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ईरान युद्ध का दिख रहा बुरा असर, ग्लोबल एयरलाइंस ने कमाई के अनुमान में की भारी कटौती

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर अब ग्लोबल विमानन उद्योग पर भी दिखाई देने लगा है. दुनिया की प्रमुख एयरलाइंस का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने वर्ष 2026 के लिए एयरलाइन उद्योग के मुनाफे के अनुमान में बड़ी कटौती कर दी है. संस्था का कहना है कि ईरान युद्ध के बाद बढ़ी ईंधन लागत, हवाई मार्गों में व्यवधान और परिचालन चुनौतियों ने एयरलाइंस की कमाई पर दबाव बढ़ा दिया है.

ईरान युद्ध का दिख रहा बुरा असर, ग्लोबल एयरलाइंस ने कमाई के अनुमान में की भारी कटौती
ईरान युद्ध का दिख रहा बुरा असर, ग्लोबल एयरलाइंस ने कमाई के अनुमान में की भारी कटौती

IATA की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, अब ग्लोबल एयरलाइन उद्योग का संयुक्त शुद्ध लाभ 2026 में करीब 23 अरब डॉलर रहने का अनुमान है. इससे पहले यह अनुमान लगभग 41 अरब डॉलर था. वहीं 2025 में उद्योग का मुनाफा 45 अरब डॉलर रहने का अनुमान लगाया गया था. यानी एक साल में लाभ में उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिल सकती है.

जेट फ्यूल की कीमतों ने बढ़ाया बोझ

IATA के महानिदेशक विली वॉल्श ने कहा कि इस कटौती के पीछे दो प्रमुख कारण हैं. पहला, जेट फ्यूल की कीमतों में उम्मीद से कहीं ज्यादा बढ़ोतरी और दूसरा, खाड़ी क्षेत्र की एयरलाइंस के सामने पैदा हुई परिचालन समस्याएं. युद्ध के कारण कई देशों ने अपना हवाई क्षेत्र बंद या सीमित कर दिया है, जिससे एयरलाइंस को लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है. इससे ईंधन की खपत और लागत दोनों बढ़ गई हैं. संस्था के मुताबिक एयरलाइंस का कुल ईंधन खर्च 2025 के लगभग 252 अरब डॉलर से बढ़कर इस साल 350 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. ईंधन अब एयरलाइंस की कुल परिचालन लागत का करीब एकतिहाई हिस्सा बन सकता है.

किराए ऊंचे बने रहने की संभावना

युद्ध शुरू होने के बाद कई अंतरराष्ट्रीय रूट प्रभावित हुए हैं. एयरलाइंस को उड़ानों का मार्ग बदलना पड़ रहा है, जिससे यात्राओं का समय बढ़ गया है. ऐसे में टिकट किराए में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है. IATA का मानना है कि निकट भविष्य में हवाई किराए में बड़ी राहत मिलने की संभावना कम है क्योंकि मांग मजबूत बनी हुई है जबकि क्षमता पर दबाव बढ़ रहा है. विली वॉल्श के अनुसार, बढ़ती लागत के चलते कुछ छोटी एयरलाइंस बंद हो सकती हैं या बड़ी कंपनियों द्वारा उनका अधिग्रहण किया जा सकता है. साथ ही कई एयरलाइंस घाटे वाले रूट्स पर उड़ानें कम कर सकती हैं.

राजस्व बढ़ेगा, लेकिन मुनाफा रहेगा दबाव में

हालांकि यात्रा की मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है. IATA का अनुमान है कि इस वर्ष वैश्विक एयरलाइन उद्योग का कुल राजस्व 9.4 फीसदी बढ़कर लगभग 1.16 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है. इसमें टिकट किराए के अलावा सीट अपग्रेड, अतिरिक्त सामान और अन्य सेवाओं से होने वाली आय भी योगदान देगी.

इसके बावजूद एयरलाइंस के लिए चुनौतियां कम नहीं हैं. बोइंग और एयरबस से विमानों की डिलीवरी में देरी के कारण कंपनियों को पुराने और कम ईंधनकुशल विमानों का इस्तेमाल लंबे समय तक करना पड़ रहा है. इससे रखरखाव लागत बढ़ रही है और मुनाफे पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है. IATA का कहना है कि यदि मध्य पूर्व का संकट लंबा खिंचता है तो वैश्विक विमानन उद्योग की स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है.

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