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अरबों के सुरक्षा कवच फेल, हमेशा के लिए नक्शे से मिट रहा वेनिस! कैसे और कहां शिफ्ट किया जाएगा पूरा का पूरा शहर?

Satya Report: वेनिस अपनी खूबसूरती और नहरों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है. इटली का यह ऐतिहासिक शहर अब एक बड़े खतरे का सामना कर रहा है. समुद्र का बढ़ता जलस्तर वेनिस के वजूद को खत्म करने पर तुला है. एक नई साइंटिफिक रिपोर्ट ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है. इस एनालिसिस के मुताबिक वेनिस को बचाने के लिए बना मौजूदा सिस्टम अब नाकाफी साबित हो रहा है. यह फ्लड बैरियर शहर को केवल एक सीमित समय तक ही सुरक्षित रख पाएंगे. अगर हालात नहीं सुधरे तो वेनिस को पूरी तरह से किसी दूसरी सुरक्षित जगह पर शिफ्ट करना पड़ सकता है. यह खबर उन लाखों लोगों के लिए परेशान करने वाली है जो इस शहर की विरासत से प्यार करते हैं. यूनिवर्सिटी ऑफ सलेंटो के प्रोफेसर पिएरो लियोनेलो की टीम ने इस पर रिसर्च की है. उन्होंने अगले 200 सालों के समुद्री जलस्तर का डेटा एनालिसिस किया है. रिसर्च बताती है कि पानी जिस रफ्तार से बढ़ रहा है, उससे मौजूदा डिफेंस सिस्टम फेल हो जाएगा. (All

अरबों के सुरक्षा कवच फेल, हमेशा के लिए नक्शे से मिट रहा वेनिस! कैसे और कहां शिफ्ट किया जाएगा पूरा का पूरा शहर?
वेनिस की सुरक्षा के लिए फिलहाल मूवेबल बैरियर लगाए गए हैं. ये बैरियर समुद्री लैगून के तीन प्रवेश द्वारों पर तैनात रहते हैं. लेकिन क्लाइमेट चेंज की वजह से ये रक्षा दीवारें छोटी पड़ती जा रही हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि जब समुद्र का स्तर 4 फीट से ज्यादा बढ़ेगा, तब ये बैरियर काम नहीं करेंगे. इसके बाद वेनिस के पास बहुत ही कम और कठिन विकल्प बचेंगे. शहर को बचाना है या उसकी पुरानी पहचान को, यह एक बड़ा सवाल बन गया है. समुद्र के साथ वेनिस की यह लड़ाई अब नाजुक मोड़ पर पहुंच गई है.
वेनिस को बाढ़ से बचाने के लिए अरबों डॉलर खर्च करके बैरियर बनाए गए थे. इन्हें ‘मोसे’ प्रोजेक्ट के नाम से जाना जाता है. शुरुआत में लगा था कि ये शहर को डूबने से बचा लेंगे. प्रोफेसर लियोनेलो की टीम ने पाया कि ये सिस्टम हमेशा के लिए नहीं है. जब समुद्र का पानी 1.6 फीट तक बढ़ेगा, तभी से मुश्किलें शुरू हो जाएंगी. मौजूदा बैरियर को बार-बार बंद करना पड़ेगा. बार-बार गेट बंद करने से लैगून का पानी दूषित होने लगेगा. इससे वहां मौजूद मछलियों और समुद्री जीवन पर बुरा असर पड़ेगा.
UNESCO ने वेनिस को वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित किया है. यहां के लैगून और शहर को एक साथ जोड़कर देखा जाता है. जब पानी को रोकने के लिए गेट बंद होते हैं, तो समुद्र से ताजे पानी का एक्सचेंज रुक जाता है. इससे वहां के दलदली इलाकों और बंदरगाहों पर दबाव बढ़ रहा है. हाल के वर्षों में वेनिस में ‘एक्वा अल्टा’ यानी भयंकर बाढ़ की घटनाएं बढ़ी हैं. मौसम के बदलते मिजाज ने इन घटनाओं को और खतरनाक बना दिया है. हर बार जब गेट बंद होते हैं, तो वेनिस की पुरानी ईंटें और पत्थर तो बच जाते हैं, लेकिन वहां का नेचुरल इकोसिस्टम धीरे-धीरे खत्म होने लगता है.
जब मौजूदा बैरियर फेल होंगे, तो रिंग डिक्स यानी शहर के चारों ओर सुरक्षा दीवार बनाने का विकल्प आता है. यह दीवार वेनिस के ऐतिहासिक केंद्र और आसपास के द्वीपों को घेर लेगी. इससे बाकी लैगून तो खुला रहेगा, लेकिन शहर एक सुरक्षित घेरे में बंद हो जाएगा. इस सिस्टम को चलाने के लिए बड़े पंप और सीवर नेटवर्क की जरूरत होगी. क्योंकि दीवार बनने के बाद बारिश का पानी प्राकृतिक रूप से बाहर नहीं जा पाएगा. उसे मशीनों के जरिए बाहर निकालना पड़ेगा.
इस प्रोजेक्ट की लागत 540 मिलियन से 4.9 बिलियन डॉलर के बीच हो सकती है. यह शहर को शिफ्ट करने से तो सस्ता है, लेकिन इससे वेनिस का हुलिया बदल जाएगा. यह दीवार स्मारकों और घरों को बाढ़ से तो बचा लेगी, लेकिन वेनिस का पानी से जो पुराना रिश्ता है, वह टूट जाएगा. शहर और समुद्र के बीच एक बड़ी दीवार खड़ी हो जाएगी. यह विकल्प वेनिस की आत्मा को नुकसान पहुंचा सकता है. ट्रांसपोर्ट और टूरिज्म पर भी इसका गहरा असर पड़ेगा. सैलानी जो नजारा देखने आते हैं, वह शायद हमेशा के लिए बदल जाएगा.
