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World Yoga Day 2026: हर कन्फ्यूजन को करें दूर! इंटरनेशनल योग गुरु से जानें कौन से योगासनों से करें शुरुआत

हमें योग दिवस मनाते हुए 1213 साल हो चुके हैं, लेकिन योग वैदिक काल से भारतीय संस्कृति का हिस्सा रहा है. अंतर्राष्ट्रीय योग गुरु डॉ मालविका बाजपेयी कहती हैं कि योग के आसन योग अभ्यास का तीसरा अंग है. योग में 8 अंग होते हैं. जिसमें यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि है. योग के तीसरे अंग योगासनों की प्रैक्टिस करने के बाद हमें प्राणायाम करना बेहद आवश्यक होता है. योग गुरु ने ये भी बताया है कि आपको शुरुआत में किस तरह से आसन करने चाहिए. अपने सांसों की लय को आप कैसे सही रख सकते हैं.

World Yoga Day 2026: हर कन्फ्यूजन को करें दूर! इंटरनेशनल योग गुरु से जानें कौन से योगासनों से करें शुरुआत

योग गुरु ने योग अभ्यास से जुड़ी कई कन्फ्यूजन को दूर किया है ताकि आप भी अगर योग को अपनी रूटीन में अपनाना चाहे तो किसी तरह की परेशानी न हो. तो चलिए जान लेते हैं कि बिगनर्स कैसे योगाभ्यास को शुरू कर सकते हैं और इसे आगे बढ़ा सकते हैं और रूटीन में शामिल कर सकते हैं.

योग के लिए बनाएं मन

योग गुरु डॉ मालविका बाजपेयी का कहना है कि हमें कई ऐसे लोग मिलते हैं जो रोजाना बहुत कठिन योगासनों का अभ्यास करते हैं और उन्हें देखकर हमारे मन में ये विचार आता है कि हम कैसे इन आसनों को कर सकते हैं.सबसे पहली चीज है कि अगर हम योग की बात करें तो हमें पहले ये तय करना होगा कि इसे दैनिक दिनचर्या यानी डेली रूटीन में करना ही है. उदाहरण के लिए मान लीजिए कि हमें सुबह सात बजे योगा प्रैक्टिस करनी है तो इसकी तैयारी रात से ही कर लेनी चाहिए. जैसे टाइम से खाना खाकर सोएं ताकि सुबह समय से उठ सकें.

उषापान से करें शुरुआत

योग गुरु कहती हैं कि जब दूसरे दिन सुबह उठें तो दिन की शुरुआत उषापान से करें. ये योगासन करने से पहले की जाने वाली एक प्रक्रिया है, जिसमें हम उकड़ू बैठकर या उत्कटासन में बैठकर धीरेधीरे पानी पीते हैं. ये पानी हमारे शरीर में मौजूद टॉक्सिन को रिमूव करने में मदद करता है.

हल्कीफुल्की क्रियाओं से शुरुआत

उषापान क्रिया के बाद हमें थोड़ी सी कुछ हल्कीफुल्की क्रियाएं करनी होती हैं जैसे ताड़ासन, त्रियक ताड़ासन, और कटी चक्रासन. इन क्रियाओं को 5 मिनट करने के बाद में शरीर को योग के लिए तैयार करते हैं. इसके लिए शरीर का इंटरनली क्लीन होना जरूरी है, जिसके लिए हमें अपनी दैनिक क्रिया करनी चाहिए.

Image: Pexels

सूक्ष्म योगासनों से करें शुरुआत

दैनिक क्रिया पूरी करने के बाद योग मैट के साथ अपने आसनों की प्रैक्टिस शुरू करें. योग गुरु का कहना है कि योगासन में सूक्ष्म योगासनों का बहुत महत्व है. धीरेधीरे योगासनों का अभ्यास शुरू करते हैं और इसके लिए पहले सूक्ष्म योगासन करने चाहिए. कई बार लोगों को लगता है कि ये सूक्ष्म योगासन क्या ही फायदा पहुंचाएंगे, लेकिन यकीन मानिए मैंने अपने 12 साल के योग करियर में ये समझा है कि सूक्ष्म व्यायाम उतने ही आवश्यक हैं जितना कि खाना और पानी. ऐसा समझिए कि अगर आप सूक्ष्म व्यायाम करते हैं तो ये हमारे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन सिस्टम को रीसेट करते हैं. और हमारे नर्वस सिस्टम को भी रीसेट करते हैं. एक्सपर्ट कहती हैं कि हमारा शरीर हर दिन के साथ पुराना होता जाता है और उम्र बढ़ने के लक्षण दिखाई देने लगते हैं, सूक्ष्म व्यायाम धीरेधीरे हमारी एजिंग को भी कम करने में मदद करते हैं या कहें कि ग्रेसफुल एजिंग में हेल्पफुल हैं.

