
भारत की आजादी के बाद देश ने कई बड़े जन आंदोलनों का दौर देखा है। इनमें 2020-21 का किसान आंदोलन भी प्रमुख आंदोलनों में शामिल रहा। तीन कृषि कानूनों के विरोध में शुरू हुआ यह आंदोलन लंबे समय तक चला और इसका असर देश की राजनीति और सामाजिक माहौल पर भी दिखाई दिया।
कैसे शुरू हुआ था किसान आंदोलन?
केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसानों ने 2020 में आंदोलन शुरू किया था। बड़ी संख्या में किसान दिल्ली की सीमाओं के आसपास पहुंच गए और कई महीनों तक वहां डटे रहे। पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों से किसान इस आंदोलन में शामिल हुए।
आंदोलन के दौरान दिल्ली की सीमाओं पर बड़े स्तर पर किसानों की मौजूदगी रही। अलग-अलग समय पर बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते रहे, जिससे यह लंबे समय तक चलने वाला व्यापक विरोध प्रदर्शन बन गया।
25 करोड़ लोगों की भागीदारी का दावा कितना सही?
किसान आंदोलन के दौरान देशव्यापी बंद और हड़ताल में करीब 25 करोड़ लोगों की भागीदारी का दावा किया गया था। हालांकि, यह आंकड़ा पूरे आंदोलन में दिल्ली की सीमाओं पर मौजूद किसानों की संख्या नहीं था, बल्कि देशव्यापी हड़ताल में शामिल लोगों से जुड़ा दावा था।
इसलिए 25 करोड़ का आंकड़ा आंदोलन स्थल पर जुटी भीड़ के तौर पर समझना सही नहीं होगा। दिल्ली की सीमाओं पर अलग-अलग समय में किसानों की संख्या काफी अधिक रही, लेकिन वहां मौजूद लोगों की संख्या और देशव्यापी हड़ताल में शामिल लोगों की संख्या अलग-अलग आंकड़े हैं।
जेपी आंदोलन भी रहा बड़ा जन आंदोलन
किसान आंदोलन से पहले 1974 का जयप्रकाश नारायण का आंदोलन भी स्वतंत्र भारत के बड़े जन आंदोलनों में गिना जाता है। इसे ‘संपूर्ण क्रांति आंदोलन’ के नाम से जाना गया। छात्रों और आम लोगों की बड़ी भागीदारी वाले इस आंदोलन का राजनीतिक प्रभाव काफी व्यापक रहा।
इसके बाद 2011 में अन्ना हजारे के नेतृत्व में भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन ने भी देशभर में बड़ी संख्या में लोगों को सड़कों पर उतारा। दिल्ली के साथ-साथ कई अन्य शहरों में भी प्रदर्शन हुए और यह आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का बड़ा केंद्र बना।
भारत में बड़े जन आंदोलनों का लंबा इतिहास
स्वतंत्र भारत में अलग-अलग मुद्दों को लेकर समय-समय पर बड़े आंदोलन होते रहे हैं। इनमें किसान आंदोलन, जेपी आंदोलन और अन्ना आंदोलन जैसे आंदोलनों ने देश के सामाजिक और राजनीतिक माहौल पर व्यापक प्रभाव डाला। हालांकि, किसी एक आंदोलन को ‘सबसे बड़ा’ बताने के लिए यह स्पष्ट करना जरूरी है कि तुलना भीड़, अवधि, भौगोलिक विस्तार या एक दिन में भाग लेने वाले लोगों के आधार पर की जा रही है।



