EPFO: नौकरीपेशा लोगों के लिए हर महीने सैलरी से कटने वाला पीएफ बुढ़ापे का सबसे बड़ा सहारा होता है. कर्मचारी के साथसाथ कंपनी भी हर महीने इस फंड में बराबर का हिस्सा डालती है. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन इस जमा रकम पर हर साल अच्छाखासा ब्याज देता है. आम तौर पर लोग समझते हैं कि ये पैसा किसी बैंक तिजोरी में बंद रहता है, लेकिन हकीकत इससे काफी अलग है. आपके पैसे को सुरक्षित रखने के साथसाथ उसे बढ़ाने के लिए एक खास रणनीति के तहत बाजार में लगाया जाता है.

सरकारी बॉन्ड से लेकर शेयर बाजार तक लगता है पैसा
EPFO आपके पीएफ के पैसे को सिर्फ बैंक खाते में जमा करके नहीं रखता है. इस रकम से कमाई करने के लिए इसे अलगअलग वित्तीय साधनों में लगाया जाता है. इस निवेश का सबसे पहला मकसद पैसे की सुरक्षा बनाए रखते हुए बेहतर मुनाफा कमाना है. इसके लिए फंड का एक बहुत बड़ा हिस्सा सरकारी प्रतिभूतियों यानी सरकारी बॉन्ड में लगाया जाता है. इसके अलावा कॉरपोरेट बॉन्ड सहित दूसरे कर्ज वाले साधनों में भी पैसा लगता है.
शेयर बाजार में भी इस फंड का एक हिस्सा लगाया जाता है. खास बात ये है कि EPFO सीधे किसी कंपनी के शेयर नहीं खरीदता है. इसके बजाय एक्सचेंज ट्रेडेड फंड के जरिए पैसा लगाया जाता है. ये ETF सेंसेक्स या निफ्टी जैसे बड़े इंडेक्स पर आधारित होते हैं, जिससे जोखिम काफी कम हो जाता है.
निवेश से लेकर ब्याज दर तय करने तक की पूरी प्रक्रिया
पीएफ का पैसा कहां लगाया जाएगा, ये फैसला EPFO अपनी मर्जी से नहीं ले सकता है. इसके लिए केंद्र सरकार की तरफ से निवेश का एक तय पैटर्न बनाया गया है. केंद्रीय न्यासी बोर्ड व सरकार के दिशानिर्देशों के मुताबिक ही फंड को अलगअलग जगहों पर डाला जाता है. इस पूरे फंड को संभालने के लिए खास तौर पर पोर्टफोलियो मैनेजर नियुक्त किए जाते हैं, जो तय नियमों के दायरे में रहकर ही निवेश का काम देखते हैं.
जहां तक ब्याज दर की बात है, तो ये हमेशा के लिए एक जैसी तय नहीं होती है. हर वित्त वर्ष में इसकी समीक्षा की जाती है. CBT निवेश से हुई कुल कमाई के साथ फंड की आर्थिक स्थिति को परखता है. इसके बाद ही ब्याज दर की सिफारिश की जाती है. केंद्र सरकार की मुहर लगने के बाद इसे आधिकारिक तौर पर घोषित किया जाता है. यानी हर साल एक जैसी दर की गारंटी नहीं होती है. वित्त वर्ष 202526 के लिए बोर्ड ने पीएफ जमा पर 8.25 फीसदी सालाना ब्याज देने की सिफारिश की है. सरकार की मंजूरी व नोटिफिकेशन जारी होने के बाद ये पैसा लोगों के खातों में डाल दिया जाएगा.
बाजार की गिरावट से पीएफ के ब्याज पर क्यों नहीं पड़ता असर
शेयर बाजार में उतारचढ़ाव आने पर भी आपके पीएफ के ब्याज पर सीधा असर नहीं पड़ता है. इसकी मुख्य वजह ये है कि EPFO का पूरा निवेश शेयर बाजार के भरोसे नहीं रहता है. सरकारी बॉन्ड व दूसरे सुरक्षित साधनों में बड़ा हिस्सा लगा होने की वजह से फंड को एक स्थिर कमाई होती रहती है. वहीं, ETF के जरिए शेयर बाजार में लगा पैसा लंबे समय में अतिरिक्त मुनाफा कमाने में मदद करता है. अलगअलग जगहों पर पैसा लगाने से जोखिम का संतुलन बना रहता है.
चक्रवृद्धि ब्याज से ऐसे बढ़ता है रिटायरमेंट फंड
पीएफ खाते में मिलने वाले ब्याज का हिसाब हर महीने के आधार पर लगाया जाता है. हालांकि, इस ब्याज को वित्त वर्ष खत्म होने के बाद साल के अंत में ही खाते में जमा किया जाता है. एक बार जब ब्याज की रकम आपके मूलधन में जुड़ जाती है, तो अगले साल उस ब्याज पर भी ब्याज मिलता है. इसे चक्रवृद्धि ब्याज का फायदा कहा जाता है. निवेश से होने वाली इसी नियमित कमाई की वजह से पीएफ को नौकरीपेशा लोगों के लिए रिटायरमेंट की बचत का सबसे भरोसेमंद जरिया माना जाता है.



