 30 साल तक हर महीने 10,000 रुपये निवेश करता है. इस पर उसे सालाना 10 फीसदी का ग्रॉस रिटर्न मिलता है.

अगर इस निवेश पर सालाना चार्ज सिर्फ 0.1 फीसदी है, तो 30 साल बाद उसके पास करीब 2 करोड़ रुपये का फंड तैयार होगा. वहीं अगर ये सालाना चार्ज बढ़कर 1 फीसदी हो जाए, तो फाइनल फंड घटकर करीब 1.7 करोड़ रुपये ही रह जाएगा. यानी सालाना चार्ज के इस मामूली से दिखने वाले अंतर की वजह से निवेशक को सीधे तौर पर करीब 33 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है. इसलिए निवेश करते समय फंड के खर्चों पर ध्यान देना भी बेहद जरूरी है.

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