New Labor Codes: कॉर्पोरेट जगत और नौकरीपेशा लोगों के लिए आज एक बड़े बदलाव का दिन है. चारों नए लेबर कोड्स आज, यानी 9 मई से देश भर में पूरी तरह लागू हो गए हैं. सरकार ने इससे जुड़े फाइनल नियमों का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. दशकों पुराने 29 अलगअलग श्रम कानूनों का चैप्टर आज से क्लोज हो गया है. उनकी जगह अब इन चार नए और स्पष्ट लेबर कोड्स ने ले ली है.

हफ्ते में मैक्सिमम 48 घंटे ही काम
नए नियमों के तहत अब वर्किंग आवर्स की लिमिट तय कर दी गई है. किसी भी एम्प्लॉई से हफ्ते में 48 घंटे से ज्यादा काम नहीं लिया जा सकेगा. इसका मतलब है कि अलगअलग इंडस्ट्रीज में काम के घंटों को लेकर जो मनमानी चलती थी, उस पर अब ब्रेक लगेगा. साथ ही, हफ्ते में कम से कम एक दिन का वीकली ऑफ देना कंपनियों के लिए कानूनी रूप से अनिवार्य हो गया है.
एक्स्ट्रा काम, तो एक्स्ट्रा पैसा
कंपनियों में अक्सर यह देखने को मिलता है कि शिफ्ट खत्म होने के बाद भी एम्प्लॉईज को रोक लिया जाता है और उसके बदले उन्हें कोई आर्थिक फायदा नहीं मिलता. नए लेबर कोड्स ने इस व्यवस्था पर चोट की है. अब अगर कोई भी एम्प्लॉयर आपसे तय 48 घंटों से ज्यादा काम लेता है, तो उसे बाकायदा ओवरटाइम का पैसा देना होगा. यानी आपका कोई भी अतिरिक्त काम अब मुफ्त नहीं होगा.
अपॉइंटमेंट लेटर अब ‘ऑप्शन’ नहीं
छोटे उद्योगों या असंगठित क्षेत्रों में बिना किसी लिखापढ़ी के लोगों को काम पर रख लिया जाता है, जिससे कभी भी उन्हें नौकरी से निकाल देना आसान होता है. सरकार ने इस लूपहोल को बंद कर दिया है. अब नियमों के तहत हर एम्प्लॉयर को वर्कर हायर करते समय अपॉइंटमेंट लेटर देना ही होगा. इससे वर्कर और कंपनी के बीच एक ट्रांसपेरेंसी आएगी और रोजगार में सुरक्षा की गारंटी बढ़ेगी.
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ का रास्ता साफ
ऐसा नहीं है कि ये नियम सिर्फ एम्प्लॉईज के लिए हैं. कंपनियों और इंडस्ट्रियलिस्ट्स के लिए भी ये एक बड़ी राहत हैं. पहले एचआर और कंप्लायंस टीमों को 29 अलगअलग कानूनों के हिसाब से पेपरवर्क करना पड़ता था. अब वे सभी सिमट कर सिर्फ चार कोड्स में आ गए हैं. इससे कागजी कार्यवाही कम होगी, कानूनी उलझनें घटेंगी और देश में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को सीधा बूस्ट मिलेगा.
राज्यों के पाले में भी है गेंद
आपको याद होगा कि इन चारों लेबर कोड्स का बुनियादी ढांचा 21 नवंबर 2025 को ही आ गया था, लेकिन कुछ पेचीदा नियमों के पेंडिंग होने से यह पूरी तरह जमीन पर नहीं उतर पाया था. अब केंद्र सरकार ने अपनी तरफ से गैजेट नोटिफिकेशन निकालकर इसे लागू कर दिया है. हालांकि, लेबर एक ‘समवर्ती सूची’ का विषय है. इसका मतलब है कि केंद्र के बाद अब राज्य सरकारों को भी अपनेअपने स्तर पर इन नियमों को नोटिफाई करना होगा. अधिकारियों के मुताबिक, राज्यों की इस प्रक्रिया में थोड़ा और वक्त लग सकता है, लेकिन केंद्र की तरफ से नए सिस्टम को हरी झंडी मिल चुकी है.



