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​​​​​मैसूर पैलेस में हेमा मालिनी​​​ के उस नृत्य ने जीता था दिल, लेकिन महल से जुड़ी रहस्यमयी कहानियां आज भी करती हैं हैरान

​​​​​मैसूर पैलेस में हेमा मालिनी​​​ के उस नृत्य ने जीता था दिल, लेकिन महल से जुड़ी रहस्यमयी कहानियां आज भी करती हैं हैरान

कर्नाटक के मैसूर में स्थित भव्य मैसूर पैलेस अपनी खूबसूरत वास्तुकला, शाही इतिहास और फिल्मों की शूटिंग के लिए दुनियाभर में मशहूर है। इस महल को देखने पहुंचने वाले पर्यटक इसकी भव्यता में खो जाते हैं। लेकिन इस ऐतिहासिक इमारत से जुड़ी कुछ ऐसी कहानियां भी हैं, जो लोगों के मन में रहस्य और रोमांच पैदा करती हैं। खास बात यह है कि 1976 में रिलीज हुई फिल्म ‘महबूबा’ में हेमा मालिनी का एक यादगार नृत्य भी इसी महल में फिल्माया गया था।

‘महबूबा’ फिल्म से जुड़ी है खास याद

फिल्म ‘महबूबा’ में हेमा मालिनी ने अपने शानदार नृत्य से दर्शकों का ध्यान खींचा था। मन्ना डे के गीत ‘गोरी तेरी पैजनिया’ पर उनका नृत्य आज भी कई लोगों को याद है। इस प्रस्तुति में थाली पर संतुलन बनाकर किया गया नृत्य खास आकर्षण था। इसे ‘तरंगम’ कहा जाता है, जो कुचिपुड़ी नृत्य शैली का हिस्सा है।

हेमा मालिनी बचपन से ही नृत्य का अभ्यास करती रही हैं। वह भरतनाट्यम की प्रशिक्षित नृत्यांगना हैं और कुचिपुड़ी तथा मोहिनीअट्टम में भी उनकी अच्छी पकड़ है। फिल्म में उनकी नृत्य कला और वर्षों की साधना साफ दिखाई देती है।

मैसूर पैलेस में फिल्माए गए दृश्यों ने इस ऐतिहासिक महल को दर्शकों के बीच एक अलग पहचान दिलाई। यही वजह है कि फिल्म देखने वाले कई लोगों के मन में इस महल को करीब से देखने की इच्छा पैदा हुई।

वाडियार राजवंश का ऐतिहासिक महल

मैसूर पैलेस को अंबा विलास पैलेस के नाम से भी जाना जाता है। यह कर्नाटक के मैसूर शहर में स्थित वाडियार राजवंश का ऐतिहासिक निवास रहा है। महल का इतिहास कई सदियों पुराना माना जाता है। समय के साथ इसका कई बार पुनर्निर्माण और विस्तार किया गया।

बताया जाता है कि पुराने महल का बड़ा हिस्सा लकड़ी से बना हुआ था। वर्ष 1897 में राजपरिवार के एक विवाह समारोह के दौरान यहां भीषण आग लग गई, जिससे पुरानी इमारत को भारी नुकसान पहुंचा। इसके बाद महाराजा कृष्णराजा वाडियार चतुर्थ के शासनकाल में नए महल का निर्माण कराया गया। इस निर्माण की जिम्मेदारी ब्रिटिश वास्तुकार हेनरी इरविन को दी गई थी। नया महल वर्ष 1912 में बनकर तैयार हुआ।

आज दिखाई देने वाला महल अपनी भव्यता और स्थापत्य कला के लिए जाना जाता है। इसमें सफेद गुंबद, ऊंचे टावर, विशाल दरबार हॉल और आकर्षक मेहराब हैं। महल के प्रवेश द्वारों और दीवारों पर की गई नक्काशी इसकी खूबसूरती को और बढ़ाती है।

महल में हैं कई मंदिर और विशाल दरबार हॉल

मैसूर पैलेस के भीतर कई धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल मौजूद हैं। मुख्य महल परिसर में मंदिरों के साथ राजपरिवार से जुड़ी कई दुर्लभ वस्तुएं भी रखी गई हैं। महल में दो बड़े दरबार हॉल हैं, जहां कभी राजा महत्वपूर्ण राजकीय कार्यक्रमों और समारोहों का आयोजन करते थे।

