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आधुनिक सेक्स एजुकेशन की सबसे बड़ी समस्या क्या है? जानिए क्यों आज भी करोड़ों लोग सही जानकारी से हैं वंचित..

आधुनिक सेक्स एजुकेशन की सबसे बड़ी समस्या क्या है? जानिए क्यों आज भी करोड़ों लोग सही जानकारी से हैं वंचित..

हाल ही में Forbes में प्रकाशित एक रिपोर्ट की हेडलाइन थी—“अमेरिका के 90% वयस्कों का मानना है कि उन्हें स्कूल में मिली सेक्स एजुकेशन वास्तविक जीवन के लिए तैयार नहीं कर पाई।”

पहली नजर में यह आंकड़ा चौंकाने वाला लग सकता है, लेकिन हर साल आने वाले कई शोध बताते हैं कि यह समस्या वास्तविक है।

साल 2023 में अमेरिका में सेक्स एजुकेशन से जुड़े 79 नए विधेयक (Legislation) पेश किए गए। इनमें कुछ का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना था, लेकिन अधिकांश प्रस्ताव किशोरों की सही स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और आवश्यक चिकित्सा सेवाओं तक पहुंच को सीमित करने वाले थे।

आज भी अमेरिका के कई राज्यों में इस बात पर सहमति नहीं है कि स्कूलों को बच्चों और किशोरों की यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य शिक्षा में कितनी भूमिका निभानी चाहिए। इसका परिणाम यह है कि पूरी पीढ़ियां अपने शरीर, यौन स्वास्थ्य, सुरक्षित व्यवहार और व्यक्तिगत अधिकारों के बारे में अधूरी जानकारी के साथ बड़ी हो रही हैं।

हर राज्य का अलग पाठ्यक्रम

अमेरिका के 38 राज्यों और वॉशिंगटन डी.सी. में किसी न किसी रूप में सेक्स एजुकेशन या HIV शिक्षा अनिवार्य है, लेकिन केवल 18 राज्यों में यह जरूरी है कि पढ़ाई जाने वाली जानकारी वैज्ञानिक और चिकित्सकीय रूप से सही हो।

जहां सेक्स एजुकेशन पढ़ाई जाती है, वहां भी कई राज्यों में शिक्षकों को मुख्य रूप से संयम (Abstinence) अपनाने पर जोर देने के निर्देश दिए जाते हैं। कुछ राज्यों में शादी से पहले यौन संबंध न बनाने को विशेष महत्व दिया जाता है।

सिर्फ 10 राज्यों और वॉशिंगटन डी.सी. में यौन अभिविन्यास (Sexual Orientation) पर समावेशी जानकारी देना अनिवार्य है, जबकि कुछ राज्यों में समलैंगिकता के बारे में नकारात्मक जानकारी देने या केवल विषमलैंगिक संबंधों को बढ़ावा देने की व्यवस्था है।

कम-से-कम एक राज्य में जेंडर आइडेंटिटी, जेंडर एक्सप्रेशन और यौन अभिविन्यास पर पढ़ाना भी प्रतिबंधित है।

किशोरों तक जरूरी जानकारी नहीं पहुंच रही

एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2015–2019 के दौरान 15 से 19 वर्ष के किशोरों को गर्भनिरोधक (Birth Control) जैसी महत्वपूर्ण जानकारी पहले की तुलना में कम मिली।

सर्वे में शामिल केवल आधे से कुछ अधिक किशोरों ने बताया कि उन्हें ऐसी सेक्स एजुकेशन मिली जो अमेरिकी स्वास्थ्य विभाग द्वारा तय न्यूनतम मानकों पर खरी उतरती है।

इन मानकों में शामिल हैं—

  • यौन संबंध बनाने में जल्दबाजी से बचना
  • गर्भनिरोधक उपायों की जानकारी
  • HIV और अन्य यौन संचारित संक्रमणों (STIs) से बचाव

चिंताजनक बात यह है कि जिन किशोरों ने यौन संबंध बनाए थे, उनमें से आधे से भी कम को पहली बार संबंध बनाने से पहले इन विषयों की जानकारी दी गई थी।

अधूरी सेक्स एजुकेशन का असर वयस्क होने तक रहता है

हार्मोनल हेल्थ कंपनी Mira द्वारा 18 से 44 वर्ष के 1,500 से अधिक लोगों पर किए गए सर्वे में सामने आया कि—

  • लगभग आधे प्रतिभागियों ने कहा कि वे अपने पहले यौन अनुभव के लिए तैयार नहीं थे।
  • 41% लोगों ने माना कि उन्हें अपने पार्टनर से खुलकर बातचीत करना नहीं सिखाया गया।
  • 40% प्रतिभागियों ने बताया कि उन्हें सहमति (Consent) और सम्मानजनक रिश्तों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली।

