
प्रयागराज, अमृत विचार। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में टीजीटीपीजीटी अभ्यर्थियों का आंदोलन रविवार को उस समय और गंभीर हो गया, जब आंदोलन में शामिल एक अभ्यर्थी विजय की ब्रेन स्ट्रोक से मौत की जानकारी सामने आई। इसके बाद सिविल लाइंस स्थित धरना स्थल पर पिछले 16 दिन से आमरण अनशन कर रहे अभ्यर्थियों ने रविवार देर शाम कफन ओढ़कर प्रदर्शन किया। अभ्यर्थियों का कहना है कि लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया में बदलाव और अपनी मांगों के समाधान का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
साथी की मौत के बाद कफन ओढ़कर प्रदर्शन
आंदोलनकारी अभ्यर्थी आकाश पांडेय ने बताया कि विजय टीजीटीपीजीटी और टीईटी की तैयारी कर रहे थे। उनके मुताबिक, नई नियमावली के तहत परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में प्रस्तावित बदलाव को लेकर विजय समेत कई अभ्यर्थी परेशान थे। अभ्यर्थियों का कहना है कि लगातार भर्ती का इंतजार और भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच विजय की तबीयत बिगड़ी और ब्रेन स्ट्रोक से उनकी मौत हो गई।
नई नियमावली में इन प्रावधानों पर आपत्ति
अभ्यर्थियों के मुताबिक, वे कई वर्षों से शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे हैं। उनका दावा है कि नई नियमावली में स्नातक में 50 प्रतिशत अंक, टीईटी और निगेटिव मार्किंग समेत कई नए प्रावधान किए गए हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि इन प्रावधानों से बड़ी संख्या में पुराने अभ्यर्थियों के भर्ती प्रक्रिया से बाहर होने की स्थिति बन सकती है।
10 से 15 साल से भर्ती की तैयारी का दावा
आंदोलन में शामिल जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि कई अभ्यर्थी 10 से 15 साल से शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे हैं। उनका आरोप है कि अंतिम समय में नियमों में बदलाव किए जाने से लंबे समय से तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने का रास्ता मुश्किल हो जाएगा। अभ्यर्थियों की मांग है कि नई नियमावली लागू करने से पहले पुराने अभ्यर्थियों को कम से कम एक अवसर दिया जाए।
शिक्षा निदेशालय और डीएम कार्यालय में रखी मांगें
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे शिक्षा निदेशालय और जिलाधिकारी कार्यालय समेत कई स्थानों पर अपनी मांगें रख चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ है। उनका कहना है कि आंदोलन में शामिल अधिकांश अभ्यर्थी गरीब और ग्रामीण परिवारों से आते हैं और महंगी कोचिंग या ट्यूशन का खर्च उठाने की स्थिति में नहीं हैं। ऐसे में स्नातक में 50 प्रतिशत अंक की अनिवार्यता से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के प्रभावित होने का दावा किया जा रहा है।
प्रतियोगी परीक्षा को चयन का आधार बनाने की मांग
अभ्यर्थियों का कहना है कि शिक्षक भर्ती में चयन का आधार प्रतियोगी परीक्षा होना चाहिए और अभ्यर्थियों के वर्तमान ज्ञान का परीक्षण किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि यदि नियमों में बदलाव किया जाना था तो इसकी जानकारी दोतीन वर्ष पहले दी जानी चाहिए थी, ताकि अभ्यर्थी अपनी तैयारी और योग्यता में आवश्यक बदलाव कर सकें।
मांगों पर पुनर्विचार की अपील
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से नई नियमावली पर पुनर्विचार करने और पुराने अभ्यर्थियों को शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने की मांग की है। उनका कहना है कि साथी विजय की मौत के बाद आंदोलन और गंभीर हो गया है। अभ्यर्थियों ने मांगें पूरी होने तक कफन ओढ़कर प्रदर्शन जारी रखने की बात कही है।



