
लखीमपुर खीरी, अमृत विचार। तेज हवा के साथ हुई बारिश से पकने की ओर बढ़ रही धान की फसल खेतों में बिछ गई। कई क्षेत्रों में गन्ना और बाजरा भी गिर गया। पहले से जलभराव वाले खेतों में दोबारा पानी भरने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। पकी धान की बालियों में लंबे समय तक पानी भरा रहा तो दाने सड़ने, अंकुरित होने और गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा है।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुहेल के अनुसार, कटाई के लिए तैयार धान की फसल तेज हवा से गिर गई है। खेतों में पानी भरे रहने से धान के सड़ने और बालियों में अंकुर निकलने की आशंका है। कई जगह गन्ना और बाजरा जड़ से उखड़ने की भी जानकारी है। दलहनतिलहन में उड़द, मूंग, तिल, मूंगफली, सोयाबीन और अरहर की फसलें जलभराव से प्रभावित हुई हैं। सब्जियों में अगेती आलू, मटर, टमाटर, लौकी, कद्दू, फूलगोभी, पत्तागोभी और धनिया को भी नुकसान पहुंचा है। फूल झड़ने और फल सड़ने की समस्या सामने आ रही है। आम, केला और पपीता के पेड़ों की डालियां टूटने के साथ फल गिरने से भी नुकसान हुआ है।
हालांकि, आगामी सीजन में बोई जाने वाली तोरिया, आलू, लहसुन, प्याज और कुछ सब्जियों के लिए पर्याप्त नमी को बारिश लाभदायक माना जा रहा है। किसानों का कहना है कि बारिश थमने के बाद ही फसलों को हुए वास्तविक नुकसान का आकलन हो सकेगा।
भारी बारिश में भरभराकर गिरा कच्चा मकान
गांव भगवंतनगर निवासी अशर्फी लाल पुत्र रूपन और महंगे पुत्र रूपन सगे भाई हैं। दोनों का कच्चा मकान लगातार हो रही बारिश के कारण कमजोर हो गया था। शनिवार को अचानक मकान की दीवारें और छप्पर भरभराकर गिर पड़े। मकान गिरने से पहले ही परिवार के लोग सुरक्षित स्थान पर चले गए थे, जिससे बड़ा हादसा होने से टल गया। पीड़ित परिवार के सामने रहने का संकट खड़ा हो गया है। गृहस्थी का सामान मलबे में दब जाने से परिवार को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा है। फिलहाल पीड़ित खुले आसमान के नीचे या दूसरे के सहारे रहने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने बताया कि लगातार बारिश के कारण क्षेत्र में कई कच्चे मकानों पर खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में प्रशासन को प्रभावित गांवों में सर्वे कराकर जर्जर मकानों की स्थिति का जायजा लेना चाहिए, ताकि समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा सके।



