पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय बेइज्जती! इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान वार्ता की मेजबानी कर रही पाकिस्तानी सरकार सेरेना होटल का बिल तक नहीं चुका पाई। जानिए कैसे इस कंगाली ने खोली पाकिस्तान के कूटनीतिक दावों की पोल।
इस्लामाबाद में हुई अमेरिका-ईरान शांति वार्ता पाकिस्तान के लिए वैश्विक शर्मिंदगी बन गई है। पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने वार्ता की मेजबानी के लिए चुने गए फाइव स्टार सेरेना होटल का बिल चुकाने में पूरी तरह नाकाम रही। जी हां, जो कार्यक्रम पाकिस्तान के लिए दुनिया भर में अपनी कूटनीतिक ताकत दिखाने का एक शानदार मौका था, वह उसके लिए भारी फजीहत का कारण बन गया है। बिल नहीं चुका पाने की इस घटना ने पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति और उसकी विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
होटल के मालिक को खुद चुकाना पड़ा बिल
न्यूज18 ने खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी के हवाले से लिखा है कि स्थिति इतनी खराब हो गई कि आखिरकार होटल के मालिक को खुद आगे आकर इस पूरे खर्च का भुगतान करना पड़ा। होटल के मालिक आगा खान डेवलपमेंट नेटवर्क से ताल्लुक रखते हैं।
इस घटना के बाद कूटनीतिक हलकों में पाकिस्तान की जमकर आलोचना हो रही है। जिस कार्यक्रम को पाकिस्तान अपनी विदेश नीति की एक बड़ी कामयाबी मान रहा था, वह उसके लिए एक ‘पब्लिक रिलेशंस डिजास्टर’ यानी सार्वजनिक बदनामी बन गया है।
बड़े दावों और असलियत में भारी अंतर
इस्लामाबाद में हुए इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य दुनिया को यह दिखाना था कि पाकिस्तान, अमेरिका और ईरान के बीच एक भरोसेमंद मध्यस्थ बन सकता है। सेरेना जैसे प्रतिष्ठित होटल में इस बातचीत को आयोजित करने का मकसद यह जताना था कि पाकिस्तान एक स्थिर और सक्षम देश है।
होटल का एक सामान्य सा बिल न चुका पाना इस बात को साबित करता है कि पाकिस्तान के बड़े-बड़े कूटनीतिक दावों और उसकी जमीनी आर्थिक सच्चाई में जमीन-आसमान का फर्क है।
सूत्रों ने इस चूक की गंभीरता पर जोर देते हुए कहा- इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान यह बुनियादी विफलता दिखाती है कि पाकिस्तानी प्रशासन रोजमर्रा के खर्च उठाने में भी पूरी तरह असमर्थ है। जब कोई मेजबान देश ऐसे अंतरराष्ट्रीय और दुनिया भर की नजरों वाले कार्यक्रम में अपने वित्तीय वादों को पूरा नहीं कर पाता, तो इससे दुनिया में उसकी प्रशासनिक और आर्थिक कमजोरी का ही संदेश जाता है।
कंगाली और IMF का दबाव
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब पाकिस्तान पहले से ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की कड़ी निगरानी में है। देश लगातार गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहा है और महंगाई दर 7 से 9 प्रतिशत के आसपास बनी हुई है। देश के सामने ढांचागत वित्तीय चुनौतियां मुंह बाए खड़ी हैं। इन सब के बीच, होटल के बिल का भुगतान न कर पाना पाकिस्तान के एक बहुत बड़े संकट का प्रतीक बन गया है। यह दिखाता है कि कैसे देश की आर्थिक तंगी उसकी विदेशी मामलों की कोशिशों को भी खोखला कर रही है।
फेल हो गई थी वार्ता
अमेरिका-ईरान के बीच इस्लामाबाद के सेरेना होटल में चली 21 घंटे से अधिक की मैराथन शांति वार्ता पूरी तरह फेल हो गई। दोनों पक्षों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण, आर्थिक प्रतिबंधों के हटाने और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर कोई आम सहमति नहीं बना पाए। वार्ता का मूल उद्देश्य चल रहे ईरान युद्ध को समाप्त करना और नाजुक युद्धविराम को मजबूत करना था, लेकिन गहरी असहमतियों और आपसी अविश्वास के कारण यह बिना किसी ठोस समझौते या डील के समाप्त हुई। इस असफलता ने न केवल मध्य पूर्व में स्थायी शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया, बल्कि पाकिस्तान की क्षेत्रीय मध्यस्थ की भूमिका को भी कमजोर कर दिया।