ऐसे करें सूक्ष्म योगासन

सबसे पहले हाथ के पंजों का मूवमेंट करें. इसके बाद कलाइयों का मूवमेंट और फिर शोल्डर, गर्दन का मूवमेंट करें.अपर बॉडी का मूवमेंट करने के बाद में जो हमारी कमर से ऊपर का जो हिस्सा है उसकी मूवमेंट करेंगे, लेकिन अपनी कमर को 360 डिग्री नहीं घुमाना है. बिगनर्स बस इसे 180180 की फॉर्म में ही करें. अब घुटनों का मूवमेंट करें, इससे यहां की मसल्स मजबूत होंगी. फिर टखने का मूवमेंट करें, फिर पंजों का मूवमेंट करें. इस तरह से आपका सूक्ष्म योग पूरा हो जाएगा. इसी तरह से आंखों का अभ्यास भी बेहद जरूरी है. दरअसल जब आंखों का तापमान बढ़ता है तो नजर कमजोर होती है और जल्दी चश्मा लग जाता है. अगर हम रोजाना आंखों की एक्सरसाइज यानी आई मूवमेंट करते हैं तो हमारी विजन पावर बहुत अच्छी रहेगी.

सिंपल से योगासनों से करें प्रैक्टिस

सूक्ष्म योगासनों की प्रैक्टिस के बाद आपको मुख्य योगासनों का अभ्यास शुरू करना है. योग गुरु मालविका बाजपेयी कहती हैं कि आज के टाइम में स्पाइन की समस्या ज्यादा देखने को मिलती है. अपने शरीर को पूरी तरह न झुकाकर अपने हाथों को ऊपर रखकर 90 डिग्री तक झुकाते हैं तो हमारे शरीर में लचीलापन बढ़ेगा, टॉक्सिन इकट्ठा नहीं होंगे, ब्लड का सर्कुलेशन अच्छा होगा और बैक से रिलेटेड प्रॉब्लम हैं उनसे छुटकारा मिलेगा, साथ ही ग्लूटियस मैक्सिमस मसल मजबूत होगी. घुटने स्ट्रॉन्ग बनेंगे और स्टेबिलिटी भी आएगी.

इसके आगे की स्टेज में ताड़ासन जैसी क्रियाओं को करना है. ताड़ासन कॉन्सनट्रेशन को इनक्रीस करता है. इसी के साथ में आपको कुछ बैलेंसिंग पोज का प्रैक्टिस शुरुआत में करना चाहिए जैसे वृक्षासन करें, लेकिन ध्यान दें कि कहीं आपका पंजा स्टिफ तो नहीं है. अगर ऐसा हो तो आप सही से बैलेंस नहीं कर पाएंगे. अगर स्टिफनेस हो तो 56 दिन मसाज करें. इससे आप बैलेंस सही से करना शुरू कर देंगे. इसके बाद कुछ बैठने वाले अभ्यास करें जैसे मार्जरी आसन. ये एक ऐसा योगासन है जो हर कोई कर सकता है. बस ये ध्यान दें कि सर्वाइकल के दर्द की समस्या है तो गर्दन को ज्यादा अंदर की तरफ न झुकाएं.

सांसों की लय कैसे सही रखें?

डॉक्टर मालविका बाजपेयी कहती हैं कि योगासनों के साथ ही हमें सांसों पर भी ध्यान देना है. कई बार लोग शुरुआत में सांसों को कंट्रोल करना नहीं जानते हैं. इसको ऐसा समझिए कि जिन क्रियाओं में आप अपने हाथों को पूरी तरह से खोलते हैं, उनमें पूरी सांस भरनी है और हाथों को नीचे लाएंगे तो सांस को छोड़ना है. आगे की तरफ झुके तो सांस को छोड़ना है और शरीर को पीछे लेकर जाएंगे तो सांस को अंदर खींचेंगे. इस तरह से इन क्रियाओं को अगर आप करते हैं तो श्वास और प्रश्वास की लय सही बनी रहती है.

आराम से करें योगासन

शुरुआत में आसनों को बहुत ही फ्लो में और साथ ही बहुत आराम से करना है और सांसों को सही रखें. इसी तरह से धीरेधीरे अपने आसनों से वापस भी आना है. बस ध्यान रखें कि शरीर को जबरदस्ती बैंड करने की कोशिश न करें. एक्सपर्ट कहती हैं कि एक ट्विस्टिंग आसन करना हमारे लिए बहुत आवश्यक होता है, जिसमें वक्रासन का अभ्यास सरल होता है और ये हमारे शरीर को एडवांस आसनों के लिए भी तैयार करता है. इस तरह से आप योग की शुरुआत कर सकते हैं.

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