Banking Fraud Refund Process: डिजिटल बैंकिंग के इस दौर में बैंक खातों से धोखाधड़ी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. हाल ही में ग्रेटर नोएडा में पंजाब नेशनल बैंक यानी PNB की एक शाखा से बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां ग्राहकों के खातों के अलावा फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD से बिना किसी जानकारी या मैसेज अलर्ट के करोड़ों रुपये गायब हो गए. अगर आपके बैंक अकाउंट से भी आपकी मर्जी के बिना पैसे कट जाते हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है. भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI के नियमों के तहत ग्राहकों को ऐसे मामलों में सुरक्षा के साथ पूरे रिफंड की गारंटी मिलती है. बस आपको सही समय पर सही कदम उठाना होगा.

खाते से पैसे कटते ही तुरंत उठाएं ये तीन कदम
अगर आपके खाते से अचानक पैसे चोरी हो जाएं, तो सबसे पहले अपने बैंक को इसकी जानकारी दें. बैंक के आधिकारिक कस्टमर केयर नंबर, मोबाइल ऐप या वेबसाइट के जरिए तुरंत फ्रॉड की शिकायत दर्ज कराएं. इसके साथ ही बैंक से अपना खाता तुरंत फ्रीज करने या डेबिट ब्लॉक करने को कहें, ताकि खाते से आगे पैसे न कटें. दूसरा जरूरी काम सबूत संभालने का है. शिकायत दर्ज कराने के बाद मिलने वाला रेफरेंस नंबर, ट्रांजेक्शन का SMS या ईमेल अलर्ट, बैंक स्टेटमेंट के अलावा स्क्रीनशॉट का रिकॉर्ड अपने पास सुरक्षित रख लें. तीसरा कदम साइबर हेल्पलाइन का है. वित्तीय धोखाधड़ी की रिपोर्ट तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दें या फिर cybercrime.gov.in पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज करें. अगर 1930 पर कॉल न लगे, तो बिना वक्त गंवाए पहले बैंक को खबर करें.
किसकी होगी जिम्मेदारी, जानें RBI का रिफंड नियम
RBI के नियमों के मुताबिक, धोखाधड़ी के मामलों में ग्राहक की जिम्मेदारी इस बात पर तय होती है कि उसने शिकायत कितनी जल्दी दर्ज कराई है. अगर फ्रॉड बैंक की लापरवाही या सिस्टम की खराबी से हुआ है, जैसा PNB के हालिया मामले में बैंक की अंदरूनी गड़बड़ी से हुआ, तो इसमें ग्राहक की कोई गलती नहीं मानी जाएगी. ऐसे में शिकायत कभी भी दर्ज हो, ग्राहक की जिम्मेदारी शून्य रहेगी. वहीं अगर किसी थर्डपार्टी चूक की वजह से फ्रॉड हुआ है, जिसमें न बैंक की गलती है न ग्राहक की, तब भी ग्राहक पर कोई देनदारी नहीं होगी. शर्त सिर्फ इतनी है कि ग्राहक को अलर्ट मिलने के 3 कामकाजी दिनों के अंदर बैंक को सूचना देनी होगी. ऐसे में पूरा पैसा बैंक को लौटाना होगा.
देरी से शिकायत करने या ओटीपी देने पर क्या होगा
अगर ग्राहक फ्रॉड होने के 4 से 7 कामकाजी दिनों के अंदर शिकायत करता है, तो उसकी जिम्मेदारी सीमित हो जाती है. ऐसे मामलों में ग्राहक को खाते के प्रकार के हिसाब से अधिकतम 5,000 रुपये से लेकर 25,000 रुपये तक या फ्रॉड की रकम, जो भी कम हो, उतना ही नुकसान उठाना पड़ेगा. अगर शिकायत 7 कामकाजी दिनों के बाद की जाती है, तो ग्राहक की देनदारी बैंक की बोर्डअनुमोदित पॉलिसी के हिसाब से तय होती है. लेकिन अगर नुकसान ग्राहक की अपनी लापरवाही, जैसे किसी के साथ OTP, PIN या पासवर्ड शेयर करने की वजह से हुआ है, तो शिकायत दर्ज कराने तक का पूरा नुकसान ग्राहक को खुद उठाना होगा. हालांकि, बैंक में शिकायत दर्ज कराने के बाद अगर कोई अतिरिक्त नुकसान होता है, तो उसकी भरपाई बैंक करेगा.
कितने दिनों में वापस मिलेगा खाते से कटा पैसा
रिफंड के समय को लेकर भी RBI के नियम एकदम साफ हैं. शून्य या सीमित जिम्मेदारी वाले मामलों में बैंक को शिकायत मिलने के 10 कामकाजी दिनों के अंदर ग्राहक के खाते में प्रोविजनल क्रेडिट यानी अस्थायी तौर पर पैसा डालना जरूरी है. ये रकम उसी तारीख से लागू मानी जाएगी, जिस दिन खाते से पैसे कटे थे. इसके अलावा सेविंग्स या डेबिट कार्ड खातों में फ्रॉड होने पर बैंक को ये भी पक्का करना होगा कि ग्राहक को ब्याज का कोई नुकसान न हो. बैंक को अपनी जांच पूरी करके शिकायत का अंतिम निपटारा अधिकतम 90 दिनों के अंदर करना होता है. अगर बैंक 90 दिनों में मामला हल नहीं कर पाता है, तो उसे ग्राहक को पूरा मुआवजा देना होगा.



