भारतीय क्रिकेट में चयन समिति को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। पूर्व भारतीय स्पिनर रमेश पवार अजीत अगरकर की जगह सीनियर पुरुष चयन समिति में शामिल होने की दौड़ में सबसे आगे बताए जा रहे हैं। क्रिकेट सलाहकार समिति ने इस पद के लिए कई पूर्व क्रिकेटरों के इंटरव्यू लिए हैं। हालांकि, बीसीसीआई की ओर से अभी अंतिम नियुक्ति की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि चयन समिति में जगह किसे मिलती है और अगला मुख्य चयनकर्ता कौन बनेगा।

Ramesh Powar के नाम पर क्यों लगी निगाहें?
रमेश पवार भारतीय टीम के लिए दो टेस्ट और 31 एकदिवसीय मुकाबले खेल चुके हैं। वह घरेलू क्रिकेट में मुंबई का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और भारतीय महिला टीम के मुख्य कोच की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। उनके अनुभव को देखते हुए उन्हें चयन समिति में अहम भूमिका मिलने की चर्चा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पवार को शुरुआत में जूनियर चयन समिति की जिम्मेदारी के लिए भी दावेदार माना जा रहा था। लेकिन अब उनका नाम सीनियर पुरुष चयन समिति में अजीत अगरकर की जगह भरने के लिए प्रमुखता से सामने आया है। हालांकि, नियुक्ति को लेकर अंतिम फैसला बीसीसीआई को ही करना है।
इन पूर्व क्रिकेटरों ने भी दिया इंटरव्यू
इस पद के लिए केवल रमेश पवार ही दावेदार नहीं हैं। पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज वसीम जाफर , सलिल अंकोला , जैकब मार्टिन और कॉनर विलियम्स के नाम भी सामने आए हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, क्रिकेट सलाहकार समिति ने 15 अक्टूबर को उम्मीदवारों के इंटरव्यू लिए। चयन प्रक्रिया में उम्मीदवारों से भारतीय टीम के भविष्य और खिलाड़ियों के चयन से जुड़े सवाल भी पूछे गए। वसीम जाफर के पास 31 टेस्ट मैचों का अनुभव है, जबकि पवार ने भारत के लिए दो टेस्ट खेले हैं। ऐसे में चयन समिति की संरचना और नेतृत्व को लेकर फैसला अहम माना जा रहा है।
प्रज्ञान ओझा को लेकर भी बड़ा अपडेट
अजीत अगरकर का कार्यकाल 4 अक्टूबर को समाप्त हुआ था। इसके बाद प्रज्ञान ओझा फिलहाल अंतरिम रूप से चयन समिति की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। रिपोर्टों में संभावना जताई गई है कि उन्हें स्थायी रूप से मुख्य चयनकर्ता बनाया जा सकता है।
बीसीसीआई के नियमों के मुताबिक, चयन समिति में सबसे अधिक टेस्ट खेलने वाले सदस्य को अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिल सकती है। प्रज्ञान ओझा भारत के लिए 24 टेस्ट खेल चुके हैं, जबकि वसीम जाफर ने 31 टेस्ट खेले हैं। इसलिए नए सदस्य की नियुक्ति से समिति के नेतृत्व पर भी असर पड़ सकता है। फिलहाल रमेश पवार का नाम चर्चा में सबसे आगे है, लेकिन आधिकारिक घोषणा होने तक तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं होगी।



