एकदम फिल्मी अंडरडॉग कहानी जैसा लगने वाले इस मामले में, आर. सबरीनाथन ने जबरदस्त जीत हासिल की है. वह विजय थलापति के पर्सनल ड्राइवर के बेटे हैं. तमिलनाडु की विरुगंबक्कम सीट से उन्होंने न सिर्फ जीत दर्ज की, बल्कि मौजूदा DMK विधायक ए.एम.वी. प्रभाकर राजा को 27,086 वोटों के बड़े अंतर से हरा दिया.

कितनी मिलेगी सैलरी?
विजय थलापति के ड्राइवर के बेटे आर सबरीनाथन अब तमिलनाडु विधानसभा के सदस्य बन गए हैं, उन्हें अब सरकार की ओर से हर महीने 1 लाख 5 हजार रुपए मंथली सैलरी मिलेगी. आपको बता दें 2017 में तत्कालीन तमिलनाडु सरकार ने विधायकों की सैलरी 55 हजार रुपए से बढ़ाकर 1 लाख 5 हजार रुपए की थी.
साधारण पृष्ठभूमि से बड़ी जीत
सबारिनाथन के पिता राजेंद्रन, विजय के साथ लंबे समय से काम करते हैं. पहले ज्यादा पहचान नहीं रखने वाले सबारिनाथन अब अचानक तमिलनाडु की राजनीति में चर्चा का बड़ा चेहरा बन गए हैं. उनकी जीत को जमीनी पकड़ और विजय लहर का असर माना जा रहा है. जीत के बाद उन्होंने खुलकर खुशी जताई और यहां तक कह दिया कि यह DMK के अंत का संकेत है.
पूरे राज्य में TVK की बढ़त
यह सिर्फ एक सीट की बात नहीं है. TVK पूरे तमिलनाडु में मजबूत पकड़ बनाती दिख रही है और 234 सीटों वाली विधानसभा में 100 से ज्यादा सीटें जीत चुकी है. हालांकि बहुमत के लिए 118 सीटें चाहिए, लेकिन ये नतीजे राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव का इशारा दे रहे हैं. चर्चा यह भी है कि छोटी पार्टियां जरूरत पड़ने पर विजय का समर्थन कर सकती हैं.
विजय का धमाकेदार राजनीतिक आगाज
वहीं विजय ने खुद भी शानदार प्रदर्शन किया है. पेरंबूर सीट से उन्होंने 53,000 से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की. तिरुचिरापल्ली में भी उनका प्रदर्शन मजबूत रहा. पार्टी नेताओं का दावा है कि विजय अगला मुख्यमंत्री बन सकते हैं.
बड़े उलटफेर भी देखने को मिले
इस चुनाव में कई चौंकाने वाले नतीजे भी आए. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन अपनी कोलाथुर सीट हार गए, जहां TVK के वीएस बाबू ने उन्हें करीब 9,000 वोटों से हराया. वहीं DMK गठबंधन में शामिल कांग्रेस को भी सिर्फ कुछ ही सीटों से संतोष करना पड़ा.
क्या बदल रही है तमिलनाडु की राजनीति?
लंबे समय से तमिलनाडु की राजनीति द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के इर्दगिर्द घूमती रही है. लेकिन इस बार के नतीजे 1970 के दशक के बाद पहली बार इस पैटर्न को तोड़ते नजर आ रहे हैं. विजय की तुलना अब एम जी रामचंद्रन, जे जयललिता और एन टी रामाराव जैसे फिल्म स्टार से नेता बने दिग्गजों से की जा रही है.
अब सिर्फ स्टारडम नहीं, असली समर्थन
पहले कहा जाता था कि फिल्म स्टार्स अपनी लोकप्रियता को वोट में नहीं बदल पाते, लेकिन विजय इस सोच को बदलते दिख रहे हैं. सबारिनाथन की जीत जैसी कहानियां दिखाती हैं कि यह सिर्फ स्टार पावर नहीं, बल्कि जनता के साथ जुड़ाव का असर है. चाहे TVK सरकार बनाए या नहीं, इतना तय है कि तमिलनाडु की राजनीति में इस बार बड़ा बदलाव आ चुका है.



