
कानपुर, उत्तर प्रदेश: कानपुर के सेन पश्चिम पारा स्थित प्रधानमंत्री आवास योजना के फ्लैट से यूपी एटीएस द्वारा गिरफ्तार किए गए 24 वर्षीय अंकित शंखवार को लेकर जांच में कई अहम जानकारियां सामने आ रही हैं। पुलिस और जांच एजेंसियों के मुताबिक, साधारण जीवन जीने वाला अंकित कथित तौर पर आतंकी गतिविधियों से जुड़े स्लीपर मॉड्यूल के संपर्क में था। उसके पिता को भी उसकी ऑनलाइन कमाई और गतिविधियों की जानकारी नहीं थी।
अंकित के पिता प्रहलाद रिक्शा चलाते हैं। उनका कहना है कि बेटे ने करीब छह महीने पहले गोविंदनगर से किस्तों पर एक पुराना लैपटॉप खरीदा था। वह अक्सर रात में देर तक लैपटॉप चलाता रहता था। परिवार को अंदाजा नहीं था कि उसकी कमाई डॉलर और क्रिप्टोकरेंसी के रूप में हो रही है। जांच एजेंसियों को उसके एक खाते में 6,000 क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ी जानकारी मिलने की बात भी सामने आई है।
मजदूरी करके सामान्य जीवन दिखाने का आरोप
सूत्रों के मुताबिक, अंकित सुबह उठने के बाद लंबे समय तक मोबाइल पर व्यस्त रहता था। वह स्थानीय संपर्कों से बातचीत करता था और किसी को शक न हो, इसलिए बीच-बीच में मजदूरी भी करने चला जाता था। पड़ोसियों का कहना है कि वह शांत स्वभाव का था और मोहल्ले में ज्यादा लोगों से मेलजोल नहीं रखता था।
फर्जी ईमेल और धमकी भरे संदेशों की जांच
जांच में 12 अक्टूबर को नोएडा के स्कूलों और अन्य स्थानों को भेजे गए धमकी भरे ईमेल तथा 23 अक्टूबर को मुंबई के महापौर कार्यालय को बम धमाके की धमकी देने के मामले की भी कड़ियां खंगाली जा रही हैं। एजेंसियों के अनुसार, इन ईमेल खातों से जुड़ी जानकारियां व्हाट्सएप के माध्यम से अलामीन तक पहुंचाई गई थीं। अब यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि अंकित को ईमेल आईडी बनाने का प्रशिक्षण किसने दिया और उसके संपर्क किन लोगों से थे।
‘खरीदो और बेचो’ ग्रुप से साइबर ठगी के तार
यूपी एटीएस के सूत्रों के मुताबिक, अंकित मोबाइल और लैपटॉप पर ‘खरीदो और बेचो’ नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप भी चलाता था। आरोप है कि इस ग्रुप के जरिए वह देश-विदेश के लोगों से संपर्क करता था और फर्जी ईमेल आईडी तथा पासवर्ड उपलब्ध कराता था। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस नेटवर्क में कथित तौर पर आतंकी गतिविधियों से जुड़े लोगों के साथ साइबर ठगी करने वाले गिरोह भी शामिल हो सकते हैं।
पुलिस अब एटीएस से ग्रुप का पूरा डाटा हासिल करने की तैयारी में है। इसके जरिए दुबई और थाईलैंड में बैठकर साइबर ठगी करने वाले लोगों के संभावित संपर्कों की भी जांच की जाएगी।
कई सवालों के जवाब तलाश रही एजेंसियां
जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि अंकित ने लैपटॉप किस दुकान से खरीदा था, उसके बैंक खाते किन शहरों में हैं और बर्रा तथा देहली सुजानपुर में उसके संपर्क कौन-कौन थे। इसके अलावा पाकिस्तान और बांग्लादेश से कथित संपर्क कराने वाले लोगों, ईमेल आईडी बनाने में मदद करने वालों और 2021 से चल रही उसकी गतिविधियों की भी पड़ताल की जा रही है।
कानपुर पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के मुताबिक, एटीएस अधिकारियों से संपर्क किया गया है और अंकित के अन्य संभावित स्थानीय संपर्कों की जानकारी जुटाने के लिए संबंधित थानों को जांच के निर्देश दिए गए हैं।
सत्या रिपोर्ट की ओर से: इस मामले में जांच अभी जारी है। आतंकी नेटवर्क और साइबर ठगी से जुड़े आरोपों की पुष्टि जांच एजेंसियों की पड़ताल और आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही होगी।



