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उदयनिधि स्टालिन का सीएम विजय पर बड़ा हमला, बोले- ‘दूसरों के काम पर अपना स्टिकर चिपकाना बंद करें’…

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तमिलनाडु की सियासत में एक बार फिर जोरदार भूचाल आ गया है। विधानसभा में विपक्ष के नेता और डीएमके (DMK) के दिग्गज नेता उदयनिधि स्टालिन ने सूबे के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय पर बेहद तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उदयनिधि ने सीधा आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री विजय ने दिल्ली में हुई नीति आयोग की हाई-प्रोफाइल बैठक का इस्तेमाल पिछली सरकार की बड़ी-बड़ी कामयाबियों पर ‘अपना स्टिकर चिपकाने’ के लिए किया है। उनके इस बयान के बाद राज्य का सियासी पारा अचानक सातवें आसमान पर पहुंच गया है।

‘सिर्फ एक महीने पुरानी सरकार और इतना बड़ा दावा?’

उदयनिधि स्टालिन ने मुख्यमंत्री विजय के दावों की धज्जियां उड़ाते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में तमिलनाडु ने जो मुकाम हासिल किया है, खासकर वर्कफोर्स में महिलाओं की 42 फीसदी भागीदारी सुनिश्चित करना और राज्य का देश की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना, यह सब मौजूदा टीवीके (TVK) सरकार की मेहनत का नतीजा बिल्कुल नहीं है। उदयनिधि ने साफ लफ्जों में कहा कि ये तमाम ऐतिहासिक उपलब्धियां पहले की सरकारों के लंबे कार्यकाल और उनकी नीतियों की वजह से मिली हैं, जबकि मौजूदा सरकार को तो अभी सत्ता में आए जुम्मा-जुम्मा चार दिन ही हुए हैं।

उन्होंने चुटकी लेते हुए सवाल उठाया कि क्या महज एक महीना पुरानी सरकार इतने बड़े आर्थिक और सामाजिक बदलावों का सेहरा अपने सिर बांध सकती है? उदयनिधि ने नसीहत देते हुए कहा कि सरकार को जमीन पर मौजूद हकीकत और तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखनी चाहिए, न कि पहले से ही चमक रहे विकास कार्यों का गलत तरीके से श्रेय लेने की कोशिश करनी चाहिए।

कल तक कहते थे ‘कर्ज का जाल’, आज गिना रहे हैं खूबियां!

इस पूरे विवाद के पीछे की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। आपको याद दिला दें कि विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान टीवीके के सर्वेसर्वा विजय ने जोर-शोर से दावा किया था कि तमिलनाडु ‘कर्ज के गहरे दलदल’ में डूबा हुआ है। उस वक्त उन्होंने राज्य की माली हालत को लेकर पिछली सरकार पर चौतरफा हमले किए थे और उनकी आर्थिक नीतियों की जमकर लानत-मलानत की थी।

लेकिन पासा तब पलट गया जब 11 जून को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक हुई। इस बैठक में शामिल हुए मुख्यमंत्री विजय ने तमिलनाडु की तरक्की और उसकी शानदार उपलब्धियों का लंबा-चौड़ा चिट्ठा देश के सामने रख दिया। बस, इसी प्रस्तुति के बाद से राज्य में सियासी महाभारत शुरू हो गई।

पलटू रवैये पर विपक्ष ने घेरा, बढ़ेगी सियासी तपिश

उदयनिधि स्टालिन ने मुख्यमंत्री के इस यू-टर्न पर निशाना साधते हुए कहा कि विजय का यह रवैया पूरी तरह विरोधाभासी है। वह एक तरफ तो चुनाव में वोट बटोरने के लिए पिछली सरकारों की कमियां निकालते हैं और दूसरी तरफ दिल्ली जाते ही उन्हीं सरकारों की शानदार उपलब्धियों को अपनी कामयाबी बताकर पीठ थपथपाने लगते हैं।

इस जोरदार जुबानी जंग के बाद तमिलनाडु की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर बेहद तेज हो गया है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि यह विवाद आने वाले दिनों में थामने वाला नहीं है, बल्कि नीतियों और राज्य के विकास को लेकर दोनों गुटों के बीच तलवारें और ज्यादा खिंच सकती हैं। फिलहाल तो नीति आयोग की बैठक के बहाने शुरू हुई यह क्रेडिट लेने की जंग सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक चर्चा का गर्म विषय बनी हुई है।

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