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पटना, बिहार: 10,789 दरोगा अभ्यर्थियों के मार्च से पहले पुलिस अलर्ट, मेंस परीक्षा रद्द होने पर क्यों भड़का गुस्सा?

पटना, बिहार: 10,789 दरोगा अभ्यर्थियों के मार्च से पहले पुलिस अलर्ट, मेंस परीक्षा रद्द होने पर क्यों भड़का गुस्सा?

पटना, बिहार: बिहार में दरोगा भर्ती की मेंस परीक्षा रद्द किए जाने का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। परीक्षा रद्द होने से नाराज 10,789 सफल अभ्यर्थियों ने गुरुवार को पटना में मार्च निकालकर विरोध जताने का ऐलान किया है। अभ्यर्थियों की योजना गांधी मैदान से लोक सेवक आवास तक मार्च निकालने की है। प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और प्रस्तावित मार्ग पर बैरिकेडिंग की गई है।

गांधी मैदान से शुरू होना था अभ्यर्थियों का मार्च

प्रदर्शन की शुरुआत सुबह 11 बजे गांधी मैदान के गेट नंबर 10 से प्रस्तावित थी। यहां से अभ्यर्थियों को जेपी गोलंबर, डाकबंगला चौराहा, तारामंडल, इनकम टैक्स गोलंबर और बिहार म्यूजियम होते हुए लोक सेवक आवास की ओर बढ़ना था।

अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। इसी वजह से उन्होंने एक बार फिर सड़कों पर उतरकर अपनी बात सरकार और संबंधित आयोग तक पहुंचाने का फैसला किया।

1,799 पदों की भर्ती में आखिर क्या है विवाद?

दरअसल, यह पूरा विवाद बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) की ओर से 1,799 पदों पर होने वाली दरोगा भर्ती की मुख्य परीक्षा रद्द किए जाने से जुड़ा है। अभ्यर्थियों के मुताबिक, उन्होंने प्रारंभिक परीक्षा पास करने के बाद मुख्य परीक्षा की तैयारी की थी। मुख्य परीक्षा के परिणाम के आधार पर सफल घोषित किए गए 10,789 अभ्यर्थी शारीरिक दक्षता परीक्षा की तैयारी में जुटे थे।

इसी बीच मुख्य परीक्षा रद्द किए जाने की सूचना ने उनकी चिंता बढ़ा दी। अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण की तैयारी के दौरान अचानक लिए गए इस फैसले से उनका भविष्य अनिश्चित हो गया है।

उनकी मांग है कि परीक्षा रद्द करने के पीछे बताए गए ‘अपरिहार्य कारणों’ की स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की जाए। उनका कहना है कि केवल कारण बताकर परीक्षा रद्द करने से उनकी शंकाओं का समाधान नहीं हो रहा है।

अभ्यर्थियों की ये हैं प्रमुख मांगें

आंदोलन कर रहे अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा रद्द करने के फैसले को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही उनकी मांग है कि शारीरिक दक्षता परीक्षा की तारीख जल्द घोषित की जाए।

अभ्यर्थी यह भी चाहते हैं कि आयोग परीक्षा रद्द करने के कारणों, निर्णय के आधार और भर्ती प्रक्रिया की आगे की समय-सीमा के बारे में स्पष्ट जानकारी दे। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए, ताकि उन्हें अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता का सामना न करना पड़े।

प्रदर्शन को लेकर पुलिस ने बढ़ाई सतर्कता

प्रस्तावित मार्च को देखते हुए पटना में सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शन मार्ग पर बैरिकेडिंग की गई है और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए वाटर कैनन और दंगा नियंत्रण वाहनों को भी तैयार रखा गया है।

मार्च के कारण शहर के प्रमुख चौराहों पर यातायात प्रभावित होने की आशंका जताई गई थी। प्रशासन की कोशिश है कि प्रदर्शन के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था न हो और जरूरत पड़ने पर यातायात को नियंत्रित किया जा सके।

पहले भी प्रदर्शन के दौरान हुआ था तनाव

दरोगा भर्ती परीक्षा रद्द किए जाने के विरोध में अभ्यर्थियों ने इससे पहले 5 अक्टूबर को भी पटना में प्रदर्शन किया था। उस दौरान प्रदर्शनकारियों ने आयोग के खिलाफ नारे लिखे पोस्टर दिखाए थे। जेपी गोलंबर के पास बैरिकेडिंग के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ने तथा लाठीचार्ज किए जाने की भी खबर सामने आई थी।

अब एक बार फिर अभ्यर्थियों ने आंदोलन तेज करने का फैसला किया है। उनकी मांग है कि आयोग परीक्षा रद्द करने के फैसले पर पुनर्विचार करे और भर्ती प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट करे।

फिलहाल, अभ्यर्थियों की निगाहें सरकार और बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग के अगले कदम पर टिकी हैं। प्रदर्शन के बाद भर्ती प्रक्रिया में कोई बदलाव होता है या अभ्यर्थियों का आंदोलन आगे बढ़ता है, यह संबंधित अधिकारियों के फैसले पर निर्भर करेगा।

सत्य रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और अभ्यर्थियों के दावों पर आधारित है। प्रदर्शन की वास्तविक स्थिति और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े किसी नए निर्णय की पुष्टि संबंधित प्रशासन या आयोग के आधिकारिक बयान से की जानी चाहिए।

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