BusinessIndia

कागजी नोटों का जमाना पुराना? RBI गवर्नर ने बताया- देश में कब से शुरू होंगे प्लास्टिक के नोट

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने बुधवार को कहा कि अगर फील्ड ट्रायल योजना के अनुसार चलते हैं, तो भारत में अगले वित्त वर्ष की शुरुआत में प्लास्टिक करेंसी नोट चलन में आ सकते हैं. मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी की बैठक के बाद मीडिया ब्रीफिंग में बोलते हुए, मल्होत्रा ​​ने कहा कि RBI फील्ड ट्रायल पूरे होने के बाद अगले वित्त वर्ष की शुरुआत में पॉलीमर बैंकनोट लाने की योजना बना रहा है.

कागजी नोटों का जमाना पुराना? RBI गवर्नर ने बताया- देश में कब से शुरू होंगे प्लास्टिक के नोट

मल्होत्रा ​​ने कहा कि हमारा टारगेट है कि योजना के अनुसार, अगले वित्त वर्ष की शुरुआत में ये चलन में आ जाएं. RBI ने सरकार की मंजूरी मिलने के बाद ट्रायल के तौर पर 10 रुपए और 20 रुपए के पॉलीमर नोट लाने का प्रस्ताव दिया है. इस कदम से उस योजना को फिर से शुरू किया जा रहा है जिसकी घोषणा एक दशक से भी पहले की गई थी, लेकिन उसे कभी लागू नहीं किया गया.

RBI प्लास्टिक नोट क्यों ला रहा है?

इस कदम के पीछे की वजह बताते हुए मल्होत्रा ​​ने कहा कि पॉलीमर नोट ट्रेडिशनल कागजी करेंसी की तुलना में ज्यादा टिकाऊ होते हैं, जिससे वे कम मूल्य वाले नोटों के लिए खास तौर पर उपयुक्त होते हैं जो बारबार हाथों में बदलते रहते हैं. उन्होंने कहा कि पॉलीमर नोट टिकाऊपन और उम्र बढ़ाते हैं. वे कम मूल्य वाले नोटों के लिए इसलिए भी जरूरी हैं क्योंकि उनके चलन की गति ज्यादा होती है, और इसलिए उनकी उम्र कम होती है. 10 रुपए और 20 रुपए जैसे कम मूल्य वाले नोट ज्यादा मूल्य वाले नोटों की तुलना में बहुत तेजी से खराब हो जाते हैं, क्योंकि रोजमर्रा के ट्रांजेक्शन में उनका इस्तेमाल ज्यादा होता है. पॉलीमर नोटों के काफी लंबे समय तक चलने की उम्मीद है, जिससे उन्हें बारबार बदलने की जरूरत कम हो जाएगी.

सरकार ने क्या मंजूरी दी है?

पिछले महीने, सरकार ने फील्ड ट्रायल के लिए 10 रुपए और 20 रुपए के एकएक अरब पॉलीमर नोट लाने के RBI के प्रस्ताव को मंजूुरी दी थी. अगर ट्रायल सफल रहे तो नियमित रूप से जारी करने पर विचार किया जाएगा. यह प्रस्ताव तब आगे बढ़ा जब RBI की सहायक कंपनी, भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड ने ट्रायल बैंकनोट छापने के लिए ज़रूरी पॉलीमर सबस्ट्रेट के लिए टेंडर जारी किया. सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कदम केवल फील्ड ट्रायल के लिए है और अभी मौजूदा सभी कागजी करेंसी को पॉलीमर बैंकनोट से बदलने का कोई प्रस्ताव नहीं है.

पॉलीमर नोटों पर विचार क्यों किया जा रहा है?

मौजूदा भारतीय करेंसी, जो कॉटनबेस्ड पेपर पर छपती है, उसके विपरीत पॉलीमर नोट टिकाऊ प्लास्टिक सबस्ट्रेट पर छापे जाते हैं. RBI के बताए गए इंटरनेशनल स्टडीज से पता चला है कि पॉलीमर नोट, आम कागजी नोटों की तुलना में ज्यादा समय तक चलते हैं. हालांकि शुरू में इन्हें बनाने में ज्यादा खर्च आता है, लेकिन इनकी लंबी उम्र का मतलब है कि समय के साथ कम नोट छापने, लानेले जाने और बदलने की जरूरत पड़ती है, जिससे करेंसी मैनेजमेंट का कुल खर्च कम हो जाता है. RBI ने यह भी कहा है कि पॉलीमर नोट कम कीमत वाले नोटों के लिए खास तौर पर सही हैं क्योंकि ये नोट ज्यादा कीमत वाली करेंसी की तुलना में ज्यादा बार इस्तेमाल होते हैं.

कौन से देश पहले से कर रहे यूज?

पॉलीमर बैंकनोट का इस्तेमाल पहले से ही 60 से ज़्यादा देशों में हो रहा है, जिनमें ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड और वियतनाम शामिल हैं. ऑस्ट्रेलिया 1988 में पॉलीमर बैंकनोट लाने वाला पहला देश बना. तब से, कई सेंट्रल बैंकों ने इस टेक्नोलॉजी को अपनाया है क्योंकि यह मजबूत होती है, इसे बदलने का खर्च कम होता है और यह जल्दी खराब नहीं होती. इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड ने भी कहा है कि पॉलीमर नोटों की उम्र कागज़ी करेंसी से ज्यादा होती है और ये नोट बदलने और लानेले जाने की जरूरत को कम करके करेंसी बनाने से पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को कम कर सकते हैं.

क्या कागजी नोट बंद कर दिए जाएंगे?

नहीं. सरकार ने साफ कर दिया है कि पॉलीमर नोट मौजूदा कागजी करेंसी के साथसाथ चलेंगे. इन फील्ड ट्रायल्स का मकसद बड़े पैमाने पर जारी करने का कोई भी फैसला लेने से पहले भारतीय हालात में पॉलीमर नोटों के परफॉर्मेंस को परखना है. अगर ट्रायल सफल रहते हैं, तो उम्मीद है कि RBI पॉलीमर 10 रुपए और 20 रुपए के नोट रेगुलर तौर पर जारी करना शुरू कर देगा. गवर्नर मल्होत्रा ​​के बताए टाइमलाइन के मुताबिक, पहले नोट अगले फाइनेंशियल ईयर की शुरुआत में चलन में आ सकते हैं.

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply