
लखनऊ अमृत विचार: प्रदेश में फर्जी दस्तावेजों और गलत गाड़ी नंबरों के सहारे टोल टैक्स चोरी करने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। फर्जी फास्टैग बनाकर टोल प्लाजा से गाड़ियां निकालने के इस खेल में अब तक सरकारी खजाने को 5 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान पहुंच चुका है।
जांच में सामने आया है कि 142 से ज्यादा गाड़ियां फर्जी नंबर और कूटरचित कागजातों के दम पर टोल पार कर रही थीं। अधिकारियों का कहना है कि यह तो बस शुरुआत है, जांच जैसेजैसे आगे बढ़ेगी, घोटाले का आंकड़ा और बड़ा हो सकता है।
STF ने संभाला मोर्चा, टोल प्लाजा पर मारा छापा
मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच स्पेशल टास्क फोर्स को सौंपी गई है। STF ने कार्रवाई करते हुए टोल प्लाजा पर छापेमारी की और वहां से डीवीआर, सर्वर और कई अहम दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए। जांच टीम अब पूरे सिस्टम को खंगाल रही है ताकि इस फर्जीवाड़े की हर कड़ी को जोड़ा जा सके।
सुबूत मिटाने के लिए CCTV फुटेज से छेड़छाड़ की आशंका
जांच एजेंसियों को अंदेशा है कि पकड़े जाने के डर से आरोपियों ने साक्ष्य मिटाने की कोशिश की है। डीवीआर और सीसीटीवी फुटेज के साथ छेड़छाड़ किए जाने की बात सामने आ रही है। इसी वजह से एसटीएफ की एक विशेषज्ञ टीम अब सर्वर और डीवीआर से पुराना डाटा रिकवर करने में लगी हुई है।
डाटा मिलते ही खुलेगी पूरी पोल
डिजिटल डाटा और डिलीट हुई फुटेज रिकवर होते ही यह साफ हो जाएगा कि फर्जी नंबरों वाली गाड़ियां कबकब और कितनी बार टोल प्लाजा से गुजरीं। इसके बाद इस पूरे रैकेट के पीछे छिपे मास्टरमाइंड और टोल कर्मचारियों की मिलीभगत का भी पर्दाफाश हो जाएगा।



