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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: महिपाल सिंह ने SIT को भेजे ई-मेल में क्या-क्या बताया? पूरी डिटेल

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले को लेकर जांच जारी है. इस बीच ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल को लिखित शिकायत भेजी है. जिसमें उन्होंने ट्रस्ट पूर्व महासचिव चंपत राय, पूर्व व्यवस्था प्रभारी टिन्नू यादव समेत कुछ अन्य लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है.

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: महिपाल सिंह ने SIT को भेजे ई-मेल में क्या-क्या बताया? पूरी डिटेल

महिपाल सिंह ने मंदिर प्रबंधन पर कई नए आरोप लगाए हैं. उन्होंने SIT को 27 जुलाई को मेल भेजा था. 25 जुलाई को SIT ने उनसे संपर्क किया था और ईमेल के जरिए सबूत मांगे थे. इसके बाद महिपाल सिंह ने मंडलायुक्त लखनऊ को भेजे जवाबी ईमेल में दावा किया कि उन्होंने साल 2022 में ही कई अनियमितताओं की जानकारी दी थी. उन्होंने सभी 20 बिंदुओं की शिकायत और उपलब्ध दस्तावेज SIT को भेज दिए. महिपाल सिंह ने कहा कि उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर प्रशासन सक्षम है और उचित जांच कर सकता है.

महिपाल सिंह के बड़े आरोप

महिपाल सिंह ने आरोप लगाया कि करीब 3 लाख रुपये लागत वाले तीन एल्यूमिनियमग्लास केबिन पर 17 लाख रुपये से अधिक का भुगतान किया गया. उन्होंने दावा किया कि कार्यालय को अनुबंध अवधि पूरी होने से पहले ही खाली कर दिया गया, जिससे ट्रस्ट को वित्तीय नुकसान हुआ. उन्होंने आरोप लगाया कि एक मुकुट गायब होने के मामले में संदिग्धों से पूछताछ के बाद कोई पुलिस कार्रवाई नहीं की गई. साथ ही ये दावा भी किया कि कई संदिग्ध कर्मचारी सालों तक सेवा में बने रहे.

वित्तीय अनियमितताओं के आरोप

  • कारसेवकपुरम में ट्रस्ट से असंबंधित लोगों को मानदेय दिया गया.
  • VHP कॉलोनी में कई निर्माण कार्य ट्रस्ट की निधि से कराए गए.
  • विभिन्न उत्सवों और कार्यक्रमों में ट्रस्ट का पैसा खर्च किया गया.
  • बिना कार्य किए कई लोगों को मानदेय दिया गया

निर्माण कार्य पर सवाल

महिपाल सिंह ने मंदिर के निर्माण कार्य पर सवाल भी सवाल खड़े किए. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रोजेक्ट मैनेजर का कार्य सिविल विशेषज्ञ की बजाय इलेक्ट्रिकल इंजीनियर से कराया गया, जिससे मंदिर निर्माण की गुणवत्ता प्रभावित हुई. उन्होंने कहा कि ठेकेदारों के भुगतान रोके गए, बाद में बिल बढ़ाकर भुगतान किए गए. इसके साथ ही आरोप लगाया कि सत्यापित बिलों के भुगतान और घटिया गुणवत्ता के पत्थर ऊंची कीमत पर खरीदे गए.

चढ़ावे और दान से जुड़े आरोप

  • सिंधी समाज द्वारा दान की गई ईंटें गायब कर दी गईं.
  • दानपात्रों से निकली धातु कैश काउंटिंग रूम से बाहर ले जाई जाती रही.
  • 150 किलो चांदी भेजे जाने के बावजूद 85 किलो का झूला तैयार हुआ.
  • भरत कुटी में बिना रसीद प्राप्त निधि की चोरी का भी आरोप लगाया.

सुरक्षा व्यवस्था पर आरोप

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी महिपाल सिंह ने बड़े आरोप लगाए. उनके मुताबिक एक निजी व्यक्ति को पुलिस का वॉकीटॉकी उपलब्ध कराया गया.राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की यात्राओं के दौरान वह प्रतिबंधित क्षेत्र में सक्रिय रहा. आरोप है कि उसे वीआईपी दर्शन, वाहन पास और सुरक्षा व्यवस्था में अनधिकृत अधिकार दिए गए.

वीआईपी दर्शन और आर्थिक लाभ

महिपाल सिंह ने आरोप लगाया कि सुरक्षा चेक पोस्ट से बड़ी संख्या में लोगों की एंट्री कराई जाती थी. इससे आर्थिक लाभ अर्जित किया. उनका कहना है कि रामलला के श्रृंगार और प्रसाद की व्यवस्था में भी अनियमितताएं हुईं. वहीं संपत्ति और निर्माण संबंधी मामलों में उन्होंने आरोप लगाया कि स्थायी निर्माण की बजाय अस्थायी ढांचों पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए. उन्होंने कहा कि विवादित संपत्तियां खरीद कर ट्रस्ट को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया.

कैश काउंटिंग में गड़बड़ी का आरोप

अपनी शिकायत में महिपाल सिंह ने कैश काउंटिंग में गड़बड़ी होने का आरोप लगाया. उन्होंने बताया कि नकदी गणना के दौरान गड्डियों की संख्या में हेराफेरी की जाती थी. उन्होंने ये भी कहा कि शिकायत करने के बाद उन्हें गणना प्रक्रिया से हटा दिया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि बैंक में कम राशि का वाउचर भरवा कर गबन किया जाता था.

अन्य आरोप

  • ट्रस्ट में कार्य नहीं करने वाले लोगों के नाम पर भुगतान उठाया जाता था.
  • कारसेवकपुरम में निर्माण सामग्री दान में लेकर उसके फर्जी बिल बनाकर भुगतान लिया गया.
  • मंदिर निर्माण की प्रारंभिक लागत 800 करोड़ रुपये थी, जबकि खर्च 2200 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया.

खुद के बारे में महिपाल सिंह ने कहा कि वह पूर्णकालिक, निशुल्क सेवा कर रहे थे. उन्होंने दावा किया कि कथित गबन उजागर करने के कारण उन्हें हटा दिया गया. उन्होंने बताया कि 5 जून 2026 को उन्हें अयोध्या बुलाया गया. उन्होंने कहा कि 6 जून को उन्हें फोन पर चढ़ावा चोरी पकड़े जाने की जानकारी दी गई. उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में सार्वजनिक बयान में चोरी को छिपाने का प्रयास किया गया.

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