
डिजिटल डेस्क, अमृत विचार। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। शुभ कार्य, पूजापाठ, यात्रा, निवेश या किसी नए काम की शुरुआत से पहले पंचांग के माध्यम से तिथि, नक्षत्र, योग और शुभअशुभ समय का विचार किया जाता है। पंचांग सूर्य, चंद्रमा और ग्रहनक्षत्रों की स्थिति के आधार पर तैयार होने वाली हिंदू कालगणना पद्धति है।
6 सितंबर 2026, रविवार को भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि शाम 7:29 बजे तक रहेगी। इसके बाद एकादशी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रविवार शाम भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करना शुभ माना जाता है।
6 सितंबर को सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय का समय
6 सितंबर को सूर्योदय सुबह 6:14 बजे और सूर्यास्त शाम 6:36 बजे होगा। चंद्रोदय रात 12:48 बजे तथा चंद्रास्त दोपहर 3:05 बजे होगा। पंचांग के अनुसार सूर्य पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। वहीं चंद्रमा रात 7:52 बजे तक आर्द्रा नक्षत्र में रहने के बाद पुनर्वसु नक्षत्र में प्रवेश करेगा।
6 सितंबर का शुभ मुहूर्त
रविवार को व्यतीपात योग रहेगा। दिन का अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:49 बजे तक रहेगा। इसे दिन के प्रमुख शुभ समय में माना जाता है। वहीं अमृत काल सुबह 10:32 बजे से दोपहर 12:02 बजे तक रहेगा। शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए इस अवधि को भी अनुकूल माना जाता है।
जानें राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड
6 सितंबर को राहुकाल शाम 5:03 बजे से 6:36 बजे तक रहेगा। इसके अलावा गुलिक काल दोपहर 3:30 बजे से शाम 5:03 बजे तक और यमगंड काल दोपहर 12:25 बजे से 1:58 बजे तक रहेगा। पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड के दौरान नए और महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है।
सूर्यचंद्रमा की स्थिति और दिशाशूल
रविवार को सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा मिथुन राशि में रहेगा। इस दिन पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार दिशाशूल वाली दिशा में यात्रा करने से बचना शुभ माना जाता है। यदि किसी कारणवश पश्चिम दिशा की यात्रा जरूरी हो तो परंपरागत ज्योतिषीय उपायों के बाद यात्रा शुरू करने की मान्यता है।
रविवार को विष्णुलक्ष्मी पूजा का महत्व
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार रविवार को व्यतीपात योग और पश्चिम दिशा में दिशाशूल होने के कारण महत्वपूर्ण कार्यों और यात्रा के लिए समय का विशेष ध्यान रखना चाहिए। अभिजित मुहूर्त और अमृत काल में शुभ कार्य शुरू करना अपेक्षाकृत बेहतर माना जाता है। वहीं राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड के दौरान नए कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। रविवार शाम भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से सुखसमृद्धि और मानसिक शांति की कामना की जा सकती है।