महल की वास्तुकला में हिंदू, इस्लामी, राजपूत और गोथिक शैलियों का मिश्रण दिखाई देता है। इसकी दीवारों पर बने चित्र, राजाओं के वस्त्र, पुराने हथियार और शाही सामान पर्यटकों को उस दौर की झलक दिखाते हैं।

रविवार और विशेष अवसरों पर महल को रोशनी से सजाया जाता है। रात में जगमगाता हुआ मैसूर पैलेस पर्यटकों के लिए खास आकर्षण बन जाता है। यहां आयोजित होने वाले लाइट एंड साउंड शो के जरिए भी महल के इतिहास और वाडियार राजवंश की कहानी बताई जाती है।

तालकाड़ु के श्राप की कहानी से जुड़ा रहस्य

मैसूर पैलेस जितना ऐतिहासिक है, उतनी ही चर्चित इससे जुड़ी लोककथाएं भी हैं। इनमें सबसे प्रसिद्ध तालकाड़ु के श्राप की कहानी है। यह कथा 17वीं शताब्दी की रानी अलमेलम्मा से जुड़ी बताई जाती है।

लोककथा के अनुसार, जब वाडियार शासक राजा वाडियार ने श्रीरंगपट्टनम पर अधिकार किया, तब रानी अलमेलम्मा के बहुमूल्य आभूषणों को लेकर विवाद हुआ। कहा जाता है कि सैनिकों के पहुंचने पर रानी ने कावेरी नदी में छलांग लगा दी। इससे पहले उन्होंने वाडियार राजवंश को लेकर तीन श्राप दिए थे।

इन श्रापों में मैसूर के राजपरिवार को उत्तराधिकारी न मिलने की बात भी शामिल थी। मान्यता है कि इसके बाद कई पीढ़ियों तक राजवंश में उत्तराधिकार के लिए दत्तक संतान का सहारा लेना पड़ा। इतिहास और लोककथाओं में इस घटना को लेकर अलग-अलग विवरण मिलते हैं, लेकिन यह कहानी आज भी मैसूर की चर्चित मान्यताओं में शामिल है।

रात में सुनाई देती हैं रहस्यमयी आवाजें?

मैसूर पैलेस से जुड़ी कुछ कहानियां भूत-प्रेत और रहस्यमयी घटनाओं को लेकर भी सुनाई जाती हैं। स्थानीय चर्चाओं और कुछ पर्यटकों के दावों के मुताबिक, रात के समय महल के गलियारों में अजीब आवाजें सुनाई देने की बातें कही जाती हैं।

कुछ लोककथाओं में एक नर्तकी की आत्मा का भी जिक्र मिलता है, जिसकी कथित तौर पर महल में असमय मृत्यु हो गई थी। कहा जाता है कि रात के सन्नाटे में कभी-कभी पायल जैसी आवाज सुनाई देती है। कुछ लोगों ने महल के पुराने हिस्सों में किसी की मौजूदगी महसूस होने का दावा भी किया है।

हालांकि इन घटनाओं की कोई प्रमाणित पुष्टि नहीं है। इन्हें महल से जुड़ी लोककथाओं और लोगों के व्यक्तिगत अनुभवों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

दिन में रौनक, रात में रहस्यमयी सन्नाटा

दिन के समय मैसूर पैलेस पर्यटकों से भरा रहता है। लोग यहां की नक्काशी, शाही वस्त्रों, हथियारों और ऐतिहासिक चित्रों को करीब से देखते हैं। महल का हर हिस्सा वाडियार राजवंश के वैभव की कहानी सुनाता नजर आता है।

लेकिन रात में पर्यटकों के जाने के बाद यही जगह शांत और सुनसान हो जाती है। दिनभर लोगों की आवाजाही से गूंजने वाले गलियारे रात में खामोश दिखाई देते हैं। ऐसे माहौल में किसी को अपने कदमों की आवाज भी असामान्य लग सकती है।

मैसूर पैलेस का आकर्षण केवल इसकी खूबसूरत इमारत या शाही इतिहास तक सीमित नहीं है। हेमा मालिनी की यादगार नृत्य प्रस्तुति, वाडियार राजवंश की विरासत और इससे जुड़ी रहस्यमयी लोककथाएं इसे देश के सबसे चर्चित ऐतिहासिक महलों में शामिल करती हैं।

सत्यम् रिपोर्ट: मैसूर पैलेस से जुड़ी ऐतिहासिक जानकारियां और रहस्यमयी घटनाओं की कहानियां उपलब्ध विवरणों एवं लोकमान्यताओं पर आधारित हैं। अलौकिक घटनाओं के दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

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