
भारतीय थाली में गरम-गरम रोटी पर थोड़ा सा देसी घी लगाना सिर्फ स्वाद ही नहीं बढ़ाता, बल्कि सालों पुरानी एक सेहतमंद परंपरा भी मानी जाती है। लेकिन क्या डायबिटीज या हाई ब्लड शुगर जैसी स्थिति में रोटी पर घी लगाकर (चुपड़ी रोटी) खाना सेहत के लिए सुरक्षित है? अक्सर लोग मानते हैं कि घी खाने से मोटापा या शुगर बढ़ता है, वहीं न्यूट्रिशनिस्ट और डायटीशियन की राय इससे बिल्कुल अलग है।
MOC कैंसर केयर एंड रिसर्च सेंटर, नई दिल्ली की ऑन्कोलॉजी डाइटिशियन Dt. यादव ने बताया घी से हेल्दी फैट्स और कुछ विटामिन मिलते हैं। घी फैट का एक स्रोत है और इसमें ऊर्जा के साथ कुछ वसा में घुलनशील विटामिन जैसे विटामिन A, E और K पाए जाते हैं। एक ग्राम फैट से करीब 9 किलो कैलोरी ऊर्जा मिलती है। हालांकि, घी को हमेशा सीमित मात्रा में ही डाइट में शामिल करना चाहिए। इसकी जरूरत और मात्रा व्यक्ति की कुल कैलोरी जरूरत और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करती है। आइए एक्सपर्ट्स से समझते हैं कि रोटी पर घी लगाने का आपके मेटाबॉलिज्म पर क्या असर पड़ता है, डायबिटीज में इसे कैसे और कितनी मात्रा में खाना सही है, और इसके पीछे का असली साइंस क्या है।
रोटी पर घी लगाकर खाना कितना सही?
रोटी पर थोड़ी मात्रा में घी लगाकर खाना सामान्य तौर पर हानिकारक नहीं है। इससे रोटी में फैट और ऊर्जा जुड़ती है और रोटी का स्वाद बढ़ता है और रोटी नरम भी रहती है जिसे चबाना आसान होता है। खासतौर पर जिन लोगों को रोटी चबाने में परेशानी होती है, उनके लिए घी लगी नरम रोटी खाना आसान हो सकता है। हालांकि, इसे जरूरत से ज्यादा खाने से अतिरिक्त कैलोरी का सेवन बढ़ सकता है।
घी पाचन पर कैसे करता है असर?
घी भोजन में फैट की मात्रा बढ़ाता है, इसलिए यह पेट भरा हुआ महसूस कराने में योगदान दे सकता है। इससे कुछ लोगों को लंबे समय तक संतुष्टि महसूस हो सकती है। हालांकि, घी को भूख बढ़ाने या मेटाबॉलिज्म तेज करने वाला खाद्य पदार्थ मानने से पहले व्यक्ति की पूरी डाइट और हेल्थ कंडीशन को ध्यान में रखना जरूरी है।
एक दिन में कितना घी खाना चाहिए?
डायटीशियन के मुताबिक, एक सामान्य स्वस्थ व्यक्ति के लिए लगभग 1 से 2 छोटे चम्मच घी पूरे दिन में लिया जा सकता है। वहीं, रोटी पर घी लगाने की बात करें तो करीब आधा छोटा चम्मच घी दो चपातियों पर लगाया जा सकता है। हालांकि, यह एक सामान्य मात्रा है; व्यक्ति की कैलोरी जरूरत, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार मात्रा बदल सकती है।
डायबिटीज में घी कितना सही?
डायबिटीज या प्री-डायबिटीज वाले लोगों को घी पूरी तरह बंद करने की जरूरत हर व्यक्ति में नहीं होती, लेकिन इसे सीमित मात्रा में लेना जरूरी है। घी में कार्बोहाइड्रेट नहीं होता, इसलिए यह सीधे तौर पर ब्लड शुगर नहीं बढ़ाता। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि घी डायबिटीज को रोकता या ठीक करता है। डायबिटीज में रोटी की मात्रा, आटे का प्रकार, पूरी डाइट और कुल कैलोरी का ध्यान रखना ज्यादा जरूरी है।
क्या घी लगाने से रोटी का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है?
