
गरुड़ पुराण में इंसान की मौत और उसके बाद के सफर के बारे में बहुत विस्तार से बताया गया है. इस ग्रंथ के अनुसार जब किसी व्यक्ति की मौत का समय करीब आता है, तो उसके शरीर में कई तरह के बदलाव होने लगते हैं.
आत्मा के शरीर छोड़ने से ठीक एक दिन यानी 24 घंटे पहले इंसान का शरीर अपने आप कुछ संकेत देने लगता है. सबसे बड़ा बदलाव ये होता है कि व्यक्ति की सभी ज्ञानेंद्रियां धीरे धीरे काम करना बंद कर देती हैं. उसकी आंखें, कान, नाक, जीभ और त्वचा की शक्ति खत्म होने लगती है.
आंखों की रोशनी
मौत के ठीक एक दिन पहले इंसान की आंखों की रोशनी सबसे पहले धुंधली होने लगती है. उसे अपने आस पास बैठे लोग और चीजें साफ़ दिखाई नहीं देती हैं. गरुड़ पुराण के मुताबिक ऐसे समय में इंसान को अपने पास खड़े लोग भी नजर नहीं आते हैं.
उसे हर तरफ सिर्फ अंधेरा या फिर कुछ अजीब सी परछाइयां दिखने लगती हैं. इसके साथ ही उसकी बोलने की क्षमता भी खत्म हो जाती है. वह कुछ कहना भी चाहे तो उसकी आवाज गले में ही अटक कर रह जाती है और मुंह से सिर्फ थरथराहट निकलती है.
आंखों के सामने तैरने लगते हैं कर्म
दूसरा बड़ा रहस्य यह है कि मरते हुए व्यक्ति को अपने जीवन के अच्छे और बुरे काम एक फिल्म की तरह दिखने लगते हैं. अंतिम समय में इंसान की याददाश्त बहुत तेज हो जाती है. उसने बचपन से लेकर बुढ़ापे तक जो भी कर्म किए होते हैं, वे सब उसकी आंखों के सामने तैरने लगते हैं.
इस दौरान उसने किसे दुख पहुंचाया और कहां पुण्य कमाया, यह सब उसे याद आता है. अपने बुरे कर्मों को देखकर आत्मा अंदर ही अंदर छटपटाने लगती है और उसके चेहरे पर एक अजीब सा डर साफ देखा जा सकता है.
शरीर से आती है महक
शारीरिक बदलावों की बात करें तो मौत से 24 घंटे पहले इंसान के शरीर से एक खास तरह की महक आने लगती है. इसे वैज्ञानिक भाषा में शरीर के अंगों का काम बंद करना कहते हैं, लेकिन गरुड़ पुराण इसे यम के दूतों के आने का संकेत मानता है.
इस समय इंसान की सांसें बहुत भारी हो जाती हैं. उसकी जीभ धीरे धीरे उलटने लगती है और तालू से चिपकने का प्रयास करती है. इंसान पानी की एक एक बूंद के लिए तरसने लगता है क्योंकि उसका पूरा गला और मुंह अंदर से सूख जाता है.
शरीर पड़ जाता है ठंडा
आखिरी समय में इंसान की भूख और प्यास पूरी तरह से खत्म हो जाती है. उसका शरीर धीरे धीरे ठंडा पड़ने लगता है. सबसे पहले पैर के पंजे और हाथ ठंडे होते हैं और फिर यह ठंडक दिल तक पहुंचती है.
यमराज के दूत आते हैं नजर
गरुड़ पुराण कहता है कि जब आत्मा शरीर छोड़ने के बिल्कुल करीब होती है, तो उसे यमराज के दूत नजर आने लगते हैं. उन्हें देखकर इंसान बहुत ज्यादा डर जाता है और उसकी आंखें ऊपर की तरफ खिंच जाती हैं. इसके ठीक बाद आत्मा पूरी तरह से शरीर को छोड़कर अपने नए सफर पर निकल जाती है.



