
नई दिल्ली: बैंक खाते से पैसे निकलने के बावजूद अगर ग्राहक के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ट्रांजेक्शन का SMS अलर्ट नहीं पहुंचता है, तो इसे महज तकनीकी समस्या नहीं माना जा सकता। ऐसे ही एक मामले में उपभोक्ता आयोग ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को सेवा में कमी का दोषी माना और ग्राहक के खाते से निकली रकम ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया।
दिल्ली के उत्तर-पूर्वी जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बैंक को खाते से निकाली गई 1,35,500 रुपये की रकम शिकायत दर्ज होने की तारीख से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने का निर्देश दिया। इसके अलावा ग्राहक को 45 हजार रुपये मुआवजा और 9 प्रतिशत ब्याज के साथ 25 हजार रुपये कानूनी खर्च के रूप में देने को भी कहा गया।
खाते से धीरे-धीरे निकलती रही रकम
यह मामला दिल्ली के वेलकम इलाके की एक महिला के एसबीआई बचत खाते से जुड़ा था। शिकायत के अनुसार, मार्च 2020 के अंत तक खाते में करीब 1.35 लाख रुपये जमा थे। नवंबर में जब महिला पैसे निकालने बैंक पहुंचीं तो उन्हें पता चला कि खाते में रकम मौजूद नहीं है।
जांच में सामने आया कि मई से जुलाई 2020 के बीच अलग-अलग तारीखों पर विभिन्न ग्राहक सेवा केंद्रों के माध्यम से खाते से कई बार रकम निकाली गई थी।
SMS अलर्ट नहीं मिलने से देर से चला पता
सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि खाते से पैसे निकलने के बावजूद रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर कोई ट्रांजेक्शन अलर्ट नहीं भेजा गया। मोबाइल नंबर और पहचान से जुड़ी जानकारी बैंक रिकॉर्ड में अपडेट होने के बावजूद निकासी की जानकारी ग्राहक तक नहीं पहुंची।
समय पर सूचना नहीं मिलने के कारण महिला को लंबे समय तक खाते से हो रही निकासी का पता नहीं चला। इसी दौरान खाते से रकम निकलती रही।
बैंक की दलील को आयोग ने नहीं माना
बैंक की ओर से बताया गया कि रकम आधार नंबर के माध्यम से अलग-अलग स्थानों पर निकाली गई थी और शिकायत मिलने के बाद बैंक ने आंतरिक जांच भी कराई थी।
हालांकि, आयोग के सामने बैंक यह साबित नहीं कर सका कि खाते से पैसे निकलने के समय ग्राहक को SMS अलर्ट भेजे गए थे। आयोग ने इसी आधार पर बैंक की सेवा में कमी और लापरवाही को गंभीरता से लिया।
समय पर अलर्ट मिलता तो नुकसान से बच सकती थीं
आयोग ने पुराने उपभोक्ता मामलों के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि बैंकिंग लेनदेन की जानकारी ग्राहक तक समय पर पहुंचाना महत्वपूर्ण है। अगर खाते से रकम निकलने का अलर्ट समय पर मिल जाता, तो ग्राहक धोखाधड़ी का पता लगाकर तत्काल बैंक से संपर्क कर सकती थीं और आगे होने वाले नुकसान को रोकने की कोशिश कर सकती थीं।
सभी तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए आयोग ने बैंक को खाते से निकली रकम ब्याज सहित लौटाने के साथ मुआवजा और कानूनी खर्च का भुगतान करने का आदेश दिया।



