वित्त वर्ष 2026 में भारत का 240 बिलियन से ज्यादा यानी करीब 23 लाख करोड़ रुपए का इंपोर्ट सिर्फ चार कमोडिटी ग्रुप से हुआ, जिनके इस्तेमाल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से ज्यादा समझदारी से करने की अपील की है. यह अपील देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने और आर्थिक मजबूती बढ़ाने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा है. रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 202526 में भारत ने 240.7 बिलियन डॉलर का कच्चा तेल, सोना, वनस्पति तेल और खाद इंपोर्ट किया, जो देश के कुल 775 बिलियन डॉलर के इंपोर्ट बिल का 31.1 फीसदी है. सबसे बड़ा हिस्सा क्रूड पेट्रोलियम का था, जिसका इंपोर्ट 134.7 बिलियन डॉलर का हुआ. सोने का इंपोर्ट बढ़कर रिकॉर्ड 72 बिलियन डॉलर हो गया, जबकि वनस्पति तेल का आयात 19.5 बिलियन डॉलर और खाद का आयात बढ़कर 14.5 बिलियन डॉलर हो गया.

पीएम मोदी ने की थी ये अपील
10 मई को प्रधानमंत्री की अपील में इन सभी कैटेगरी का सीधे तौर पर ज़िक्र किया गया था. उन्होंने नागरिकों से इलेक्ट्रिक वाहन अपनाकर, सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करके, कारपूलिंग करके और माल ढुलाई को रेलवे पर शिफ़्ट करके पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम करने की अपील की. किसानों से आग्रह किया गया कि वे डीजल से चलने वाले पंपों की जगह सोलर विकल्प अपनाए और कैमिकल फर्टीलाइजर का इस्तेमाल 50 फीसदी तक कम करें. घरों से भी खाने के तेल का इस्तेमाल कम करने को कहा गया.
एक साल के लिए गैरजरूरी सोने की खरीदारी टालने की अपील की गई. हैदराबाद में तेलंगाना BJP द्वारा आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए PM ने कहा कि ग्लोबल संकट के दौरान, देश को सबसे ऊपर रखते हुए, हमें कुछ संकल्प लेने होंगे… एक बड़ा संकल्प पेट्रोल और डीजल का समझदारी से इस्तेमाल करना होना चाहिए. ये टिप्पणियां पश्चिम एशिया संकट के बीच आई हैं, जिसने आयात की लागत में काफी बढ़ोतरी कर दी है.
इंपोर्ट बिल का असर
भारत की कच्चे तेल की बास्केट का औसत अप्रैल में 114.48 डॉलर प्रति बैरल और मई में 105.4 डॉलर प्रति बैरल रहा, जबकि वित्त वर्ष 2026 में इसका औसत 70.99 डॉलर प्रति बैरल था. व्यवहार में छोटेमोटे बदलावों का भी भारत के बाहरी खातों पर काफी असर पड़ सकता है, क्योंकि इंपोर्ट पर खर्च होने वाले हर तीन डॉलर में से लगभग एक डॉलर इन्हीं चार कमोडिटी पर खर्च होता है. अगर इसमें ऑर्गेनिक कैमिकल और खाद बनाने में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल भी शामिल कर लिया जाए, तो इंपोर्ट बिल और भी बढ़ जाता है. इनमें से कई चीजों का ट्रांसपोर्ट भी होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है.
सोने और खाद से जुड़ी चिंताएं भी शामिल
सोना और खाद इस बास्केट के सबसे तेजी से बढ़ने वाले हिस्से थे. गोल्ड इंपोर्ट वित्त वर्ष 2025 में 58 बिलियन डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 72 बिलियन डॉलर हो गया, जो लगभग 24 फीसदी की बढ़ोतरी है. वहीं, खाद का इंपोर्ट 77 फीसदी बढ़कर 14.6 बिलियन डॉलर हो गया. हालांकि कच्चे तेल का इंपोर्ट वित्त वर्ष 2025 में दर्ज 143.1 बिलियन डॉलर से कम रहा, फिर भी यह भारत के कुल आयात का 17.4 फीसदी रहा. वनस्पति तेलों का हिस्सा 2.5 फीसदी और खास की हिस्सेदारी 1.9 फीसदी देखने को मिली.
इन चारों वस्तुओं का कुल आयात बिल वित्त वर्ष 2021 के 112 बिलियन डॉलर से बढ़कर FY26 में 240.7 बिलियन डॉलर हो गया है, जो ग्लोबल कीमतों में बढ़ोतरी और घरेलू मांग में वृद्धि, दोनों को दर्शाता है. भारत की इंपोर्ट बास्केट में इनका हिस्सा, जो वित्त वर्ष 2016 और वित्त वर्ष 2017 तक तक गिरकर लगभग 30 फीसदी रह गया था, हाल के वर्षों में फिर से बढ़ने लगा है.