एक और बड़ा इंजीनियरिंग विकल्प है लैगून को पूरी तरह बंद कर देना. इसमें वेनिस के पानी को एक सुरक्षित तटीय झील में बदल दिया जाएगा. इसके लिए स्थायी बांध और बहुत ऊंचे डिफेंस सिस्टम बनाने होंगे. यह डिजाइन वेनिस को समुद्र के 33 फीट ऊंचे जलस्तर से भी बचा सकता है. यह आज के किसी भी बैरियर से कहीं ज्यादा ताकतवर होगा. एक ‘सुपर लेवी’ बनाने का सुझाव भी दिया गया है, जो महाप्रलय जैसी बाढ़ को भी रोक सके.
लेकिन इस सुरक्षा की कीमत बहुत ज्यादा है. इसके निर्माण में करीब 32 बिलियन डॉलर का खर्च आएगा. सबसे बड़ी चिंता यह है कि इससे लैगून का पूरा इकोसिस्टम खत्म हो जाएगा. वह एक प्राकृतिक समुद्री हिस्सा न रहकर एक मैन-मेड झील बन जाएगा. वहां के जलीय जीव और प्राकृतिक संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाएगा. क्या शहर की इमारतों को बचाने के लिए प्रकृति की इतनी बड़ी बलि देना सही है? यह एक ऐसा सवाल है जिस पर एक्सपर्ट्स के बीच काफी बहस हो रही है.
अगर समुद्र का स्तर 15 फीट से ज्यादा बढ़ जाता है, तो हालात काबू से बाहर हो जाएंगे. ऐसी स्थिति में रिसर्च में ‘रिट्रीट’ यानी पीछे हटने का सुझाव दिया गया है. यह कोई काल्पनिक बात नहीं है बल्कि एक कड़वी सच्चाई हो सकती है. तब शायद वेनिस के ऐतिहासिक स्मारकों को एक-एक करके उखाड़ना पड़ेगा और उन्हें मुख्य भूमि के अंदर सुरक्षित जगह ले जाना होगा. पूरे शहर के हिस्सों को छोड़ना पड़ सकता है.
इस काम में करीब 108 बिलियन डॉलर का खर्च आ सकता है. यह न केवल आर्थिक रूप से बोझ होगा, बल्कि एक ऐतिहासिक सांस्कृतिक त्रासदी भी होगी. जो वेनिस आज हम देखते हैं, उसका अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा. नई जगह पर केवल चुनिंदा स्मारकों के टुकड़े ही बच पाएंगे. वह जीवंत शहर नहीं बचेगा जिसे सदियों से संजोया गया है. यह विकल्प तभी इस्तेमाल होगा जब बाकी सारे इंजीनियरिंग तरीके फेल हो जाएंगे. यह वेनिस के लिए सबसे दुखद अंत जैसा होगा.
वेनिस को बचाने के लिए जितने भी बड़े सुझाव दिए गए हैं, उनमें पैसा और समय सबसे बड़ी रुकावट हैं. मौजूदा बैरियर बनाने में ही 6.5 बिलियन डॉलर खर्च हो चुके हैं. भविष्य के प्रोजेक्ट्स इससे कई गुना महंगे होंगे. किसी भी बड़े डिफेंस सिस्टम को बनाने में 30 से 50 साल का समय लगता है. इसका मतलब है कि हमें आज ही प्लानिंग शुरू करनी होगी. अगर हम बाढ़ आने का इंतजार करेंगे, तो बहुत देर हो जाएगी.
यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट एंग्लिया के प्रोफेसर रॉबर्ट जे निकोल्स कहते हैं कि वेनिस को बचाने का कोई एक परफेक्ट तरीका नहीं है. हर विकल्प के साथ कुछ न कुछ नुकसान जुड़ा है. रिंग डिक्स घरों को बचाते हैं लेकिन समुद्र से रिश्ता काट देते हैं. वहीं लैगून को सील करने से इकोसिस्टम मर जाता है. ग्लोबल वार्मिंग और कार्बन उत्सर्जन को कम करके ही भविष्य के खतरे को कम किया जा सकता है. अगर दुनिया ने क्लाइमेट चेंज पर सख्त कदम नहीं उठाए, तो वेनिस के पास आइडिया तो होंगे लेकिन समय नहीं बचेगा.
वेनिस की समस्या केवल इटली की समस्या नहीं है. यह पूरी दुनिया के तटीय शहरों के लिए एक अलार्म है. दुनिया के कई बड़े शहर समुद्र किनारे बसे हैं और वे भी डूबने के खतरे में हैं. वेनिस अपनी सांस्कृतिक अहमियत की वजह से चर्चा में रहता है, लेकिन खतरा हर उस जगह है जो समुद्र तल से नीची है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि सभी तटीय इलाकों को अब अपनी सुरक्षा पर सोचना शुरू कर देना चाहिए.
वेनिस को बचाने की इस जंग में पैसा, इंजीनियरिंग और जनता की सहमति, सब कुछ जरूरी है. लेकिन सबसे कठिन फैसला यह होगा कि बचाने के लिए हम क्या खोने को तैयार हैं. क्या हम पुरानी इमारतों के लिए प्रकृति को छोड़ देंगे या नई सुरक्षा के लिए इतिहास को? साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित यह स्टडी बताती है कि वेनिस के पास अब सोचने के लिए बहुत कम वक्त बचा है. हमें यह तय करना होगा कि आने वाली पीढ़ियां वेनिस को मैप पर देखेंगी या सिर्फ इतिहास की किताबों में.
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