TrendingUttar Pradesh

Kajari Teej 2026: 31 अगस्त को कजरी तीज, जानें शिव-पार्वती पूजा विधि, व्रत कथा और चंद्रमा को अर्घ्य देने का तरीका

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में कजरी तीज का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह पर्व भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। पंडित पुरनेंदु पाठक के अनुसार, 2026 में कजरी तीज का व्रत 31 अगस्त, सोमवार को रखा जाएगा।

मान्यता है कि सुहागिन महिलाएं इस दिन पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से व्रत रखती हैं। वहीं अविवाहित कन्याएं मनचाहा जीवनसाथी पाने की इच्छा से भी यह व्रत कर सकती हैं। अलगअलग क्षेत्रों में कजरी तीज की पूजा और व्रत से जुड़ी परंपराओं में कुछ अंतर देखने को मिलता है।

कजरी तीज पर ऐसे करें पूजा की तैयारी

कजरी तीज के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद पूजा स्थल की साफसफाई करके वहां चौकी रखें और उस पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं।

चौकी पर भगवान शिव और माता गौरी की प्रतिमा स्थापित करें। इच्छानुसार मिट्टी से शिवपार्वती की प्रतिमा बनाकर भी पूजा की जा सकती है।

शिवपार्वती की पूजा का क्या है सही तरीका?

पूजा की शुरुआत भगवान गणेश के स्मरण से करें। इसके बाद भगवान शिव और माता गौरी को गंगाजल से स्नान कराएं और उन्हें वस्त्र एवं पुष्प अर्पित करें।

माता गौरी को सिंदूर, बिंदी, चूड़ी, मेहंदी और चुनरी जैसी सुहाग सामग्री अर्पित करना शुभ माना जाता है।

भगवान शिव को बेलपत्र, दूध, गंगाजल, धतूरा और पुष्प अर्पित करें। इसके बाद धूप और दीप जलाकर शिवपार्वती की आरती करें। पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप किया जा सकता है।

कजरी तीज की व्रत कथा जरूर सुनें

पूजा के बाद कजरी तीज की व्रत कथा पढ़ने या सुनने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार व्रत कथा का श्रवण करने से व्रत का धार्मिक महत्व पूरा होता है।

कथा के बाद भगवान शिव और माता पार्वती से दांपत्य जीवन में सुख, परिवार की खुशहाली और समृद्धि की कामना करें।

चंद्रमा को अर्घ्य देकर ऐसे करें व्रत का पारण

कई क्षेत्रों में कजरी तीज के दिन महिलाएं रात में चंद्रमा के दर्शन और पूजा के बाद उन्हें अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं। चंद्रमा को जल अर्पित करते समय पति की दीर्घायु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना की जाती है।

कुछ स्थानों पर गाय को रोटी और गुड़चना खिलाने की भी परंपरा है। हालांकि व्रत खोलने और चंद्रमा की पूजा से जुड़ी विधि स्थानीय परंपराओं के अनुसार अलग हो सकती है।

कजरी तीज का क्या है धार्मिक महत्व?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु और परिवार की सुखसमृद्धि के लिए कजरी तीज का व्रत रखती हैं। अविवाहित युवतियां मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना से भी यह व्रत कर सकती हैं।

कजरी तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है। अलगअलग क्षेत्रों में इस पर्व से जुड़ी पूजा विधि और रीतिरिवाजों में स्थानीय परंपराओं के अनुसार बदलाव हो सकता है।

Disclaimer: निर्जला व्रत स्वास्थ्य और अपनी शारीरिक क्षमता को ध्यान में रखकर ही रखें। गर्भवती महिलाओं, बीमार व्यक्तियों और नियमित दवा लेने वालों को उपवास रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply