
Bathroom Mirror Vastu: वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का बाथरूम घर का एक ऐसा भाग होता है जहां पर सबसे ज्यादा नकारात्मक उर्जा का वास होता है. ये एक ऐसी जगह होती है जिसकी साफ-सफाई से लेकर अन्य लापरवाहियां बरती गईं तो तुरंत पूरे घर में नकारात्मक ऊर्जा फैल सकती है. ऐसे में जरूरी है कि बाथरूम को साफ रखा जाए और उससे जुड़े वास्तु नियमों का पालन किया जाए. जब बात बाथरूम से जुड़े वास्तु नियमों की आती है तो एक सवाल जरूर मन में आता है कि क्या घर के बाथरूम में आईना यानी शीशा लगाएं या नहीं.
आजकल के घरों में जो बाथरूम बनाए जा रहे हैं उसमें विशेष रूप से शीशा या आईना लगवाया जा रहा है. मन में सवाल उठता है कि वास्तु अनुसार ऐसा करवाना शुभ या अशुभ है? आइए इस बारे में जानें और इससे जुड़े एक-एक वास्तु नियमों के बारे में भी जानें.
बाथरूम में शीशा लगवाना सही या गलत
वास्तु अनुसार, बाथरूम में शीशा लगवाना सही माना गया है. हालांकि अगर आप बाथरूम में शीशा लगवा रहे हैं तो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि इसे हमेशा साफ रखते हों और इसकी दिशा वास्तु के अनुसार सही हो. बाथरूम में शीशा लगाते समय किन वास्तु नियमों पर ध्यान देना सबसे ज्यादा जरूरी है, आइए इसे भी जान लें.
बाथरूम में शीशा लगवाने की सही दिशा
वास्तु शास्त्र अनुसार बाथरूम में शीशे को हमेशा सही दिशा में ही लगाएं. बथरूम में कभी भी उत्तर या पूर्व दिशा में शीशा कभी न लगाएं. ध्यान रहे कि शीशे के कभी भी बाथरूम के प्रवेश द्वार के पास न लगाएं. ऐसे करने से पूरे घर में बाथरूम से नकारात्मक ऊर्जा फैल सकती है.
बाथरूम में किस तरह का शीशा लगाएं
बाथरूम में आयताकार या चौकोर शीशा लगवाना शुभ माना गया है. गोल या अंडाकार शीशा लगाने से बाथरूम में वास्तु दोष लग सकता है. आयताकार शीशा बाथरूम में सकारात्मकता बनाए रखता है.
इन बातों का रखें ध्यान
बाथरूम में लगा शीशा समय-समय पर साफ करते रहें. ध्यान रखें कि उस पर पानी के छीटें या किसी तरह का दाग न हो. गंदे शीशे में चेहरा देखकर दिन की शुरुआत करना अशुभ सिद्ध हो सकता है. इसके अलावा बाथरूम में टूटा शीशा कतई न लगाएं. इससे वास्तु दोष लगता है और बनता काम भी बिगड़ जाता है.
शीशे की ऊंचाई
बाथरूम में शीश लगवा रहे हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि शीशे की ऊंचाई ज्यादा न हो और न तो यह बहुत नीचे लगा हो. शीशा ऐसे लगवाएं कि उसमें आपका चेहरा पूरा दिखता हो. शीशे में आधा चेहरा दिखना अशुभ माना जाता है.
(डिस्क्लेमर- यह जानकारी पारंपरिक वास्तु एवं ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है. बताए गए उपायों के प्रभाव और परिणाम व्यक्ति विशेष की परिस्थितियों, आस्था, स्थान तथा अन्य कारकों के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं.)