जब लोगों को स्वस्थ रिश्तों और सहमति जैसी बुनियादी बातें नहीं सिखाई जातीं, तो इसके गंभीर सामाजिक और मानसिक परिणाम सामने आ सकते हैं।

दूसरे देशों की स्थिति भी अलग नहीं

कनाडा में 18 से 24 वर्ष के 1,090 युवाओं पर किए गए सर्वे में 63% प्रतिभागियों ने कहा कि स्कूलों में वैज्ञानिक जानकारी तो दी गई, लेकिन वास्तविक जीवन में काम आने वाले कौशल नहीं सिखाए गए।

उदाहरण के लिए, उन्हें यौन संचारित संक्रमणों (STIs) के बारे में तो बताया गया, लेकिन सुरक्षित यौन संबंध कैसे बनाए जाएं और संक्रमण का खतरा कैसे कम किया जाए, इसकी जानकारी नहीं दी गई।

हर तीन में से एक प्रतिभागी ने कहा कि स्कूल में मिली सेक्स एजुकेशन ने उन्हें सेक्स के प्रति डर पैदा कर दिया।

कई लोगों का मानना था कि शिक्षक स्वयं इस विषय पर सहज नहीं थे या उन्हें पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं मिला था, जिसके कारण पढ़ाई केवल संयम (Abstinence) तक सीमित रह गई।

स्पेन में भी किए गए एक अध्ययन में छात्रों ने माना कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण सेक्स एजुकेशन नहीं मिली और स्वयं शिक्षकों को भी इस विषय का पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं दिया जाता।

मौजूदा पाठ्यक्रम आज की जरूरतों से काफी पीछे है

2018 में किए गए एक सर्वे में पाया गया कि 20% वयस्कों ने अपने जीवन में कभी भी औपचारिक सेक्स एजुकेशन प्राप्त नहीं की।

तीन अलग-अलग पीढ़ियों के लोगों ने बताया कि उन्हें लगभग एक जैसी शिक्षा मिली, जिसमें मुख्य रूप से केवल ये विषय शामिल थे—

  • संयम (Abstinence)
  • गर्भावस्था
  • यौन संचारित संक्रमण (STIs)
  • गर्भनिरोधक

लेकिन आधुनिक समय की कई महत्वपूर्ण बातें आज भी पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं हैं।

92% लोगों ने बताया कि उन्हें कभी औपचारिक रूप से यह नहीं सिखाया गया—

  • स्वस्थ और सम्मानजनक यौन संबंध कैसे बनाए जाएं
  • स्थानीय यौन स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी
  • जेंडर आइडेंटिटी
  • यौन अभिविन्यास (Sexual Orientation)
  • समलैंगिक संबंधों की समझ
  • फोरप्ले (Foreplay)
  • अलग-अलग सांस्कृतिक पृष्ठभूमि वाले रिश्तों की समझ
  • सेक्स टॉयज़ और उनसे जुड़ी बुनियादी जानकारी

यानी आज की सेक्स एजुकेशन समाज की बदलती जरूरतों और आधुनिक वैज्ञानिक समझ के अनुरूप नहीं है।

सर्वे में 70% से अधिक वयस्कों ने माना कि उन्हें आज भी एक बेहतर सेक्स एजुकेशन क्लास की जरूरत महसूस होती है।

अब समय है नई सोच अपनाने का

सेक्स एजुकेशन का उद्देश्य केवल गर्भावस्था या संक्रमण से बचाव बताना नहीं होना चाहिए।

एक प्रभावी और आधुनिक पाठ्यक्रम में इन विषयों को भी शामिल किया जाना चाहिए—

  • अपने शरीर की सही समझ
  • सुरक्षित और जिम्मेदार निर्णय लेना
  • स्वस्थ और सम्मानजनक रिश्ते
  • सहमति (Consent) का महत्व
  • मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य
  • जेंडर और यौन विविधता का सम्मान
  • यौन हिंसा और शोषण की पहचान
  • विश्वसनीय स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच

निष्कर्ष

आज की दुनिया में वैज्ञानिक, समावेशी और व्यावहारिक सेक्स एजुकेशन पहले से कहीं अधिक जरूरी है।

सही जानकारी लोगों को केवल बीमारियों से बचाने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें अपने शरीर, रिश्तों और अधिकारों के प्रति जागरूक बनाने के लिए भी आवश्यक है।

जब युवाओं को सही उम्र में सही जानकारी मिलती है, तो वे अधिक सुरक्षित, जिम्मेदार और आत्मविश्वास से भरे निर्णय ले सकते हैं। यही किसी भी आधुनिक और स्वस्थ समाज की पहचान है।

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