डायटीशियन मानसी के मुताबिक सिर्फ घी लगाने से रोटी का ग्लाइसेमिक लोड कम नहीं माना जा सकता। रोटी मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट का स्रोत है और उसका ग्लाइसेमिक प्रभाव उसके आटे, मात्रा और भोजन के बाकी हिस्सों पर भी निर्भर करता है। इसलिए डायबिटीज वाले व्यक्ति को यह नहीं मानना चाहिए कि घी लगाने से रोटी ब्लड शुगर के लिए पूरी तरह सुरक्षित हो जाती है।
कब्ज और पाचन के लिए कितना फायदेमंद?
घी को पाचन और गट हेल्थ के लिए फायदेमंद माना जाता है और इसमें मौजूद फैटी एसिड शरीर को एनर्जी देता है। हालांकि, केवल घी को कब्ज का इलाज नहीं माना जा सकता। कब्ज से राहत के लिए पर्याप्त फाइबर, पानी, फल-सब्जियां और नियमित शारीरिक गतिविधि भी जरूरी हैं।
इम्यूनिटी में क्या भूमिका है?
घी में मौजूद फैट शरीर को वसा में घुलनशील विटामिनों के अवशोषण में मदद कर सकता है। विटामिन A जैसे पोषक तत्व सामान्य इम्यून फंक्शन में भूमिका निभाते हैं। हालांकि, सिर्फ घी खाने से इम्यूनिटी मजबूत होने का दावा नहीं किया जा सकता। इम्यून सिस्टम के लिए संतुलित का सेवन करना जरूरी है।
मोटापा, फैटी लिवर और हाई कोलेस्ट्रॉल में सावधानी जरूरी
जिन लोगों को मोटापा, फैटी लिवर या हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या है, उन्हें घी की मात्रा व्यक्ति की मेडिकल स्थिति और डाइट के अनुसार तय करनी चाहिए। डायटीशियन के अनुसार, ऐसे कुछ मरीजों में लगभग 5 ग्राम यानी एक छोटा चम्मच प्रतिदिन की सीमा रखी जा सकती है, जबकि कुछ लोगों को उनकी स्थिति के आधार पर घी से पूरी तरह बचने की सलाह भी दी जा सकती है। इसलिए इन स्थितियों में व्यक्तिगत डाइट प्लान ज्यादा महत्वपूर्ण है।
हार्ट डिजीज में घी खाने से पहले बरतें सावधानी
हार्ट से जुड़ी बीमारी वाले लोगों के लिए घी की मात्रा डॉक्टर या डायटीशियन की सलाह के अनुसार तय की जानी चाहिए। खासकर जिन लोगों का LDL कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है या जिन्हें हृदय संबंधी बीमारी है, उन्हें डाइट में कुल सैचुरेटेड फैट का ध्यान रखना जरूरी है।
मिलेट्स और मल्टीग्रेन रोटी के साथ भी ले सकते हैं घी
बाजरा, ज्वार, रागी या अन्य मिलेट्स की रोटी के साथ थोड़ी मात्रा में घी लिया जा सकता है। इससे रोटी का स्वाद और सॉफ्टनेस बढ़ सकती है। हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि घी मिलाने से मिलेट्स के सभी पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ जाती है। संतुलित मात्रा में फैट कुछ वसा में घुलनशील पोषक तत्वों के अवशोषण में मदद कर सकता है।
घी के साथ एक्सरसाइज भी जरूरी
अगर डाइट में घी जैसे फैट शामिल किए जा रहे हैं, तो शारीरिक गतिविधि भी महत्वपूर्ण है। खासकर डेस्क जॉब या कम शारीरिक गतिविधि वाली जीवनशैली में जरूरत से ज्यादा घी और अन्य कैलोरी वाले खाद्य पदार्थ लेने से कुल कैलोरी सेवन बढ़ सकता है, जिससे वजन बढ़ने का जोखिम हो सकता है।
घी खाएं, लेकिन मात्रा का ध्यान रखें
घी को पूरी तरह खराब या पूरी तरह फायदेमंद मानना सही नहीं है। एक स्वस्थ व्यक्ति संतुलित डाइट के हिस्से के रूप में सीमित मात्रा में घी ले सकता है। वहीं डायबिटीज, मोटापा, फैटी लिवर, हाई कोलेस्ट्रॉल या हृदय रोग जैसी स्थितियों में घी की मात्रा व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और पूरी डाइट के आधार पर तय की जानी चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। घी किसी बीमारी का इलाज या उसे रोकने की गारंटी नहीं देता। डायबिटीज, मोटापा, फैटी लिवर, हाई कोलेस्ट्रॉल या हृदय संबंधी बीमारी से जूझ रहे लोग घी की मात्रा अपने डॉक्टर या डायटीशियन की सलाह से तय करें।



